लोक अदालत / बच्चों के चेहरे उदास देख साथ रहने को राजी हुए दंपत्ति, 77 साल की दादी को मिला पोतों का प्यार



indore court news 15 people ready to stay with National Lok Adalat
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indore court news 15 people ready to stay with National Lok Adalat

  • जज बोले- अपने झगड़े छोड़ो, तुम्हारे भरोसे दुनिया में आए बच्चों के बारे में सोचो
  • लोक अदालत में 15 घर टूटने से बचे, ज्यादातर मामलों में बच्चों के कारण दंपत्ति तैयार हुए

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 06:17 PM IST

इंदौर. शनिवार को मेगा लोक अदालत में 15 घर टूटने से बच गए। कहीं सिगरेट, शराब के कारण तलाक की नौबत आ गई थी तो कहीं घर के झगड़े में पति-पत्नी अलग रहने लग गए थे। लगभग सभी मामलों में संतान ने गृहस्थी की गाड़ी को पटरी पर लाने का काम किया। दो-तीन साल के बच्चों के चेहरे की उदासी ने मां-बाप का दिल पिघला दिया। फैमिली कोर्ट के न्यायाधीशों ने भी दंपत्ति से कहा कि अपने झगड़े छोड़ों, छोटी-छोटी बातों को एक कान से सुनकर दूसरे निकाल दो. जो बच्चे दुनिया में आए उनके बारे में सोचो। सुनवाई से पहले अलग-अलग आए दंपत्ति हाथ में हाथ डालकर फैमिली कोर्ट से बाहर गए। फैमिली कोर्ट के प्रोटोकाॅल प्रभारी ब्रजेश भार्गव के मुताबिक 300 में से 73 केस का निराकरण हो गया।

 

प्रधान न्यायाधीश सुबोध कुमार जैन की कोर्ट में 3, प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरभि मिश्रा की कोर्ट में तीन और द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश रेणुका कंचन की कोर्ट में दंपत्ति के मामलों का निराकरण हुआ। 

 

70 साल की दादी को मिला पोतों का प्यार 
अधिवक्ता प्रमोद जोशी, प्रणय शर्मा के मुताबिक सांवेर रोड पर रहने वाली राधादेवी के पति राजकुमार की मौत 2012 में हो गई। एक साल बात बेटा भी चल बसा। दादी अकेली रह गई। पाई-पाई को मोहताज हो गई। दादी ने पड़ोसियों की मदद से चार पोते और बहू से 20 हजार रुपए महीना भरण-पोषण भत्ता दिए जाने के लिए अर्जी लगाई। पोते शनिवार को कोर्ट आए। दादी को एक कोने में हाथ जोड़े बैठे देखा तो रुआसे हो गए। प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरभि मिश्रा ने पोतों से कहा कि आपके स्वर्गवासी पिता की मां है। आपकी दादी हैं। जब आप छोटे थे तो इन्होंने आपका ध्यान रखा होगा। अब आपकी बारी है। बुुर्जग घर के वटवृक्ष होते हैं। जिनकी छांव हमें मिलती है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पोते तीन हजार रुपए महीना दादी को दें। पोतोंं ने भी कहा कि दादी को अब घर पर ले जाएंगे और प्यार से रखेंगे। 


धर्मस्थल पर रहने वाले बच्चों को मिलेगी छत और शिक्षा 
10 और 12 साल के दो बेटों के साथ महिला 2009 से कर्बला स्थित धर्मस्थल पर पूजन सामग्री, साफ-सफाई कर गुजर बसर कर रही थी। उसका घर भी धर्मस्थल ही था। ठंड, बारिश, गर्मी में वह बच्चों के साथ वहीं रहती थी। उसने भी भरण-पोषण भत्ते के लिए परिवाद लगाया था। न्यायालय में पति-पत्नी हाजिर हुए तो सबसे पहले बच्चों की पढ़ाई पर सहमति बनी। बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने पर राजी हुए। वहीं पति को आदेश दिया कि वह पांच हजार रुपए महीना पत्नी को देगा ताकि वह जीवनयापन कर सके। 


सिगरेट, शराब ने तलाक की नौबत ला दी 
किला मैदान क्षेत्र के रहने वाले संजय और मनीषा के बीच अलगाव की वजह पति का नशा करना थी। सिगरेट और शराब पीकर वह आए दिन मनीषा को पीटता था। घर से निकाल देता था। मायके जाने से रोकता, पड़ोसियों से बात भी नहीं करने देता था। मनीषा ने तंग कर अलग रहने का फैसला कर लिया। दो साल पहले मनीषा ने अलग होने के लिए फैमिली कोर्ट में परिवाद दायर किया था। इसके पहले दोनों की कई बार काउंसिलिंग की गई। कई बार की समझाइश के बाद दोनों में तालमेल बैठा। पति ने तय किया कि वह पत्नी को पूरा सम्मान देगा। शनिवार को फैमिली कोर्ट के समक्ष भी दोनों आए तो गृहस्थी अच्छे से चलाने की बात कही। पति ने भी नशा छोड़ने की बात कही।

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