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दर्द और घुटनों के इलाज के नाम पर गैंग ने 8 जिलों के 35 लोगों से लाखों रुपए ठगे

एक वर्ष पहले
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प्रातीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रातीकात्मक फोटो।
  • गैंग ने इंदौर के अलावा सागर, शिवपुरी, जबलपुर, भोपाल और ग्वालियर में की ठगी
  • एक ही गैंग ने तीन अलग-अलग डॉक्टरों के नाम पर ऑपरेट किए चलते-फिरते क्लीनिक
  • इंदौर जिले में 20 लोगों से 15 लाख की ठगी, अलग-अलग थानों में दर्ज होंगी शिकायतें

इंदौर. दर्द और घुटनों के इलाज के नाम पर इंजेक्शन से फ्लोरिक एसिड निकालने वाली गैंग 8 जिलों में 35 से  ज्यादा लोगों को ठग चुकी है। इस गैंग ने इंदौर जिले में ही 20 लोगों से 15 लाख रुपए की ठगी की है। पुलिस से इंदौर के सभी फरियादियों ने संपर्क किया है और अब उनके खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
 
तिलक नगर टीआई धर्मेंद्र शिवहरे के अनुसार बख्तावर राम नगर में रहने वाले रिटायर्ड बैंक अफसर को ठगने वाली गैंग ने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। यह गैंग अब तक प्रदेश में  सागर, शिवपुरी, जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर, इंदौर सहित अन्य जिलों में लोगों को ठग चुकी है। गैंग के आरोपी तीन डॉक्टरों के नाम पर धंधा चलाते थे। एक आरोपी खुद को मोहम्मद अंसारी तो दो आरोपी खुद को डॉक्टर हमीद बताते थे। आरोपियों ने बताया कि अंसारी और हमीद ऐसे नाम हैं, जो कई जगहों पर प्रसिद्ध डॉक्टर के होते हैं। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अपने ये नाम रख लिए।


टीआई के अनुसार गैंग को जब रिमांड पर लिया गया तो अखबारों की खबरें पढ़कर जिले के करीबन 15-20 लोगों ने संपर्क किया। उन्होंने आरोपियों को देखकर पहचान लिया और कहा कि उन्होंने ही उनके साथ ठगी की है। आरोपियों ने भी फरियादियों को पहचानकर कबूला कि उनसे भी वारदात की है। इस पर फरियादियों को उनके संबंधित थानों पर आवेदन देने के लिए कहा गया है। 

60 प्लस के लोगों को रोकता था दीपक बना अली
खुद को डॉ. मोहम्मद अंसारी बताने वाले मास्टर माइंड का बेटा है अली। वह 60 से ज्यादा उम्र के लोगों को रोकता और खुद का नाम दीपक शर्मा बताता था। वह बुजुर्गों को सुनसान इलाके में रोकता या फिर ऐसे लोगों को रोकता जो बाजार में अकेले जा रहे हों। वह कभी लोगों को अपनी मां या पिता के इलाज के फायदे की जानकारी देता या फिर खुद को डॉ. अंसारी का कर्मचारी बता देता था।  

परिजन को भी नहीं बताया
टीआई के अनुसार ठगी के शिकार हुए कुछ बुजुर्ग तो ऐसे हैं, जिन्होंने इस वारदात के बारे में अपने परिजन या बच्चों को भी जानकारी नहीं दी। ठगाने के बाद वे घरों में खामोशी से बैठ गए। अब जब बदमाशों की पकड़ाने की जानकारी मिली तो वे लोग थानों पर संपर्क कर रहे हैं।