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मकर संक्रांति / शिप्रा में डुबकी लगाने बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, पतंग उड़ाने छतों पर दिखे बच्चे और बड़े

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 12:00 PM IST


happy makarsankranti 2019 devotees reached shipra river for holy dip
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happy makarsankranti 2019 devotees reached shipra river for holy dip

  • उज्जैन में कालियादेह महल स्थित सूर्य मंदिर पर मंगलवार को भगवान सूर्य का अभिषेक होगा

इंदौर. मकर संक्रांति 14 जनवरी की शाम 7.51 बजे शुरू होगी, लेकिन सोमवार सुबह से ही श्रद्धालु शिप्रा स्नान के लिए उज्जैन पहुंचे और त्रिवेणाी घाट पर स्नानकर सूर्यदेव को जल चढ़ाया। सूर्य इस समय धनु छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व स्नान और दान-पुण्य 15 जनवरी को होगा। उज्जैन में कालियादेह महल स्थित सूर्य मंदिर पर मंगलवार सुबह 10 बजे से भगवान सूर्य का अभिषेक किया जाएगा। वहीं सुबह से ही बच्चे और बड़े पतंग लेकर छतों पर नजर आए। इसके पहले रविवार को मुख्य सचिव एसआर मोहंती त्रिवेणी पर शिप्रा नदी के पानी की व्यवस्था देखने पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से पूछा - कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से कैसे रोकें।

 

नर्मदा का 70 एमसीएफटी पानी आया, त्रिवेणी और गऊघाट का जलस्तर बढ़ा : संक्रांति के लिए त्रिवेणी से 43 किमी दूर देवास के शिप्रा डेम से शनिवार शाम से रविवार तक 17 घंटे में 2.38 एमसीएम यानी 70 एमसीएफटी पानी छोड़ा गया। पानी तेज रफ्तार से बहता हुआ रात 2.30 बजे किठोदा डेम पार कर सुबह त्रिवेणी पर भरे पानी में जा मिला। शाम 4 बजे त्रिवेणी डेम का लेवल 8 फीट से 14 फीट हो जाने से 7 गेट खोल दिए गए। यहां से पानी गऊघाट स्टापडेम पहुंच गया, जिससे रात 8 बजे तक गऊघाट का लेवल 8.4 फीट हो गया। रामघाट पर पानी का लेवल 4.5 फीट रखा है, जिसे गंभीर डेम के पानी से भरा गया है। पुलिस और राजस्व विभाग के अमले की निगरानी में शिप्रा डेम से पानी छोड़ा। डेम और त्रिवेणी के बीच स्थित 13 स्टापडेमों के गेट खुले रखे। रात ढाई बजे यह किठौदा डेम पार कर त्रिवेणी की ओर बहने लगा। त्रिवेणी पर पानी बढ़ने की शुरुआत हालाकि सुबह 9 बजे से हुई। शाम 4 बजे तक लेवल कान्ह पर बनाए मिट्‌टी के डेम के लेवल (14 फीट) तक पहुंचने लगा तो त्रिवेणी के गेट खोले गए। गऊघाट और त्रिवेणी स्टापडेम यदि पूरी क्षमता से भर जाते हैं तो यहां 90 एमसीएफटी पानी भर सकता है।

 

 

मकर संक्रांति पर शिप्रा में आया नर्मदा का पानी।

सूर्य की आराधना का खास महत्व : ज्योतिषविद अमर डिब्बावाला के अनुसार मकर संक्रांति 15 को मनाई जाएगी। इसके साथ ही मलमास भी समाप्त हो जाएगा। अर्चना सरमंडल के अनुसार पौष सूर्य आराधना का माह है। इसी में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति पर सूर्य की आराधना का खास महत्व है। अगर किसी की कुंडली में सूर्य की स्थिति अच्छी नहीं होती है ऐसे लोगों को सूर्य उपासना करना चाहिए। पितृदोष निवारण के लिए मकर संक्रांति पर पितृ तर्पण करना चाहिए। संक्रांति के दिन तांबे के लोटे में जल लें, उसमें कंकू मिलाएं और फूल डालें। जल से सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल चढ़ाते वक्त सूर्य की तरफ देखते रहे और और बोलें- ऊं सूर्याय नमः। लाल कपड़े में 7 मुट्ठी चावल, तीन मुट्ठी मूंग की दाल, 7 गांठ हल्दी और दक्षिणा रखें। जिस व्यक्ति को समस्या है उस पर से एंटी क्लॉक वाइज सात बार उतार लें और गणेशजी के मंदिर में रखकर आ जाएं।


 

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