उज्जैन संसदीय क्षेत्र / भाजपा मोदी ‘मैजिक’ के सहारे, कांग्रेस को कर्ज माफी से ‘न्याय’ की उम्मीद

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 01:29 AM IST



भाजपा नेता रोड शो में नारियल पानी पीकर तराेताजा रहने की कोशिश भाजपा नेता रोड शो में नारियल पानी पीकर तराेताजा रहने की कोशिश
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भाजपा नेता रोड शो में नारियल पानी पीकर तराेताजा रहने की कोशिशभाजपा नेता रोड शो में नारियल पानी पीकर तराेताजा रहने की कोशिश

  • आठ विधानसभा क्षेत्रों में पांच कांग्रेस और तीन भाजपा के पास
  • समीकरण- यहां बलाई समाज के 1.32 लाख वोटर सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर

उज्जैन (राजेश माली). उज्जैन उत्तर में भाजपा-कांग्रेस दोनों ही दल कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते, क्योंकि यहीं की लीड निर्णायक साबित होने वाली है। छह महीने पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा को यहां से 25,724 वोट की बढ़त मिली थी। भाजपा की चुनौती इसे बरकरार रखने की है तो कांग्रेस का संघर्ष इस अंतर से पार पाने का है। भाजपा के प्रचार में जहां ‘नमो’ का ही जाप हो रहा है, वहीं कांग्रेस में कर्ज माफी और न्याय योजना के गीत बज रहे हैं।

 

पूरे संसदीय क्षेत्र का गणित समझने के लिए विधानसभावार स्थिति जानना जरूरी है। कुल आठ विधानसभा क्षेत्रों में पांच कांग्रेस और तीन भाजपा के पास हैं, लेकिन ओवरऑल भाजपा को 35,983 वोट ज्यादा मिले थे। सिर्फ उज्जैन उत्तर ही ऐसा क्षेत्र है, जहां भाजपा को ‘ठोस’ बढ़त मिली थी। उज्जैन दक्षिण व महिदपुर में कांग्रेस पीछे रही थी, लेकिन दोनों जगह बगावत ने उसका खेल बिगाड़ दिया था। बागियों और प्रत्याशी को मिले वोट मिला दें तो दोनों जगह कांग्रेस ने टक्कर दी थी।

 

बाकी पांच सीटों पर कांग्रेस को कुल 23 हजार वोटों की बढ़त मिली, जो उज्जैन उत्तर के लगभग बराबर है। भाजपा नेताओं का मानना है कि विधानसभा चुनाव में सरकार नहीं बनने का फायदा पार्टी को इस चुनाव में होगा, क्योंकि एंटी इनकंबेंसी का सारा गुस्सा निकल गया है। तीन लोकसभा क्षेत्रों के प्रभारी भाजपा नेता जगदीश अग्रवाल कहते हैं- ‘नि:संदेह छह महीने में स्थिति काफी बदल गई है। कांग्रेस के ऋण माफी वादे से किसान भ्रमित हो गए थे। अब उनका गुस्सा राज्य सरकार के प्रति है।

 

चुनाव में लोग मोदीजी को ही देख रहे हैं’। वहीं कांग्रेस को लगता है कि कर्ज माफी और न्याय योजना उसकी नैया पार लगा देगी। बलाई समाज भी महत्वपूर्ण फैक्टर है। यदि वास्तव में बलाई समाज की नाराजगी बरकरार है तो भाजपा के लिए इन्हें साधना चुनौती है। एससी के लिए रिजर्व इस संसदीय क्षेत्र में लगभग 1.32 लाख वोटर बलाई समाज के हैं। इसी समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले तराना विधायक महेश परमार कहते हैं- ‘2014 में समाज की एकतरफा वोटिंग के कारण ही चिंतामणि मालवीय को बड़ी जीत (3,09488 वोट की) मिली थी।  

 

इस बार लोगों में भाजपा के प्रति नाराजगी है। कर्ज माफी व न्याय योजना तो महत्वपूर्ण है ही’। कांग्रेस की चिंता विधानसभा चुनाव में पांच सीटों पर कम मार्जिन से जीत है। कांग्रेस को सबसे बड़ी 5896 वोटों से जीत नागदा में मिली थी। आलोट भी इसके आसपास ही था। वह भी तब जब एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ सवर्ण गुस्से में थे।

 

 

 

  • उज्जैन उत्तर : व्यावसायिक क्षेत्र होने से यहां व्यापारी वोट महत्वपूर्ण, जो विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में गया था। करीब 60 हजार मुस्लिम वोटों को लेकर कांग्रेस को उम्मीद है कि यह उसके साथ ही जाएगा।
  • उज्जैन दक्षिण : कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में गुटबाजी और बगावत का नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार वैसी स्थिति नहीं है, यही कांग्रेस के लिए राहत की बात है। वहीं भाजपा संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत है।
  • बड़नगर : टिकट देने और फिर वापस लेने के ड्रामे का नुकसान भाजपा को हुआ था। एंटी इनकंबेंसी का भी असर था जो अब कांग्रेस के प्रति दिखने लगी है। विधानसभा की लीड को बरकरार रखना कांग्रेस के लिए चुनौती होगी।
  • तराना : यहां भाजपा, कांग्रेस दोनों बराबर की स्थिति में है। राहुल की सभा के बाद कार्यकर्ता उत्साहित हैं पर भावांतर का का मुद्दा किसानों में नाराजगी की वजह है। फिरोजिया काे विधायक कार्यकाल में कराए गए कामों पर अब भी भरोसा है।
  • महिदपुर : सोंधिया राजपूत वोट निर्णायक हैं, जो भाजपा के साथ ही रहे हैं। महिदपुर कस्बा संवेदनशील माना जाता है, यहां राष्ट्रवाद और मोदी नाम का फायदा भाजपा को मिल सकता है। कांग्रेस के पक्ष में तथ्य यह है कि विधानसभा में बागी होकर कांग्रेस को तीसरे नंबर पर धकेलने वाले दिनेश बोस साथ हैं।
  • नागदा : कांग्रेस की सीट के बावजदू प्रचार में यहां भाजपा, कांग्रेस से आगे है। संगठन की दृष्टि से भी भाजपा की स्थिति मजबूत है लेकिन बलाई समाज के करीब 50 हजार वोटरों को साधने के लिए जतन करना पड़ रहे हैं। 
  • घट्टिया : यहां भी बलाई वोट महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। कांग्रेस विधायक रामलाल मालवीय इसी समाज से आते हैं। इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है।
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