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  • Indore Municipal Corporation Is Engaged In Lifting Debris From Behind 6 Feet High Canaat, Tomorrow Millions Will Be Here

निगम का दावा- सीतलामाता बाजार से उठा लिया है मलबा, गुरुवार रात यहां होंगे लाखों लोग, सुरक्षा पर अब भी लगा है प्रश्नचिन्ह

एक वर्ष पहले
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  • गुरुवार को अनंत चतुदर्शी के अवसर पर नृसिंह बाजार चौराहे से गोराकुंड होकर निकलेगी झांकी
  • सड़क चौड़िकरण को लेकर निगम ने की है यहां तोड़फोड़, अब भी पड़ा है मलबा
  • खतरनाक स्थिति में हैं आधे टूटे भवन, सड़क पर लटक रहे हैं बिजली के तार
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इंदौर. अनंत चतुर्दशी पर 12 सितंबर को पारंपरिक झांकी निकलेगी जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं, लेकिन सीतलामाता बाजार क्षेत्र में तोड़फोड़ के बाद जनता की सुरक्षा को लेकर प्रश्नचिन्ह बरकरार है। मंगलवार को निगम ने इस क्षेत्र में मात्र 6 फीट ऊंची कनात लगाकर मलबे को ढंकने का प्रयास किया, वहीं बुधवार को कनात के पीछे पड़े मलबे को निगम द्वारा हटाने का दावा किया गया। इसके बावजूद गुरुवार रात निकलने वाले चल समारोह में शामिल होने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर संशय बरकरार है। वहीं बुधवार को निगम व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने झांकी मार्ग का दौरा कर तैयारियों को जायजा लिया।

झांकी चल समारोह जवाहर मार्ग से होता हुआ नृसिंह बाजार चौराहे से सितलामाता बाजार-गोराकुंड होते हुए खजूरी बाजार पहुंचेगा। समस्या यह है कि स्मार्ट सिटी के तहत निगम ने नृसिंह बाजार चौराहा, सीतलामाता बाजार, गोराकुंड तक कई घर और दुकानों को तोड़ दिया है। इस तोड़फोड़ का मलबा बुधवार तक सड़क पर पड़ा हुआ है। वहीं आधे टूटे मकान भी खतरनाक स्थिति में है। 

जनता के प्रतिनिधियों ने निगम के अधिकारियों से झांकी समारोह के बाद इस मार्ग पर तोड़फोड़ की कार्रवाई करने का निवेदन किया था लेकिन निगम ने जल्दबाजी दिखाते हुए यहां कार्रवाई कर दी। तब निगमायुक्त ने कहा था कि 12 सितंबर से पहले यहां का मलबा पूरी तरह से हटा लिया जाएगा और लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके बावजूद बुधवार तक मलबा सड़क पर पड़ा हुआ है और यहां-वहां बिजली के तार लटके हुए है।
 
निगम अधिकारी इस मामले को हलके में ले रहे हैं। झांकी देखने के लिए लाखों लोग उमड़ते हैं, वह 30 से 40 फीट ऊंची जर्जर इमारतों पर चढ़ेंगे तो उन्हें कैसे रोका जाएगा? इसके साथ ही जर्जर इमारतों के नीचे भी लाखों लोग खड़े रहेंगे उनकी सुरक्षा किस प्रकार से होगी इस पर कोई ठोस योजना अब तक निगम के पास नहीं है। बहरहाल पूरे मामले में इंदौर नगर निगम की लापरवाही सामने आ रही है। 

झांकी मार्ग पर रहेगा खतरा
12 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर निकलने वाली झांकियों के दौरान आम जनता की सुरक्षा पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है। झांकियां डीआरपी लाइन से प्रारंभ होकर चिकमंगलूर चौराहा, जेल रोड, एमजी रोड, कृष्णपुरा छत्री, नंदलालपुरा, जवाहर मार्ग, गुरुद्वारा चौराहा, बंबई बाजार, नृसिंह बाजार चौराहा, सीतलामाता बाजार, गोराकुंड चौराहा, खजूरी बाजार, राजबाड़ा, कृष्णपुरा पुल होते हुए समाप्त होगी। नृसिंह बाजार से गोराकुंड तक तोड़फोड़ का मलबा और टूटे भवन खतरनाक स्थिति में है। यहां तोड़फोड़ के दौरान ईंट गिरने से एक व्यापारी की मौत भी हो गई है।

एक-एक निगमकर्मी की रहेगी ड्यूटी
बीओ बीएस कुशवाह ने बताया सीतलामाता बाजार में डोल ग्यारस के चल समारोह और ताजियों के दौरान किसी प्रकार की समस्या सामने नहीं आई। यहां कनात अनंत चतुर्दशी के जुलूस तक लगी रहेगी। पूरे झांकी मार्ग पर 27 खतरनाक मकान चिह्नित किए हैं। इन मकानों पर एक-एक निगमकर्मी की ड्यूटी लगाई है ताकि चल समारोह के दौरान लोग इन मकानों के चबूतरे या ओटले पर न चढ़ें। अब सवाल यह है कि डोल ग्यारस और ताजियों का जुलूस उस क्षेत्र से नहीं निकला था जहां तोड़फोड़ हुई है लेकिन झांकी उस क्षेत्र से गुजरेगी। इसके बावजूद निगम लापरवाह बना हुआ है।
 

गुरुवार को निकलेगी 30 से अधिक झांकियां
अनंत चतुदर्शी के अवसर पर निकलने वाले चल समारोह में इस बार 30 से अधिक चलित झांकियां शामिल होंगी। इन झांकियों में धार्मिक प्रसंग सहित शहर का विकास दर्शाया जाएगा। झांकियों का निर्माण करने में 6 मिलों हुकुमचंद मिल, कल्याण मिल, स्वदेशी मिल, होप टेक्सटाइल्स, मालवा मिल और राजकुमार मिल के साथ ही इंदौर विकास प्राधिकरण, इंदौर नगर पालिका निगम, खजराना मंदिर व अन्य संस्थाए शामिल है।
 
 

100 साल पुरानी परंपरा
अनंत चतुर्दशी चल समारोह में चलित झांकियां निकालने की परंपरा लगभग 100 साल पुरानी है। इस परंपरा की शुरूआत कपड़ा मिलों में काम करने वाले मजदूरों ने की थी। प्रारंभ होने के कुछ समय बाद ही यह इंदौर की पहचान और परंपरा बन गई। 80-90 के दशक में कपड़ा मिलों की हालत खराब होने लगी और शहर की मिलें धीरे-धीरे बंद होती गई। मिलें बंद होने के बाद भी मजदूरों ने चंदा कर झांकी की परंपरा को कायम रखा। मप्र सरकार ने भी इस परंपरा को बचाए रखने के लिए आर्थिक सहयोग प्रारंभ किया लेकिन वह झांकी निर्माण की लागत की तुलना में काफी कम था, यह विडंबना वर्तमान में भी जारी है। वहीं दो दशक पहले नगर निगम, आईडीए सहित कुछ संस्थाओं ने भी झांकी निर्माण प्रारंभ किया जो वर्तमान में भी जारी है।
 

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