मध्यप्रदेश / कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों को नसबंदी का टारगेट देने का आदेश वापस लिया, शिवराज ने इसे अघोषित आपातकाल बताया था

If the target of vasectomy is not met, the salary will be stopped, compulsory retirement will be given.
X
If the target of vasectomy is not met, the salary will be stopped, compulsory retirement will be given.

  • आदेश के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को हर महीने 5 से 10 पुरुषों के नसंबदी ऑपरेशन कराना अनिवार्य था
  • इसके अनुसार- टारगेट पूरा नहीं होने पर नो-वर्क, नो-पे की बात भी कही गई थी, कर्मचारियों ने कहा था- जबरन नसबंदी नहीं कर सकते

दैनिक भास्कर

Feb 21, 2020, 03:10 PM IST

इंदौर. कमलनाथ सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को हर महीने 5 से 10 पुरुषों के नसंबदी ऑपरेशन कराने का आदेश विवाद बढ़ने के बाद शुक्रवार को वापस ले लिया है। स्वास्थ्य मंत्री तुलसीराम सिलावट ने यह जानकारी दी। वहीं, राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य निदेशक छवि भारद्वाज को पद से हटा दिया है। दरअसल, भारद्वाज ने अपने आदेश में कहा था कि कर्मचारियों को टारगेट पूरा नहीं करने पर नो-वर्क, नो-पे के आधार पर वेतन नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस सरकार के इस आदेश की तुलना इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी के नसबंदी अभियान से की थी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक ने अधिकारियों को पत्र लिखा

  • परिवार नियोजन के अभियान के तहत हर साल प्रदेश के जिलों को कुल आबादी के 0.6% नसबंदी ऑपरेशन का टारगेट दिया जाता है। इंदौर में यह टारगेट 22 हजार ऑपरेशन का है। कुछ जिले इसे हासिल कर भी लेते हैं, लेकिन इनमें पुरुषों की सहभागिता बहुत कम है। हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक छवि भारद्धाज ने इस पर नाराजगी जताते हुए सभी कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखा।
  • इसमें भारद्वाज ने कहा- प्रदेश में मात्र 0.5% पुरुष नसबंदी के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अब ‌विभाग के पुरुषकर्मियों को जागरूकता अभियान के तहत परिवार नियोजन का टारगेट दिया जाए। इस पत्र के बाद इंदौर सीएमएचओ कार्यालय ने पत्र जारी कर कर्मचारियों से कहा कि अगर टारगेट के तहत काम नहीं किया तो अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रस्ताव भेजेंगे। अफसरों के मुताबिक, प्रदेश की आबादी 7 करोड़ से अधिक है, हर साल 6 से 7 लाख नसबंदी ऑपरेशन के टारगेट होते हैं, पर पिछले साल ये संख्या सिर्फ 2514 रही।

25 जिलों का टोटल फर्टिलिटी रेट 3 से ज्यादा
प्रदेश में 25 जिले ऐसे हैं, जहां का टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) तीन से अधिक है, जबकि मप्र में 2.1 टीएफआर का लक्ष्य है। टीएफआर का मतलब है कि एक महिला जीवनकाल में कितने बच्चों को जन्म देती है। कुछ जिलों में टारगेट भी हासिल नहीं हो पाते हैं, जिससे पूरे प्रदेश के आंकड़े बिगड़ते हैं। लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. ललित मोहन पंत के मुताबिक, पुरुष नसबंदी तुलनात्मक रूप से आसान है। इसमें एनेस्थीसिया देने की जरूरत नहीं होती है। जोखिम भी कम होते हैं। कई बार महिलाएं पति के न करवाने पर मजबूरी में ये ऑपरेशन करवाती हैं।

स्वास्थ्य कर्मचारी बोले- जबरन ऑपरेशन तो नहीं करा सकते
सरकार के आदेश के बाद एमपीडब्ल्यू और पुरुष सुपरवाइजरों ने विरोध शुरू कर दिया था। उनका कहना है कि वे जिले में घर-घर जागरूकता अभियान तो चला सकते हैं, लेकिन किसी का जबरदस्ती नसबंदी ऑपरेशन नहीं करवा सकते। वहीं, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा- नसबंदी के मामले में ऐसा लग रहा है कि मप्र में आपातकाल लगा हो और संजय गांधी की चौकड़ी अपने नियम बनाकर शासन चलाने का प्रयास कर रही हो। हालांकि, कांग्रेस प्रवक्ता सैय्यद जाफर का कहना था कि आदेश का मकसद सिर्फ नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करना है। वेतन वृद्धि रोकना या नौकरी से निकाल देना मकसद नहीं है।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना