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भास्कर खास / बचपन में भाई की टोपी व बैल्ट पहनकर खिंचवाई थी फोटो, इसी को हासिल करना लक्ष्य बनाया, आज नेवी में सेवाएं दे रही अंजड़ की बेटी

In childhood, the photo was taken wearing a brother's cap and belt, this is the goal to achieve
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In childhood, the photo was taken wearing a brother's cap and belt, this is the goal to achieve

  • नौसेना दिवस पर अंजड़ क्षेत्र की पहली महिला भारतीय नौसेना लेफ्टिनेंट सुरभि भावसार से बातचीत

Dainik Bhaskar

Dec 05, 2019, 03:58 AM IST

अंजड़ (बड़वानी) . नगर की बेटी सुरभि भावसार ने बचपन में फुफेरे भाई के दिखाए सपने को पूरा कर भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है। वे अब नौसेना में रहकर देश की सेवा कर रही हैं। नौसेना दिवस पर सुरभि ने भास्कर से खास चर्चा में बताया कि उन्हें डिफेंस में जाने का लक्ष्य उनके बुआ के बेटे स्वप्निल पंवार से मिला, जो इंडियन नेवी में मरीन इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। एक बार स्वप्निल छुट्टियों में घर आए तो उन्होंने अपनी नौसेना की कैप और बेल्ट लगाकर सुरभि के हाथ पर भारतीय ध्वज बनाकर उसकी फोटो खिंचवाई।


परिषद ने दिया था अंजड़ रत्न सम्मान : कुछ समय बाद एक सड़क दुर्घटना में स्वप्निल की मौत हो गई थी। सुरभि ने बताया उस समय वह 12 साल की थी। अपने भाई स्वप्निल की गोद में ही सोई हुई थी। उस हादसे ने उन्हें विचलित कर दिया था, लेकिन भाई की इच्छा को पूरी करने के लिए तब से ही नेवी में जाने का लक्ष्य बनाया और लगातार प्रयास किया। आज नौसेना में लेफ्टिनेंट पद पर सेवाएं दे रही हूं। 15 अगस्त पर अंजड़ नगर परिषद ने उनका सम्मान कर उन्हें अंजड़ रत्न से नवाजा था।


सुरभि के पिता अनिल भावसार, मां रीता भावसार ने बताया वह बचपन से पढ़ाई के साथ ही खेलों में भी अव्वल रही। उसकी 11वीं तक शिक्षा नगर के निजी स्कूल में हुई। इसके बाद 12वीं बुरहानपुर से पास की। इंदौर से इंजीनियरिंग करने के बाद से उसने नेवी की तैयारी शुरू कर दी थी।  


दो बार असफलता के बाद भी नहीं मानी हार : इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में ही सुरभि ने सेना की परीक्षा देना शुरू कर दिया। यहां कुछ परीक्षाओं में लक्ष्य के काफी नजदीक पहुंचकर भी सफलता नहीं मिली। दो बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और मेहनत और दृढ़ निश्चय के चलते सुरभि ने इंडियन नेवी की परीक्षा में सफलता हासिल की। इसके बाद वह सैन्य अधिकारी के लिए चुनी गई। 28 दिसंबर 2015 में 6 महीने की कठिन ट्रेंनिग के बाद नेवल बेस एजिमाला केरल में पास आउट परेड में सुरभि के माता-पिता ने सब लेफ्टिनेंट का बेच उसके कंधे पर लगाकर गौरवान्वित महसूस किया।

इसलिए मनाया जाता है नौसेना दिवस

नौसेना दिवस 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना की जीत के जश्न के रूप में हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है।

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