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भावांतर योजना से खत्म हो रहा है कारोबार, 21 से अनाज व्यापारी महासंघ का हड़ताल का एेलान

इस आंदोलन को ‘आप जागो सरकार की घंटी बजाओ’ नारा दिया गया है।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 13, 2018, 08:09 AM IST

भावांतर योजना से खत्म हो रहा है कारोबार, 21 से अनाज व्यापारी महासंघ का हड़ताल का एेलान

इंदौर.प्रदेश सरकार की किसान हितैषी योजना भावांतर और फसल बिक्री पर बोनस की घोषणा से अनाज कारोबारी नाराज हैं। सकल अनाज दलहन-तिलहन व्यापारी महासंघ समिति ने इन योजनाओं के माध्यम से व्यापार के सरकारीकरण का आरोप लगाते हुए 21 से 23 जून तक प्रदेश की सभी अनाज मंडियां बंद रखने की घोषणा कर दी है। इंदौर की छावनी और लक्ष्मीबाई मंडी के साथ ही प्रदेश की कुल 230 मंडियां बंद रहेंगी। इस आंदोलन को ‘आप जागो सरकार की घंटी बजाओ’ नारा दिया गया है।

सरकार छोटे कारोबारियों को खत्म कर कॉर्पोरेट सेक्टर को बढ़ावा देना चाह रही

समिति अध्यक्ष गोपाल दास अग्रवाल ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद प्रदेश सरकार द्वारा विविध योजनाओं के द्वारा सरकारीकरण किया जा रहा है। इससे प्रदेश का व्यापार पूरी तरह खत्म हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि सरकार की नीति धीरे-धीरे छोटे व्यापारियों को समाप्त कर कॉर्पोरेट सेक्टर को बढ़ावा देना चाह रही है।

सरकार से अनाज व्यापारियों की ये हैं मांगें

- सरकार भावांतर या खरीदी बंद करें- राज्य सरकार व्यापार करना, भावांतर योजना या खरीदी का एेलान करना बंद करें। इससे किसान की उपज का दाम अस्थिर हो जाता है और यह गलत लोगों के हाथ में आता है। सिस्टम के लोग अपने वालों को फायदा पहुंचाते हैं और बदनाम व्यापारी को करते हैं, सरकार व्यापारियों को व्यापार करने दें।

- ई-नीलामी शुरू नहीं की जाए- सरकार 1 जुलाई से मंडियों में ई-नीलामी व्यवस्था करने जा रही है। इसे लेकर समिति का विरोध है। उनका कहना है कि अभी मंडियों में ही खरीदी-बिक्री को लेकर विवाद हो जाते हैं, फिर ऑनलाइन सौदों से और समस्या होगी।

- अनुज्ञा पत्र बंद किए जाएं-मंडी में खरीदे अनाज को बाहर बेचने पर व्यापारियों को मंडी से अनुज्ञा पत्र लेना होता है। इस पर समिति का कहना है कि हमने जब अनाज खरीद लिया। मंडी शुल्क दे दिया, फिर हम कहीं भी बेंचे, यह पत्र भ्रष्टाचार का माध्यम बनता है।

- आयकर एक्ट में हो संशोधन- आयकर एक्ट में दो लाख तक का नकद भुगतान किसान को करने की छूट है, लेकिन इसके लिए साबित करना होगा कि भुगतान किसान को ही हो रहा है। समिति की मांग है कि मंडियों में हो रहे अनुबंध पत्र को ही किसान माना जाए, इसका संशोधन आयकर एक्ट में किया जाए। इससे व्यापार गति पकड़ेगा।

- मंडी व्यापार पर निराश्रित कर समाप्त हो- व्यापारी समिति ने यह भी मांग की है कि मंडी व्यापार पर लगने वाला निराश्रित कर समाप्त किया जाए। इसके चलते व्यापार पर बेवजह का बोझ आ रहा है। इससे माल के दाम पर भी प्रभाव पड़ता है। यह कर बांग्लादेशी शरणार्थियों के लिए लागू किया गया था।

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