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ऑफिस से पति को महिलाकर्मियों के फोन आते, पत्नी मायके चली गई, जज बोले- शक की कोई दवा नहीं, फिर दोनों साथ / ऑफिस से पति को महिलाकर्मियों के फोन आते, पत्नी मायके चली गई, जज बोले- शक की कोई दवा नहीं, फिर दोनों साथ

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 04:20 AM IST

Indore News - फैमिली कोर्ट में जज की समझाइश पर साथ रहने को तैयार हुआ युगल यह कहते हुए रवाना हुआ कि दोबारा इस मोहल्ले में (यानी इस...

Indore News - from the office the husbands call the women workers the wife went to the maiden the judge said no medicine of doubt then both of them together
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फैमिली कोर्ट में जज की समझाइश पर साथ रहने को तैयार हुआ युगल यह कहते हुए रवाना हुआ कि दोबारा इस मोहल्ले में (यानी इस कोर्ट में) नहीं आएंगे। शनिवार को फैमिली कोर्ट में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कोर्ट ने छोटी-छोटी बातों को लेकर अलग हुए 17 जोड़ों को मिलाया। इनमें एक युगल 65 वर्षीय पति और 60 वर्षीय उसकी प|ी शामिल है।

पति ने तलाक का, प|ी ने भरण-पोषण का केस लगा रखा था

फैमिली कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सुबोध कुमार जैन ने खजराना क्षेत्र निवासी प्रशील और मोनिका को यह कहते हुए समझाया कि शक की कोई दवा नहीं। छोटे-छोटे विवाद से परिवार का सुख छिन जाता है। दोनों ने 2009 में प्रेम विवाह किया था। प्रशील एक कंपनी में नौकरी करता है और किसी काम से महिलाकर्मियों के फोन आने पर प|ी विवाद करती थी। सितंबर 2017 में प|ी दोनों बच्चों को पति के पास छोड़कर मायके चली गई थी। इस पर पति ने एडवोकेट जेएस ठाकुर के जरिए तलाक का केस लगाया था। उधर युवती ने भरण पोषण का केस लगा दिया। शुक्रवार को लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश जैन के समक्ष दोनों फिर से एक हो गए।

फैमिली कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सुबोध कुमार जैन ने फिर साथ रहने को राजी हुए युगल का मुंह मीठा कराया।

उम्र 60 के पार फिर भी होना चाहते एक-दूजे से अलग, समझाइश पर साथ रहने को राजी

लोक अदालत में कानपुर निवासी 65 वर्षीय नवलकिशोर और इंदौर निवासी 60 वर्षीया अनिता भी एक हो गए। दोनों पूर्व विवाहित थे और दोनों के पूर्व पति-प|ी से दो-दो बच्चे हैं। पति की पूर्व प|ी व प|ी का पूर्व पति नहीं होने से इन दोनों ने 10 जून 1997 में विवाह किया था। वर्ष 2014 में उनमें विवाद होने लगा तब महिला पति का घर छोड़कर इंदौर आ गई और यहां पति के खिलाफ भरण पोषण का केस लगाया था जिस पर कोर्ट ने 10 हजार रुपए भरण पोषण देने का आदेश दिया था। उधर पति ने कानपुर में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत साथ रहने के लिए केस लगाया। पति द्वारा कानपुर में लगाया गया केस सुप्रीम कोर्ट के आदेश इंदौर स्थानांतरित हो गया। यहां पति की ओर से एडवोकेट प्रमोद जोशी, एडवोकेट प्रणय शर्मा, चेतन दवे एवं महिला की ओर से एडवोकेट अचला जोशी प्रकरणों में पैरवी कर रही थी। जज की समझाइश पर दोनों साथ रहने को तैयार हो गए।

सात साल पहले विवाह, फिर तलाक का केस, अब हुए एक

49 वर्षीय प्रहलाद व 39 वर्षीय संध्या का विवाह 2011 में हुआ था। दोनों पूर्व में विवाहित थे। दोनों के बीच अलग-अलग रहने के लिए केस चल रहा था। द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश रेणुका कंचन की समझाइश पर दोनों साथ रहने को तैयार हो गए।

148 में से 73 केस का निराकरण

फैमिली कोर्ट के प्रोटोकाल विभाग के ब्रजेशकुमार भार्गव के मुताबिक फैमिली कोर्ट में लोक अदालत में कुल 148 केस रखे गए थे, जिनमें 73 का निराकरण हुआ। 17 दंपती फिर साथ रहने के लिए राजी हो गए।

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