देवास / अब तक 15 लोस चुनाव हुए, लेकिन मुकाबला कभी भी नजदीकी नहीं रहा



History of Dewas Lok Sabha seat
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History of Dewas Lok Sabha seat

  • वोट प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो जीत का सबसे कम अंतर 1957 में 1.2% रहा
  • 2014 के चुनाव में तो जीत का अंतर 24.5% पर पहुंच गया

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 03:34 AM IST

देवास (योगेश पंवार). चुनावों में बहुत ही कम वोटों से हार-जीत के किस्से खूब हैं। अधिकतर सीटों पर कभी न कभी ऐसे रोचक चुनाव हुए हैं, लेकिन देवास-शाजापुर सीट इससे अब तक अछूती है। इस सीट पर अब तक 15 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन मुकाबला कभी भी नजदीकी नहीं रहा। यहां जीत का अंतर बड़ा ही होता है। वोट प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो जीत का सबसे कम अंतर 1957 में 1.2% रहा। इसके बाद जीत का अंतर हमेशा ज्यादा ही रहा। 2014 के चुनाव में तो जीत का अंतर 24.5% पर पहुंच गया।

 

देवास-शाजापुर सीट :

 

 

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परिसीमन और नाम बदलने का असर : 

2009 के पहले तक इस लोकसभा सीट का नाम शाजापुर था, लेकिन इसे बदलकर अब देवास-शाजापुर लोकसभा सीट कर दिया गया है। इस बीच परिसीमन भी हुआ। कुछ विधानसभा सीटें जोड़ी गईं तो कुछ हटाई गईं। नाम बदला, लेकिन इस सीट के मतदाताओं की तासिर नहीं बदली। 2009 में जीत का अंतर 18122 वोट था तो 2014 में अंतर 280313 वोट का रहा।

 

सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले को नहीं दिया टिकट :

जीत का अंतर और वोट प्रतिशत के लिहाज से अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने वाले मौजूदा सांसद मनोहर ऊंटवाल (विस चुनाव 2018 में ऊंटवाल आगर से विधायक चुने गए हैं) की जगह भाजपा ने जज से इस्तीफा देकर पार्टी में आए महेंद्र सोलंकी को टिकट दिया है। दूसरी तरफ भाजपा ने झाबुआ से मौजूदा विधायक जीएस डामोर को रतलाम सीट से टिकट देकर साफ कर दिया है कि देवास में ऊंटवाल का टिकट कमजोर प्रदर्शन के आधार पर ही काटा गया।

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