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महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर होती है तो वह शोषण, अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाने में घबराती नहीं

स्त्री और पुरुष गाड़ी के दो पहियों के समान हैं। दोनों को शिक्षा के लिए समान अवसर मिलना चाहिए। यदि महिला शिक्षित और...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 03:36 AM IST
Indore - महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर होती है तो वह शोषण, अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाने में घबराती नहीं
स्त्री और पुरुष गाड़ी के दो पहियों के समान हैं। दोनों को शिक्षा के लिए समान अवसर मिलना चाहिए। यदि महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर होती है तो वह अत्याचार और शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने में घबराती नहीं है। यह बात रोटरी क्लब ऑफ नॉर्थ की अध्यक्ष रेखा मंगल ने कही।

वे अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर बरली ग्रामीण महिला विकास संस्थान में हुए कार्यक्रम में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि एक पुरुष शिक्षित होता है तो एक इंसान शिक्षित होता है लेकिन एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है। संस्थान निदेशिका ताहेरा जाधव ने कहा कि शिक्षा पूरी मानव सभ्यता को आकार देने वाली शक्ति है। वह पशुता और इंसानियत में भेद स्थापित करती है। यदि एक महिला शिक्षित होती है तो वह स्वयं और बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग होती है साथ ही घर की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में भी योगदान देती है।

स्लोगन प्रतियोगिता के विजेताओं को अतिथियों ने उपहार देकर पुरस्कृत किया।

गीत और कविताओं पर प्रतिभागियों ने दी नृत्य प्रस्तुति

इस मौके पर प्रशिक्षणार्थियों ने साक्षरता से जुड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किया, जिसमें भिलाली और हिंदी गीत और कविताओं पर नृत्य प्रस्तुत किया। शिक्षा के महत्व पर कराई गई स्लोगन प्रतियोगिता में माया मुझाल्दे पहले, संगीता वसुनिया दूसरे और लक्ष्मी सस्तिया तीसरे स्थान पर रहीं। संचालन रेखा राठौर ने किया। आभार योगेश जाधव ने माना।

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