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स्वच्छता सर्वेक्षण 2018: 10 गुना चुनौती पर फिर भी इंदौर नं.1, चेंज कर ली आदतें-फॉर्मूले और व्यवस्थाएं

स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 में झारखंड सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य चुना गया।

हरिनारायण शर्मा | Last Modified - May 17, 2018, 05:04 PM IST

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    बच्चों को साफ-सुथरा माहौल देने के लिए बदल दी हमने अपनी आदतें।

    इंदौर.इंदौर एक बार फिर देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बनकर उभरा है। शहर को लगातार दूसरे साल यह खिताब मिला है। आवास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार शाम स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के नतीजे घोषित किए। उन्होंने कहा- मुझे आश्चर्य नहीं है यह बताते हुए कि इंदौर फिर नं.1 चुना गया है। सर्वे में भोपाल दूसरे और चंडीगढ़ तीसरे नंबर पर है। स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 में झारखंड सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य चुना गया। इसके बाद महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ का स्थान रहा।

    स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 के तहत देश के सभी 4203 शहरों में सफाई की स्थिति का आकलन किया गया। सर्वेक्षण 4 जनवरी से शुरू किया गया था। पिछले साल इसमें 434 बड़े शहरों को शामिल किया गया था। 2016 में 73 शहर थे। 2014 से स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू किया गया यह तीसरा सर्वेक्षण है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में ग्रेटर मुंबई देश की सबसे साफ-सुथरी राजधानी बनकर उभरी है।


    10 लाख से ज्यादा वाले शहरों की स्थिति
    - सबसे साफ-सुथरा शहर- विजयवाड़ा
    - फास्टेस्ट मूवर बिग सिटी- गाजियाबाद
    - बेस्ट सिटी इन सिटीजन फीडबैक- कोटा
    - बेस्ट सिटी इन इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज- नागपुर
    - बेस्ट सिटी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट- नवी मुंबई

    3-10 लाख की आबादी वाले शहर
    - सबसे साफ-सुथरा शहर- मैसूर
    - फास्टेस्ट मूवर मीडियम सिटी- भिवंडी
    - बेस्ट सिटी इन सिटीजन फीडबैक- परभणी, महाराष्ट्र
    - बेस्ट सिटी इन इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज- अलीगढ़
    - बेस्ट सिटी इन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट- मेंगलोर

    स्वच्छता को लोगों ने संस्कृति ही बना लिया है, अब तो इसे मजबूती देनी है...भास्कर और आईआईएम की पड़ताल

    10 गुना चुनौती

    #साल 2017 में 434 शहर ही इस सर्वेक्षण में शामिल हुए थे, इस बार 4203 शहरों के बीच प्रतियोगिता थी। #300 शहरों ने हमारा मॉडल देखा, समझा और 40 शहरों ने इसे अपनाया भी यानी हमें कॉपी किया। #पिछली बार पिछड़े विशाखापट्‌टनम, सूरत, मैसूर, चंडीगढ़ सहित कई प्रतिस्पर्धी शहर ने पूरी ताकत लगा दी थी।

    8 आदतें...हमने डालीं...

    1. घर-दुकान से दे रहे कचरा -निगम ने पेटियां हटाकर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू किया तो लोग घर, दुकान से कचरा देने लगे। उसमें भी गीला और सूखा कचरा अलग-अलग।

    2. कचरे से बना रहे खाद -लोकमान्य नगर में 750 परिवार टेराकोटा पॉट से कचरे से खाद बना रहे हैं। हफ्ते में दो बार ही निगम को कचरा देते हैं।

    3. कचरे का वहीं निपटान -गीले कचरे को डि-सेंट्रलाइज्ड किया, खाद के लिए प्लांट लगाए। बगीचे, होटल, स्कूल में 700 से ज्यादा यूनिट लगी।


    4. पॉलिथीन का कम उपयोग -कचरा फैलने का बड़ा कारण पॉलिथीन थी। लोगाें ने इस्तेमाल कम कर दिया। दुकानदार भी मानक स्तर की ही पॉलिथीन देने लगे।

    5. वाहनों में रख रहे डस्टबिन -लोग कार में छोटे डस्टबिन रखने लगे, ताकि कचरा सड़क पर नहीं फेंकना पड़े। पान-गुटखा खाने वाले भी डस्टबिन का इस्तेमाल करने लगे।


    6. बच्चे टोकने लगे बड़ों को -सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के अनुसार एक बस्ती में महिला ने बताया कि बच्चे कहते हैं कचरा अलग-अलग करके दो।


    7. आयोजनों में विशेष ध्यान -जुलूस, रैली या धार्मिक आयोजन, लोग वहां भी सफाई पर विशेष ध्यान देने लगे। जुलूस के तत्काल बाद लोग सफाई कर देते हैं।


    8. आठवां वचन सफाई का -लोग स्वच्छता के लिए इतने जागरूक हो गए कि सामूहिक विवाह में नवदंपती आठवां वचन सफाई का लेने लगे हैं। डस्टबिन बांटे जा रहे हैं।

    4 फॉर्मूले...अपनाए

    1- कचरा पेटियां हटाईं -पहले शहर में सड़क किनारे कचरा पेटियां थीं। वे भर जाती थीं, तब भी कचरा नहीं उठता था। इससे गदंगी होती थी। आवारा पशु वहीं डटे रहते थे। सफाई के लिए निगम ने सबसे पहले कचरा पेटियां ही हटाईं।
    2- रात में भी होने लगी सफाई -बाजारों में पहले सुबह ही सफाई होती थी। निगम ने इस व्यवस्था को बदला। शाम को दुकानों से कचरा लेने लगे। इसके अलावा रात में भी बाजारों में सफाई होने लगी।
    3- वाहनों की डिजाइन बदली -पूरे देश में 1.8 क्यूबिक मीटर क्षमता के कचरा वाहन चलते हैं। इससे 300 घर ही कवर होते थे। इंदौर नगर निगम ने 3.3 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली गाड़ियां बनवाईं। अब एक गाड़ी 800 से एक हजार घरों से कचरा लेती है।
    4- बच्चे बने ब्रांड एंबेसेडर -सफाई के लिए बच्चे ब्रांड एंबेसेडर बने, ताकि घर में सफाई में खामी रहने पर वे बड़े लोगों को टोक सके। इसके अलावा स्कूल और काॅलेजों में स्वच्छता समितियों का गठन किया गया।

    6 व्यवस्था... बदलीं

    1- शहर में पहले कई स्थान ऐसे थे जहां कचरे के ढेर लगे रहते थे, लेकिन लोगों ने और निगम ने वहां वॉल बनवा दी और उस पर सुंदर पेंटिंग्स की। अब ऐसे स्थल लोगों के लिए सेल्फी पॉइंट बन गए हैं।

    2- कचरे का अंतिम तौर पर निपटान करने के लिए देवगुराड़िया प्रोसेसिंग प्लांट को विकसित किया गया। वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए। अंदर सड़कें बनाईं और ग्रीन बेल्ट का निर्माण किया, ताकि बदबू नहीं आए और बारिश में भी कचरा अंदर तक डाला जा सके।

    3- शहर को कचरापेटी मुक्त बनाया तो लोग बाहर कचरा फेंकने के बजाय घरों में एकत्रित करने लगे। सड़कों से धूल हटाने की मशीनों का उपयोग शुरू किया।

    4- लोगों ने खुले में शौच जाना बंद कर दिया। स्पॉट फाइन के डर से सड़कों पर थूकना बंद कर दिया।
    5- कर्मचारी संगठनों को विश्वास में लिया। पदाधिकारियों को व्यापार के अन्य वैधानिक तरीके ऑफर किए, ताकि होने वाले परिवर्तन का विरोध कम किया जा सके।

    6- 190 अस्पताल और नर्सिंग होम, 155 होटल, 104 मैरिज गार्डन और धर्मशालाओं और 17 मॉल और सुपर बाजार, इन जगहों से कचरा एकत्रित करने के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई। रात में भी निगम कर्मचारी सड़कों पर सफाई करने निकले।

    3 शहर... जिन्होंने इंदौर के सफाई के तरीके अपनाए

    1- गाजियाबाद -शहर में हुई 3-आर कॉन्फ्रेंस के बाद गाजियाबाद ने घर-घर कचरा कलेक्शन शुरू किया।

    2- कानपुर -जिस तरह कचरा अलग-अलग किया जाता है, उसी तर्ज पर कानपुर में भी किया जा रहा है।

    3- अहमदाबाद -हमारे कचरा ट्रांसफर स्टेशन जैसा बनाना चाहते हैं। दिल्ली ने भी इसके टेंडर किए हैं।

    3 बातें जो इंदौर के सम्मान में कही गईं...

    - महिंद्र ग्रुप के प्रमुख आनंद महिंद्रा ने ट्वीट करते हुए कहा कि पत्नी से पहली मुलाकात इंदौर में हुई थी। उस समय बहुत गंदा शहर था। सुना है अब बदल रहा है। मैं देखने के लिए जाना चाहता हूं।

    - अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि इंदौर बहुत साफ-सुथरा है। महिला के नेतृत्व में सफाई में नं.-1 बना है, यह सराहनीय है।

    - सिंगापुर के सेकंड चॉइस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन मोहम्मद सलेह मेरीकन ने कहा कि शादी के बाद हिंदुस्तान घूमने आया था। कई शहरों को देखा। अब इंदौर को देखा। यह दूसरे शहरों से काफी साफ नजर आया।

    गौरवान्वित करने वाले पल...

    इस साल अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र संघ की अंतरराष्ट्रीय रीजनल 3-आर फोरम इन एशिया एंड द पेसिफिक कॉन्फ्रेंस देश में पहली बार इंदौर में हुई। 40 देशों के 70 शहरों के मेयर और प्रतिनिधियों ने तीन दिन तक कचरे के निपटान पर मंथन किया। सभी ने यहां की सफाई की तारीफ की। यह निष्कर्ष भी निकला कि इंदौर जो कर रहा है, वही काम पूरी दुनिया करे। इसमें इंदौर की स्टडी को प्रमुख स्थान दिया गया।

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    घर में ही कचरे का निपटारा- शहर में साढ़े छह लाख से ज्यादा महिलाएं रोज घरों से कचरा-अलग करती हैं। इनमें से कई महिलाएं कचरे का इस्तेमाल कर घर में ही कम्पोस्ट खाद बनाती हैं।
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    गाड़ी में डस्टबिन- 35 हजार चार पहिया वाहन चालक रोज घर से निकलते वक्त कार में डस्टबिन लेकर निकलते हैं, जो कार के लिए ही डिजाइन किए गए हैं।
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    जब शहर आधी रात में नींद के आगोश में रहता है तब निगम कर्मचारी सड़कें चमकाते हैं। फोटो रात दो बजे इंदौर के राजबाड़ा की।
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    स्टार्ट अप शुरू किया- छात्रों ने दो गाड़ियां बनाई हैं, जिन पर मशीन से कचरे से खाद बनाते हैं। यह गीला कचरा रेस्त्रां, होटल, दुकानों से लेते हैं। संस्थान कचरा लेने के बदले छात्रों को शुल्क चुकाते हैं। निगम ने उनकी मदद करते कुछ क्षेत्र आवंटित किए हैं।
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    विजय नगर क्षेत्र की भाग्यश्री कॉलोनी में सुबह पौने नौ बजे कचरा अलग-अलग कर निगम को देती महिलाएं।
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    स्टेडियम में गो ग्रीन कॉन्सेप्ट- शहर में हुए आईपीएल मैचों में प्लास्टिक का उपयोग न के बराबर हुआ। स्टेडियम में जो सूखा कचरा निकला, उससे रोज 2200 से 2500 किलो खाद बनाई गई।
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    40 से ज्यादा शहर हमारे मॉडल पर कर रहे हैं कामः देश के 40 से ज्यादा शहर सफाई को लेकर हमारे द्वारा शुरू किए गए अलग-अलग मॉडल को अपना रहे हैं। इनमें बेंगलुरू, चेन्नई, वारंगल, मेंगलोर, कोच्चि, त्रिवेंद्रम, नवी मुंबई, कल्याण, डोंबीवली, मुंबई, जलगांव, नागपुर, अमरावती, नासिक, सिरपुर, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, नवसारी, राजकोट, धनबाद, रांची, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद, झांसी, गोरखपुर, बरेली, पटना, अलीगढ़, गाजियाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़, शिमला, धर्मशाला, अंडमान निकोबार, फरीदाबाद, मेरठ, रामपुर, मुजफ्फरनगर।
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