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भय्यू महाराज का अंतिम सफर : बेटी बोली मैं तो बच्ची हूं...किसके सहारे छोड़ गए आप...पत्नी बोली मुझे भी ले चलो अपने साथ...

राज्य मंत्री का दर्जा देने वाली मप्र सरकार का कोई मंत्री नहीं हुआ अंतिम यात्रा में शामिल।

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2018, 07:13 PM IST
भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन करती बेटी कुहू। भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन करती बेटी कुहू।

- भय्यू महाराज की अंतिम यात्रा में केन्द्रीय मंत्री, महाराष्ट्र के मंत्री, राजस्थान के विधायक हुए शामिल।
- राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई नहीं होने पर मायूस हुए उनके भक्त
- महाराष्ट्र, राजस्थान, मप्र के साथ ही अन्य कई प्रदेश से करीब 5 हजार भक्त हुए शामिल
- अकेले महाराष्ट्र से ही 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे भक्त।


इंदौर। भय्यू महाराज का बुधवार को यहां भमोरी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। बिलखते हुए उनकी बेटी कुहू ने उन्हें मुखाग्नि दी। इससे पहले उनकी पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए बापट चौराहे स्थित उनके सूर्योदय आश्रम में रखा गया था। यहां केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और पंकजा मुंडे समेत कई हस्तियां उनके अंतिम दर्शन करने पहुंचे हालांकि मप्र सरकार का एक भी मंत्री उनके अंतिम दर्शनों के लिए नहीं पहुंचा। वहीं अंतिम दर्शनों के दौरान उनकी पत्नी डॉ. आयुषी और बेटी कुहू पूरे समय भय्यू महाराज की पार्थिव देह के सिरहाने बैठी रही। गौरतलब है कि भय्यू महाराज ने मंगलवार दोपहर अपने स्प्रिंग वैली स्थित घर पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।


एक बार बाबा को छू तो लेने दो...
बुधवार सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक का वह दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंख से अनायास ही आंसू बहने लगे। वह दुखद घड़ी थी भय्यू महाराज के अंतिम दर्शनों की। भय्यू महाराज का पाथिर्व शरीर कूलर में रखा हुआ था जो चारों तरफ से कांच से बंद था। सिरहाने पर बैठी बेटी चित्कार रही थी...बस एक ही शब्द कह रही थी...आपने मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया...वह बार-बार हाथ को बढ़ाकर उन्हें छूने की कोशिश कर रही थी कांच बीच में आड़े आ रहा था। बस वह एक ही बात कह रही थी एक बार मुझे बाबा को छू लेने दो...उन्हें एक बार गले तो लगा लेने दो। बाबा मैं तो अभी बच्ची हूं आपने अपनी बच्ची को कैसे अकेला छोड़ दिया अब मैं किसके सहारे जियूंगी...।


पत्नी बोली उन्हें अकेला मत ले जाओ मुझे भी साथ ले चलो
- जैसे ही दो बजे भय्यू महाराज को फूलों से सजे वाहन पर रखने के लिए उनका पार्थिव शरीर उठाया गया..सुबह से उनके पास बैठी पत्नी चित्कार उठी। पार्थिव देह को जाता देख वह चिखते हुए बोली उन्हें अकेले कहां ले जा रहे हो..मुझे भी साथ ले चलो...मैं उनके बिना जीकर क्या करूंगी...उनके बिना कैसे रहूंगी जिनके बिना मैं एक घंटे भी नहीं रह पाती थी। यह कहते हुए बदहवास होकर जमीन पर गिर गई। इससे पहले जब भय्यू महाराज की तीन माह की बेटी को पिता के अंतिम दर्शनों के लिए लाया गया तब भी वहां मौजूद हर शख्स की आंखे नम हो गई।

इनकी रही चर्चा


- राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त फिर भी नहीं आया एमपी का कोई भी मंत्री
भय्यू महाराज मप्र के साथ ही देश के जाने-माने चेहरे थे उन्होंने पीएम मोदी से लेकर अन्ना हजारे के साथ मंच साझा किया। एमपी के सीएम शिवराजसिंह चौहान उनके काफी करीब रहे, भय्यू महाराज की पत्नी की मौत के बाद सीएम परिवार सहित उनके शोक सभा में शामिल हुए थे। हाल ही में मप्र सरकार ने 5 बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था जिसमें भय्यू महाराज भी शामिल थे। हालांकि भय्यू महाराज ने राज्यमंत्री का दर्जा लेने से इंकार कर दिया था, उन्होंने कहा था कि उन्हें राज्यमंत्री को मिलने वाली कोई भी सुविधाएं नहीं चाहिए।

- भय्यू महाराज की अंतिम यात्रा पर सबसे चर्चा इसी बात की रही कि जिस शिवराज सरकार ने भय्यू महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा दिया उनके अंतिम संस्कार में वे स्वंय तो नहीं पहुंचे लेकिन उनका कोई मंत्री भी यहां नजर नहीं आया। हालांकि इंदौर क्रमांक-2 से विधायक रमेश मेंदोला पूरे समय वहां मौजूद रहे वहीं विधायक महेन्द्र हार्डिया, मालिनी गौड़, पूर्व महापौर कृष्ण मुरारी मोघे के अलावा कई भाजपा नेता अंतिम दर्शन करने पहुंचे। वहीं कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा पूरे समय भय्यू महाराज की पत्नी को संभालती रहीं। इसके अलावा पूर्व विघायक तुलसी सिलावट, कृपाशंकर शुक्ला आदि भी अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे थे।

- यहां आने वालों को उम्मीद थी की सीएम स्वंय भय्यू महाराज की अंतिम यात्रा में शामिल होंगे साथ ही उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी जाएगी लेकिन अंत समय तक सरकार की ओर से ऐसी कोई कवायद नजर नहीं आई जिससे भक्तों में निराशा दिखाई दी।

- भय्यू महाराज की मौत के बाद भी मां-बेटी में नहीं हुआ टसन कम
जिस पारिवारिक कलह को भय्यू महाराज की मौत की वजह माना जा रहा है वह उनकी मौत के बाद भी दिखाई दी। बुधवार सुबह बॉम्बे अस्पताल से सेवादार भय्यू महाराज के पार्थिव शरीर को उनके निवास शिवनेरी लेकर पहंुचे। यहां से पार्थिव देह को बापट चौराहे स्थित उनके सूर्योदय आश्रम लाया गया। घर से आश्रम आने के लिए पत्नी डॉ. आयुषी और बेटी कुहू एक ही कार सवार होकर आश्रम पहुंची लेकिन इस दौरान बात तो दूर उन्होंने एक दूसरे की तरफ देखा तक नहीं।

- पार्थिव देेह के एक किनारे पत्नी जबकि दूसरे किनारे पर बेटी बैठी विलाप करती रही लेकिन इस दुख की घड़ी में भी उन्होंने एक दूसरे को ढाढ़स नहीं बंधाया। पत्नी जहां कुर्सी पर बैठी पार्थिव देह को निहारती रही वहीं बेटी जमीन पर बैठ पिता के चेहरे को सहलाती रही मानों कह रही हो पापा उठ जाओ।

- एक ओर जहां पत्नी को उनके परिजन सांत्वना दे रहे थे वहीं भय्यू महाराज की मां और बेटी को भय्यू महाराज के करीबी और उनके सेवादार संभाल रहे थे। पूरे समय यहां भी टसन देखने को मिली।


अब आश्रम का क्या
सूर्योदय आश्रम वहीं आश्रम है जहां भय्यू महाराज अपने भक्तों को जीवन जीने की राह दिखाते थे। उन्होंने अंतिम पड़ाव पर भी उसी आश्रम से विदा किया गया। सवाल यह है कि जिस आश्रम को भय्यू महाराज ने बहुत ही जतन से खड़ा किया था अब उसका क्या होगा। क्योंकि भय्यू महाराज ने अपने सुसाइड नोट में पूरी जिम्मेदारी विनायक को सौंपी है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विनायक अब आश्रम की जिम्मेदारी भी देखेंगे। लेकिन यह तभी होगा जब ट्रस्टी भी विनायक को यह जिम्मेदारी सौंपे। ट्रस्टी के सहमत नहीं होने पर नया उत्तराधिकारी कौन होगा, ऐसे में कयास लग रहे हैं कि आश्रम की जिम्मेेदारी बेटी कुहू अपने कंधों पर ले सकती हैं क्योंकि वह पहले भी आश्रम के कार्यों में हिस्सा लेती रही है। लेकिन यह सब ट्रस्टियों पर ही निर्भर करेगा।


कौन है विनायक
विनायक भय्यू महाराज का सबसे प्रिय सेवक था वह करीब 20 साल पहले भय्यू महाराज के संपर्क में आया था तब से ही वह महाराज से इतना प्रभावित हुआ की उन्हीं का होकर रह गया। उनका ओहदा भय्यू महाराज के परिवार के सदस्य की तरह था। भय्यू महाराज के सभी काम उनकी देखरेख में ही चलते थे चाहे वह फिर प्रॉपर्टी से जुड़ा हो या फिर परिवार से, जिसका जिक्र भय्यू महाराज ने अपने सुसाइड नोट में भी किया है।


अब कुहू की जिम्मेदारी किसके कंधे पर
भय्यू महाराज की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि बेटी कुहू का क्या होगा। क्योंकि दूसरी मां और कुहू के मध्य बिलकुल भी नहीं बनती। ऐसे में उन दोनों का साथ रहना तो मुमकिन नहीं है। ऐसे में कुहू के परवरिश की जिम्मेदारी अब भय्यू महाराज की बुजुर्ग मां कुमुदिनी देशमुख के कंधो पर है। हालांकि भय्यू महाराज की मां भी काफी बुजुर्ग है ऐसे में दादी और पोती दोनों को ही किसी ना किसी के सहारे की जरूरत है ऐसे में सेवादार विनायक का नाम सबसे आगे आता है। जैसा की भय्यू महाराज ने अपने नोट में भी विनायक को ही सारी जिम्मेदारी देने के लिए कहा है। जिस बेटी को हायर एजुकेशन के लिए भय्यू महाराज विदेश भेजने वाले थे अब क्या कुहू उसी तरह अपनी पढ़ाई जारी रख पाएगी या फिर इंदौर में रहकर ही अपनी बुजुर्ग दादी और अपने पिता के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाएगी।

भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन के दौरान बिलखती पत्नी डॉ आयुषी। भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन के दौरान बिलखती पत्नी डॉ आयुषी।
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भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन करती बेटी कुहू।भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन करती बेटी कुहू।
भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन के दौरान बिलखती पत्नी डॉ आयुषी।भय्यू महाराज के अंतिम दर्शन के दौरान बिलखती पत्नी डॉ आयुषी।
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