शहीदों को नमन / रिद्धि-सिद्धि काॅलोनी से त्रिवेणी मुक्तिधाम तक 6 किमी लंबी रही शहीद ले. कमांडर धर्मेन्द्र की शौर्य यात्रा



Journey of Shaheed Dharmendra in Ratlam, Martyrs were on Friday
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  • शनिवार रात 2 बजे शहीद ले. कमांडर धर्मेंद्र की पत्नी करुणा पहुंचीं थी रतलाम 
  • अपने बेटे को सैल्यूट करते हुए मां ने वापस उसी की कोख में जन्म लेने को कहा

Dainik Bhaskar

Apr 28, 2019, 04:09 PM IST

रतलाम. शहर के शहीद होने वाले जल सेना के पहले लेफ्टिनेंट कमांडर धर्मेंद्र सिंह चौहान को रविवार को त्रिवेणी मुक्तिधाम पर अंतिम विदाई दी गई। रिद्धि-सिद्धि काॅलोनी से निकली शहीद की अंतिम यात्रा 6 किलोमीटर लंबी थी जिसमें हजारों लोग उपस्थित थे। अपने वीर सपूत की अंतिम यात्रा के पूर्व मां का दर्द छलका, अपने बेटे को सैल्यूट करते हुए मां ने वापस उसी की कोख में जन्म लेने को कहा। शुक्रवार को देश के सबसे बड़े विमान वाहन जंगी पोत आईएनएस विक्रमादित्य में लगी आग को बुझाने की कोशिश में लेफ्टिनेंट कमांडर धर्मेंद्र शहीद हो गए थे। 

 

शहीद


खुले ट्रक में निकली शौर्य यात्रा 
शहीद धर्मेंद्र की शौर्य यात्रा सेना के खुले ट्रक में निकली। उन्हें त्रिवेणी मुक्तिधाम में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रशासन की तरफ से कलेक्टर ने पुष्प चक्र अर्पित किए। उनकी शौर्य यात्रा रिद्धि सिद्धि कॉलोनी, वृद्धाश्रम, कस्तूरबा नगर, राम मंदिर, सैलाना बस स्टैंड, शहीद चौक, रानीजी का मंदिर, धानमंडी, तोपखाना, चांदनी चौक और त्रिपोलिया गेट होते हुए त्रिवेणी मुक्तिधाम पहुंची। 

 

 

शहीद


इससे पहले गोवा से इंदौर तक हवाई जहाज से आने के बाद पार्थिव देह शनिवार रात सेना के ट्रक से रतलाम पहुंची। प्रशासन को शहीद धर्मेंद्र की पार्थिव देह रखने के लिए एक फ्रीजर रिजर्व रखना था। इसलिए दूसरी बॉडी को पहले ही शव पेटी मंगवाकर रखा। रविवार सुबह 6 बजे पार्थिव देह को रिद्धि-सिद्धि कॉॅलोनी स्थित शहीद धर्मेंद्र के घर पहुंचाया गया।  

 

पार्थिव शरीर पांच गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचा। इनमें आगे दो पुलिस की जीप, उसके पीछे सेना की जिप्सी तथा सबसे पीछे सेना के दो ट्रक थे। पार्थिव शरीर सबसे आखिरी ट्रक में था, जिसमें सेना के 8 जवान तैनात थे। नेवी में लेफ्टिनेंट कमांडर नवीन उपाध्याय के अलावा सेना की जिप्सी में शहीद धर्मेंद्र के आगरा निवासी मौसा-मौसी भी साथ थे। 


करुणा बोलीं सासू मां से - मैंने 12 दिन में जिंदगी जी ली... मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी, ये सुहाग की बिंदी जिंदगीभर लगाऊंगी 
शहीद धर्मेंद्र की पत्नी करुणा सिंह शनिवार रात 1.45 बजे रिद्धि-सिद्धि कॉॅलोनी स्थित अपने घर पहुंचीं। गाड़ी से उतरते ही सीधे सास मां टमा कुंवर के पास पहुंची। बहू को देख टमा कुंवर की आंखों से आंसू निकले आए। बहू बोली- मां, उनके साथ बिताए 12 दिन पूरी जिंदगी के लिए काफी है। 
शहीद की मां - आ गई मेरी झांसी की रानी, शांति रखना, तुझे देख लिया अब अच्छा लग रहा है (और पीछे देख रोने लगी) 
शहीद की पत्नी- मां मत रो, रोने वालों से बात भी नहीं करना 
मां -तू शेर की पत्नी, मैं शेर की मां 
पत्नी- पता है उसने कितने लोगों की जान बचाई 
मां- वो मेरा नहीं अब सबका बेटा बन गया, पूरा देश गर्व कर रहा है 
पत्नी - उसके साथ बिताए 12 दिन मेरे लिए पूरी जिंदगी के लिए काफी है, किसी के साथ पूरी जिंदगी बिता तो भी इतनी खुश नहीं होती। 
मां- (कुछ बोले बिना एकटक बिंदी की तरफ देखती रही) 
पत्नी- मां जिंदगी भर बिंदी लगाऊंगी, क्योंकि वे बोलते थे बिंदी में तुम बहुत सुंदर लगती हो, यह शादी का चूड़ा भी नहीं उतारूंगी। 
मां - परेशान मत हो, मैंने सबको कहा था कि मेरी शेरनी काे देखना, फिर लोगों की ओर देखते हुए बोली देखो मेरी शेरनी को, सेल्यूट लायक है ना 
(दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया) 

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