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जबरिया थोपे बिलों से लोग परेशान, सुनवाई भी नहीं

इंदौर

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 03:36 AM IST
इंदौर
दोनों बिल एक ही घर का कचरा उठाने और एक ही समयसीमा के हैं। इसी तरह कुछ घरों में तीन-तीन बिल आए हैं। बढ़े हुए बिलों से परेशान लोगों का कहना है कि उनसे जीएसटी भी लिया जा रहा है, जबकि बिल में उसके नंबर का कोई उल्लेख नहीं है। शहर के कई इलाकों में तो रविवार को कचरा वाहन पहुंचता ही नहीं है। कई जगह इनके फेरे तीन के बजाय केवल एक ही लगते हैं।

हाउस टैक्स से ज्यादा कचरा शुल्क

नगर निगम ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन में आवासीय शुल्क 100 रुपए प्रति माह तय किया है। यानी सालभर में 1200 रुपए चुकाना होंगे। शहर में रेट जोन पांच में आने वाले 60 से ज्यादा ऐसे इलाके हैं, जहां 400 वर्गफीट के निर्माण पर संपत्ति कर 1000 रुपए तक आता है। यानी 1800 और 2800 रुपए के कचरा बिल हाउस टैक्स से भी अधिक हो गए हैं। कहीं संपत्ति कर के बराबर तो कहीं उससे भी ज्यादा सफाई शुल्क हो गया है, जबकि संपत्ति कर में स्वच्छता शुल्क भी शामिल रहता है।

एक ही बार आता है कचरा वाहन

शहर के कुछ इलाकों में कचरा वाहन एक ही बार आ रहा है जबकि पहले गाड़ी तीन बार आती थी। मनोरमागंज और ओल्ड पलासिया के निवासियों का कहना है कि महीने में पांच दिन तो गाड़ी एक बार भी नहीं आती है। उनके घरों का कचरा नियमित नहीं उठ रहा है। रहवासी डॉ. जेड. एस. जाफरी के अनुसार निगम यह दावा खोखला है कि कचरा वाहनों में जीपीएस लगा है जो हर राउंड की गणना कर कंट्रोल रूम पर संदेश भेज देता है। फिर कैसे गाड़ी एक बार ही आ रही है और निगम कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।

कचरा भी नहीं उठा रहे हैं अटेंडर

श्रीनगर निवासी अखिलेश शर्मा ने बताया कि कचरा वाहन निश्चित समय पर नहीं आता है। लोग घरों के बाहर या गली के नुक्कड़ पर कचरा रखते हैं तो वाहन के साथ चलने वाले अटेंडर उसे हाथ तक नहीं लगाते हैं। घरों के बाहर रखा कचरा नहीं उठाया जाता है। अधिक फोर्स करने पर कचरा वाहन के साथ चलने वाले कर्मचारी कहते हैं कि अलग से रुपए दिए जाएंगे तो ही बाहर रखा कचरा उठाएंगे। रहवासियों ने अधिकारियों को शिकायत भी लेकिन स्थिति जस की तस है।