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इंदौर: जस्टिस अरुण मिश्रा बोले- हम मनमाफिक निर्णय नहीं दें तो देश में काला दिवस घोषित कर दिया जाता है

जिला कोर्ट की नई इमारत का भूमिपूजन करने आए सुप्रीम कोर्ट के जज ने जाहिर की पीड़ा

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 03:18 AM IST

इंदौर. ‘पीआईएल लगने के बाद न्यायालय पर हमला किया जाता है। धमकाया जाता है कि हमारे हिसाब से फैसला नहीं दिया तो न्यायालय को, जजेस को बदनाम किया जाएगा। पीआईएल को फिर से निर्धारित करने का समय आ गया है। अगर हमने मनमाफिक निर्णय नहीं दिया तो देश में काला दिवस घोषित कर दिया जाता है।’
यह बात सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा ने शनिवार को पीपल्याहाना में जिला कोर्ट की नई बिल्डिंग के भूमिपूजन समारोह में कही। राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन अब पॉलिटिकल इंटरेस्ट याचिका बन गई है। पीआईएल पहले कभी व्यापक जनहित के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अब यह निजी हित का बड़ा हथियार बन गई है। पॉलिटिकल इंटरेस्ट के लिए इस लिटिगेशन को प्रायोजित कर अदालतों में लगाया जा रहा है। वहीं लोकसभा स्पीकर ने कहा कि पीआईएल अब पर्सनल इंटरेस्ट लिटिगेशन बन गई है।

लंबित मुकदमों पर : अदालतों में लंबित मुकदमों को लेकर उन्होंने कहा कि जजेस को प्रकरणों का जल्दी निराकरण करना चाहिए नहीं तो लोगों का कोर्ट से विश्वास उठने लगेगा। लोग बाहुबलियों के पास अपने काम लेकर जाने लगेंगे। मकान, दुकान, संपत्ति के विवाद बाहुबली सुलझाने लगेंगे।

जजेस के बच्चों पर : लोग कहते हैं जजेस के बच्चों को वकालत नहीं करनी चाहिए। परंतु फिर क्यों जजेस के बच्चों को एप्रोच करते हैं कि वह उनकी तरफ से वकील बनकर वकील पत्र पेश कर दें। वकीलों को खुद अपने व्यवहार, तरीके पर चिंतन करना चाहिए। पक्षकार को जल्दी न्याय मिले।

जज और वकील चिंतन करें : आज कोर्ट के लिए यह धारणा बन रही है कि वह केवल पूंजीपतियों के ही केस पहले सुनती है। इस धारणा को बदलने की जरूरत है। जजेस और वकीलों को चिंतन करना होगा। हमने सुधार नहीं किया तो हमसे लोगों का विश्वास उठ जाएगा। वो दिन दूर नहीं जब लोग कानून हाथ में ले लेंगे।