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मप्र / आंखें खो चुके लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री से कहा 4-5 बार ओटी में ले गए और फिर दिखना हो गया बंद, अंधत्व निवारण अधिकारी निलंबित



Investigation started in case of loss of eyesight after cataract surgery of 11 patients in Indore Eye Hospital
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Investigation started in case of loss of eyesight after cataract surgery of 11 patients in Indore Eye Hospital
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  • इंदौर नेत्र चिकित्सालय में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चले जाने के मामले में जांच शुरू
  • कांग्रेसियों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की
  • स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल पहुंच मरीजों से की मुलाकात
  • तीन मरीजों को सोमवार सुबह हवाई जहाज से चेन्नई ले जाया जाएगा
  • 9 साल पहले भी 18 लोगों की दृष्टि छीनने वाले इंदौर नेत्र चिकित्सालय का लाइसेंस निरस्त

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2019, 12:53 PM IST

नीता सिसौदिया, इंदौर. धार रोड स्थित इंदौर नेत्र चिकित्सालय में 11 मरीजों के मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी चले जाने के मामले में रविवार से जांच प्रारंभ हो गई है। मामले में अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 8 अगस्त को हुई इस घटना को अस्पताल प्रबंधन ने आठ दिनों तक छिपाए रखा था। रविवार सुबह कांग्रेसियों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। वहीं स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने भी अस्पताल पहुंच मरीजों से मुलाकात की। मामले में जिला अंधत्व निवारण अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

 

मामले की जांच के लिए रविवार को संभागायुक्त के साथ अन्य अधिकारी इंदौर नेत्र चिकित्सालय पहुंचे और मरीजों से चर्चा कर उनके बयान दर्ज किए। वहीं दोपहर को मप्र के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट भी अस्पताल पहुंचे। आंखे खो चुके मरीजों ने मंत्री को बताया कि उन्हें चार से पांच बार ओटी में ले जाया गया था और सुईं लगाई थी, जिसके बाद से उन्हें दिखाई देना बंद हो गया। मामले में लापरवाही बरतने पर जिला अंधत्व निवारण अधिकारी डॉ टीएस होरा को निलंबित कर दिया गया है।

 

तीन मरीजों को हवाई जहाज भेजा जाएगा चेन्नई
चेन्नई से आए नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव रमन का कहना है कि इनमें से चार मरीज ऐसे लग रहे है जिनकी आंख बच जाएगी। इनकी सर्जरी कर रहे है। चार मरीजों को इंजेक्शन दिए गए है। कुछ सर्जरी हो चुकी है लेकिन अगले तीन-चार दिन अति संवेदनशील है, मरीजों की आंख का पस बढ़ना नहीं चाहिए। अगर बढ़ता है तो दोबारा इंजेक्शन देना पड़ेगा। इनमें से तीन मरीज ऐसे है जिनको चेन्नई भेजना पड़ेगा। इन्हें सोमवार सुबह हवाई जहाज से चेन्नई भेजा जाएगा। चेन्नई में बात कर ली गई है, वहां सारा इंतजाम रहेगा।


ऑपेरशन बिगड़ने के बाद मरीजों को दिए गए उपचार को लेकर उन्होंने कहा कि सभी को सहीं प्राथमिक उपचार दिया गया है। इस स्थिति में जो बेहतर उपचार होता है वहीं दिया गया है। हर मरीज को कम से कम दो से तीन इंजेक्शन दिए गए है।


सर्जरी के दौरान हुआ संक्रमण
मोतियाबिंद सर्जरी से गुजरे मरीजों की आंख में किसी द्रव से बैक्टीरीया पहुंचने का अंदेशा जताया गया है। डॉ. रमन ने बताया कि मरीजों की आंख में सुडोमोनस बैक्टीरिया का संक्रमण हुआ है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि संभवतः सर्जरी में इस्तेमाल फ्लूइड या अन्य तरल पदार्थ के कारण संक्रमण हुआ है। हालांकि कल्चर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जहां तक सर्जरी का सवाल है तो वह सही हुआ है। लेंस सही लगे है।

 

आंखे खो चुके दो और मरीज आए सामने
लापरवाही के चलते आंखे खोने वाले दो और मरीज सामने आए है। इसी अस्पताल में 5 अगस्त को मुन्नी बाई और राधा यादव की आंखों का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद इन्हें परेशानी हुई तो 8 अगस्त को पुन: अस्पताल बुलाकर ऑपरेशन किया गया। इसके बाद इनकी आंखों की रोशनी चली गई।  

 

मुन्नी बाई, 5 अगस्त को हुआ था ऑपरेशन

 

 

राधा यादव, 5 अगस्त को हुआ था ऑपरेशन

 

प्रशासन ने लिए औषधियों एवं मेडिकल डिवाईस के नमूने
मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग इंदौर के औषधि निरीक्षकों के दल ने अस्पताल जाकर दवाइयों और मेडिकल डिवाईस की जांच की। दल में राजेश जीनवाल, धर्मेश बिगोनिया, अनुमेहा विवेक कौशल एवं अलकेश यादव शामिल थे। दल ने डॉक्टर सुधीर महाशब्दे एवं डॉ. सुभाष वाडे से ऑपरेशन के पूर्व एवं पश्चात उपयोग की गई दवाइयों की जानकारी ली। 23 औषधियों एवं चार मेडिकल डिवाईस (सीरींज, निडिल) के नमूनों को जांच के लिए औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल, कोलकाता और गुवाहाटी भेजा जा रहा है।

 

गौरतलब है कि भास्कर में हुए खुलासे के बाद सरकार ने अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। पूरे मामले को मुख्यमंत्री कमलनाथ और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने गंभीरता से लिया है। शनिवार को ही मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दे दिए थे और कमेटी का गठन भी कर दिया गया था। पीड़ित परिवारों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के आदेश भी हुए हैं। साथ ही सरकार इनके इलाज का पूरा खर्च उठाएगी। इसके लिए चेन्नई के शंकर नेत्रालय से एक्सपर्ट डॉ. राजू रमन को भी बुलाया है, जो रविवार को इन मरीजों का चेकअप करेंगे।


दो नेत्र रोग विशेषज्ञों की टीम कर रही जांच 
जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में अपर कलेक्टर कैलाश वानखेड़े, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप गोयल और डॉ. आशुतोष शर्मा हैं। इन्हें दो दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करना होगी। अप्रैल से जुलाई के बीच इंदौर नेत्र चिकित्सालय में 386 ऑपरेशन हुए हैं। समिति तीन बिंदुओं पर जांच करेगी कि दवा के कारण संक्रमण हुआ या डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही थी या फिर ओटी से संक्रमण मिला? 


यह है मामला
इंदौर नेत्र चिकित्सालय में 8 अगस्त को राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 14 मरीजों के ऑपरेशन किए गए थे। इनमें से तीन को छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन 11 की रोशनी चली गई।  

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