अहिंसा का अनोखा उपासक : 15 साल में 5 हजार धर्मग्रंथों के पन्ने पलट-पलट कर हटाई पूजन, खाद्य सामग्री ताकि जीव हत्या न हो

मध्य प्रदेश न्यूज: 70 साल की उम्र में बेटे के घर नोएडा गए तब भी नहीं छोड़ा यह काम

विश्वनाथ सिंह

Apr 17, 2019, 03:07 PM IST
Indore Madhya Pradesh News in Hindi Unique worshiper of non-violence

इंदौर (मध्य प्रदेश)। दिगंबर जैन समाज के जिनालयाें में विभिन्न धार्मिक आयोजनों के दौरान धर्मग्रंथों से पढ़कर पूजन किया जाता है। ऐसे में इन ग्रंथों में कुमकुम-चावल व हल्दी गिरने से ये खराब हो जाते थे। खाद्य सामग्री किताबों में लगने से इनमें दीमक, चींटियां लगने के अलावा कीड़े भी पनप जाते थे। कई बार इन किताबों को बेतरतीब रखने के दौरान जीव हत्या भी होती थी। इसे रोकने के लिए समाज के 74 वर्षीय एक व्यक्ति ने 15 साल पहले जो प्रयास शुरू किए, उसके सकारात्मक परिणाम यह हुए कि अब तक पांच हजार धर्मग्रंथ, जो कि जीर्ण-शीर्ण हालत में थे, उन्हें ठीक कर अलमारी में जमाया जा चुका है।

सुदामा नगर निवासी 74 वर्षीय अभय बाकलीवाल किताबों से कुमकुम और चावल निकालने का काम निरंतर करते हैं, ताकि किताबों में छोटे जीव न पनपें। बाकलीवाल ग्रामोद्योग के डिप्टी डायरेक्टर के पद से 2004 में रिटायर हुए थे। बाकलीवाल ने बताया साफ की गई किताबों को आसानी से पहचाना जा सके, इसके लिए टेप चिपकाकर नाम भी लिखे हैं।

सेवा का धर्म : पूजन के दौरान किताबों में खाद्य सामग्री जाने से लग जाती थी दीमक, चींटियां, शहर के जिनालयों के साथ नोएडा के जैन मंदिर में 700 किताबों को ठीक किया

सुदामा नगर जैन मंदिर से की शुरुआत : सुदामा नगर जैन मंदिर से यह पहल शुरू की। इसके बाद गुमाश्ता नगर, स्कीम 71, बड़ी नसिया और राजबाड़ा स्थित लाल मंदिर में भी किताबें साफ की। किताबों को रखने के लिए एक अलमारी का इंतजाम भी किया।

बेटे के घर नोएडा गए तब भी सेवा नहीं छोड़ी : बाकलीवाल कुछ साल पहले बेटे के घर नाेएडा गए तो वहां सेक्टर 50 में स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पुजारी से आग्रह कर 70 किताबें लाकर उन्हें ठीक किया। इस जिनालय में 700 किताबों को ठीक किया।

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