इंदौर / ईओडब्ल्यू ने कहा- राठौर को बचाने वालों का नाम बताओ, सहआरोपी बनाएंगे



Investigation in EOW scam
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Investigation in EOW scam

  • निगम अफसर के टैंकरों से जुड़े कामकाज को साबित करने वाले दस्तावेज गायब
  • एक हफ्ते से ढूंढ रहे हैं फाइलें, अब ईओडब्ल्यू ने भेजा फाइनल रिमाइंडर

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 02:18 AM IST

इंदौर. ईओडब्ल्यू के छापे में 25 करोड़ से ज्यादा के आसामी निकले नगर निगम के भ्रष्ट अफसर अभय राठौर से जुड़ी कई जानकारियां नगर निगम से गायब कर दी गई हैं। निगम अफसर पिछले सात दिनों से उसकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन दस्तावेज नहीं मिल रहे। अब नोटशीट ढूंढी जा रही है, जिससे सभी जानकारियों की कड़ियां स्थापित की जा सकें। इधर, ईओडब्ल्यू ने निगम को फाइनल रिमाइंडर भेजकर पूछा है कि राठौर की जानकारी कौन अफसर छुपा रहा है, उसका नाम बताएं, ताकि उसे भी सहआरोपी बना सकें।  

 

ईओडब्ल्यू ने पिछले साल अक्टूबर में राठौर के घर पर छापा मारा था। तब से अब तक अलग-अलग पड़ताल में उनकी और रिश्तेदारों की 25 करोड़ की संपत्ति सामने आ चुकी है। राठौर पर जल यंत्रालय में रहते हुए 2012 से 2016 के बीच टैंकरों से अवैध रूप से कमाई कर संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। ईओडब्ल्यू को दस टैंकरों की जानकारी मिली थी, जिसे राठौर ने ही निगम में लगवाया था।

 

इसके अलावा भी कई टैंकरों की सूचना है। इस संबंध में ईओडब्ल्यू निगम से सात महीने से जानकारी मांग रहा है और 7 रिमाइंडर दे चुका है। अफसरों ने एक भी रिमाइंडर का न तो जवाब दिया और न ही जानकारी भेजी। पिछले दिनों भास्कर द्वारा इसका खुलासा करने के बाद निगमायुक्त ने जानकारी भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जो जानकारी ईओडब्ल्यू को भेजने के लिए तैयार की गई, वह अधूरी थी। उसमें ईओडब्ल्यू के पूछे सवालों के जवाब नहीं मिल पा रहे थे। हफ्तेभर से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन निगम में इससे जुड़ी कोई फाइल नहीं मिल रही। 

 

जानकारी देने में क्यों लग रहा इतना समय? :
ईओडब्ल्यू की तरफ से हाल ही में निगम को फाइनल रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें पूछा गया है कि जानकारी भेजने में इतना समय क्यों लग रहा, यह जानकारी किस अधिकारी के अधीन थी। इसके लिए जिस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है, उसका नाम उजागर करें, ताकि कोर्ट को इससे अवगत करवा सकें। सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के मुताबिक, अगर कोई विभाग किसी कर्मचारी की जानकारी जांच एजेंसियों को नहीं देता है तो उस पर भी कार्रवाई की जा सकती है। अगर अफसर नाम जारी कर देते हैं तो उसे भी सहआरोपी बनाया जा सकता है। 
 

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