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भास्कर खास / बजट में बोले वित्त मंत्री- पैसे की कमी नहीं, फिर भी इंदौर नगर निगम समेत संभाग के निकायों को नहीं मिले बकाया साढ़े 300 करोड़ रुपए



Indore municipal corporation, including the divisional bodies, have not received outstanding Rs.300 crores
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Indore municipal corporation, including the divisional bodies, have not received outstanding Rs.300 crores

  • इंदौर निगम के अटके हैं 218 करोड़, मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास और स्टैम्प ड्यूटी का हिस्सा भी तीन साल से अटका

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 05:26 AM IST

हरिनारायण शर्मा | इंदौर  . राज्य सरकार ने बुधवार को पेश किए बजट में भले ही लंबे दावे किए हो और वित्त मंत्री ने कहा भी कि सरकार के पास पैसे की कमी नहीं है, लेकिन नगरीय निकायों की हालत खस्ता है। अकेले इंदौर नगर निगम को ही शासन से 218 करोड़ रुपए तो अनुदान के ही नहीं मिले हैं वहीं संभाग की राशि मिलाकर 350 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है। इसी कारण मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास, स्वच्छ भारत मिशन, स्टैम्प ड्यूटी और 14वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि भी पेंडिंग है।

 

इंदौर नगर निगम ने तो पिछले माह ही पत्र लिखकर इस राशि की मांग की थी। उच्च प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो भाेपाल में बैठे नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी भी फिलहाल हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कारण यही है कि सरकार के पास फिलहाल पैसे नहीं हैं। 

 

इंदौर की स्थिति : स्टैम्प ड्यूटी के 118, वित्त आयोग के 40 करोड़ बाकी : महापौर मालिनी गौड़ ने भी केंद्र से विशेष फंड की मांग की थी। निगमायुक्त आशीष सिंह ने नगरीय प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर कहा कि राज्य शासन से इंदौर नगर निगम को मिलने वाली बकाया राशि का भुगतान जल्द किया जाए। इसमें स्टैम्प ड्यूटी के 118 करोड़, मार्च से पहले जो अन्य मद से मिलना थे, उसके 20 करोड़, मुख्यमंत्री अधोसंरचना के 40 करोड़, 14वें वित्त आयोग के 40 करोड़। इस तरह 218 करोड़ की मांग एक ओर हो चुकी है वहीं 50 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वच्छ भारत मिशन, चुंगी-क्षति पूर्ति सहित अन्य मद की पिछले महीनों में बकाया हो गई है।

 

संभाग की स्थिति : 96 करोड़ बकाया सिर्फ मुख्यमंत्री इंफ्रास्ट्रक्चर योजना में : संभाग में 3 नगर निगम, 11 नगर पालिका और 48 नगर परिषद हैं। मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास के तहत नगर परिषदों को 50 लाख से एक करोड़, नगर पालिकाओं को 2 से 3 करोड़ और निगमों को 5 से 10 करोड़ का विशेष अनुदान राज्य सरकार से मिलता है। इस साल पिछले 8 से 10 महीनेे से इस योजना के तहत कोई काम नहीं हुआ क्योंकि आठ महीने से पैसा ही जारी नहीं हुआ। निगमों का 15 करोड़, नगर पालिकाओं का करीब 33 करोड़ और नगर परिषदों का करीब 48 करोड़ मिलाकर 96 करोड़ बकाया है। स्वच्छ भारत मिशन सहित अन्य कामों पर भी पैसा रुक-रुककर मिल रहा है। 

 

भाजपा सरकार ने क्लस्टर बनाए थे, कांग्रेस सरकार ने निरस्त की प्लानिंग : शिवराज सिंह चौहान सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत निकायों से निकलने वाले कचरे के ट्रीटमेंट के लिए क्लस्टर वाइज कचरा निपटान संयंत्र लगाने का निर्णय लिया था। इसमें इंदौर जिले में हातोद, सांवेर, महू, बेटमा को मिलाकर एक क्लस्टर बनाया था। इस सरकार ने उस निर्णय को खारिज करते हुए सभी निकायों को अपने स्तर पर ऐसे संयंत्र लगाने के लिए कहा है। हालांकि अफसर इसे अच्छा निर्णय मान रहे हैं, क्योंकि इससे कचरा ट्रांसपोर्टेशन पर कम खर्च होगा। दुष्परिणाम यह होगा कि एक भी संयंत्र बड़े पैमाने पर नहीं लग सकेगा, जिससे बिजली या डीजल बनाने जैसे प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकें।

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