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नोटबंदी / कांग्रेस सांसद ने कहा- देश का संचालन ऐसे लोगों के हाथों में है जिन्हें अर्थव्यवस्था की समझ नहीं



कांग्रेस ने 8 नवंबर को बताया काला दिवस कांग्रेस ने 8 नवंबर को बताया काला दिवस
कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने शुक्रवार को इंदौर में दिया बयान कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने शुक्रवार को इंदौर में दिया बयान
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कांग्रेस ने 8 नवंबर को बताया काला दिवसकांग्रेस ने 8 नवंबर को बताया काला दिवस
कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने शुक्रवार को इंदौर में दिया बयानकांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने शुक्रवार को इंदौर में दिया बयान

  • अर्थशास्त्री और कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने शुक्रवार को इंदौर में दिया बयान
  • कहा- नोटबंदी का दुष्परिणाम देश आज भी भुगत रहा है
  • कांग्रेस ने 8 नवंबर को बताया काला दिवस

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 02:35 PM IST

इंदौर. तीन साल पहले 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा करते हुए 500 और एक हजार के नोटो को चलन से बाहर कर दिया गया था। कांग्रेस ने शुक्रवार को नोटबंदी की तीसरी बरसी पर इस दिन को काला दिवस बताया है। कांग्रेसी सांसद और अर्थशास्त्री पीएल पुनिया ने इंदौर में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि नोटबंदी का दुष्परिणाम देश आज भी भुुगत रहा है। देश का संचालन ऐसे लोगों के हाथों में हैं जिन्हें अर्थव्यवस्था की समझ नहीं है।


पुनिया ने कहा कि 3 साल पहले अचानक लागू की गई नोटबंदी का असर अब भी  अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से देखा जा रहा है। नोटबंदी के कारण छोटे और मझोले उद्योग अब भी घाटे से नहीं उबर पाए हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी की घोषणा के बाद उसी रात प्रधानमंत्री जापान जाते हैं और वहां हिन्दुस्तानियों का मजाक उड़ाते है। यह एक ऐसा कदम था जो बगैर सोचे समझे उठाया गया था और जिसका दुष्परिणाम हम आज भी भुगत रहे हैं, अर्थव्यवस्था आज भी पटरी पर नहीं आ सकी है। 


उन्होंने कहा कि उस समय पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि इस कदम के परिणाम गंभीर होंगे और अर्थव्यवस्था में दो फीसदी तक की गिरावट आएग। देश की ग्रोथ रेट जब गिरकर 5 फीसदी पर आ गई तब पुन: मनमोहन सिंह ने कहा था कि इस ग्रोथ रेट को देखने से ऐसा लगाता है कि नोटबंदी ओर जीएसटी को जिस प्रकार से लागू किया गया है उसका असर अब भी बरकार है। पुनिया ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि देश ऐसे लोगों के हाथ में हैं जिन्हें अर्थव्यवस्था का जायजा और उसकी गिरती हुई हालत को सुधारने के लिए उठाने वाले कदमों के बारे में सोचने समझने की क्षमता नहीं है।

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