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मजदूरों ने सरकार की बात मानी होती तो भुगतान में नहीं आती परेशानी; हुकमचंद मिल मामले में शासन

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 05:49 AM IST

मजदूरों द्वारा यदि उस वक्त आपत्ति न ली गई होती तो आज उन्हें भुगतान मिलने में आसानी होती।

Hukmchand Mill case

इंदौर. हाई कोर्ट में मंगलवार को शासन की ओर से अंतिम बहस में कहा कि कैबिनेट द्वारा दिसंबर 2015 में लिए गए निर्णय के अनुसार शासन मजदूरों का भुगतान मिल की जमीन के विकास और विक्रय से प्राप्त होने वाली राशि से होना है। इसके लिए कोर्ट की अनुमति के लिए दो आवेदन लगाए जा चुके हैं। बैंकों व हुकमचंद मिल मजदूरों के विरोध के कारण कोर्ट द्वारा अनुमति नहींं दिए जाने से भूमि का विकास व विक्रय नहीं हो सका। बहस के दौरान शासन की ओर से यह भी कहा गया कि मजदूरों द्वारा यदि उस वक्त आपत्ति न ली गई होती तो आज उन्हें भुगतान मिलने में आसानी होती।


शासन की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया कि मजदूरों को प्राइवेट बैंक द्वारा भ्रमित कर शासन द्वारा प्रस्तुत योजना को स्वीकृत नहीं होने दिया जा रहा है, क्योंकि शासन मजदूरों को भुगतान की योजना स्वीकृत कर लेता है तो बैंकोंं को कुछ नहीं मिलेगा।


शासन की ओर से यह भी बताया गया कि मजदूरों व बैंकों के मिल से संबंधित बकाया राशि की भुगतान की कोई वैधानिक जवाबदेही नहीं होने के बावजूद भी शासन द्वारा मजदूरों के प्रति सहानुभूति के आधार पर भुगतान की स्वीकृति कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय के आधार पर की गई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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Hukmchand Mill case
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