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माटी में कबीर के दोहे और प्राणीजगत के स्पंदन

Indore News - कैसी विलक्षण है माटी की प्रकृति भी, कि नमी हो तो ज़रा से इशारे में आकार बदल ले और अहसनीय आंच में झोंक दी जाए तो यही...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:45 AM IST
Indore News - kabir39s couplets and zodiac flutter in moti
कैसी विलक्षण है माटी की प्रकृति भी, कि नमी हो तो ज़रा से इशारे में आकार बदल ले और अहसनीय आंच में झोंक दी जाए तो यही मृदु माटी शिला सी सख्त हो जाए... जो टूटे तो फिर एक नए सांचे में ढलने को तैयार है...और सहेजी जाए तो बरसों इसी स्वरूप में रहे। जितनी मृदु उतनी ही सख़्त। जितनी सरल, उतनी ही जीवट भी। है तो माटी ही, लेकिन कितना जीवन है इसमें। शनिवार को शहर में शुरू हुए माटी फेस्टिवल में भी कुछ ऐसी ही कृतियां लाए 13 कलाकार जिनमें जीवन के विविध स्पंदन हैं। किसी ने माटी में मनुष्य को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करते रचा है तो कहीं मिट्टी की मछलियां, मिट्‌टी के फूल और गौरेया चहक रही हैं। किसी ने खुली आंखों से नज़र न आने वाले सूक्ष्म जीवों की दुनिया को मिट्टी पर साकार किया है तो कोई कबीर के दोहों को मिट्‌टी में ढाल लाया है। विजयनगर स्थित अकीरा स्टूडियो में शनिवार की शाम बड़ी खूबसूरत बीती। माटी की ये सुंदर कृतियां, लाइव बैंड पर मां रेवा की स्तुति, एक प्याली चाय और दोस्तों के साथ गपशप। शहर के कलाप्रेमियों ने ये शाम इसी तरह बिताई। पॉटर और अकीरा स्टूडियो की ओनर सुचित्रा धनानी इसके लिए बधाई पात्र हैं।

माटी फेस्ट में सीनियर आर्टिस्ट प्रकाश पाटीदार पहली बार शामिल हुए। उन्होंने मनुष्यों को जिंदगी की जद्दोजहद में अपनी अनूठी दृष्टि से रचा है। मनुष्यों और प्राणियों को एक्रोबैट फॉर्म्स में रचा है जो गतिमान नज़र आते हैं। कहीं बबल सील बनाकर बालपन की मासूमियत मिट्‌टी में रची तो कहीं वन्य प्राणियों को संघर्षरत दिखाया। उनके कलाकर्म में मिट्टी पर ग्लेज़ का अदभुत काम है। प्रकाश बताते हैं - मैं 1995 से ऐसी सीरीज़ कर रहा हूं। मिट्‌टी और मेटल दोनों में रचता हूं। मिट्‌टी को बहुत सहज पता हूं और इसके साथ कुछ रचते हुए आध्यात्मिक संतुष्टि के उत्कर्ष पर होता हूं। ग्लेज़ के बारे में उन्होंने बताया कि भट्‌टी में जब 1280 डिग्री सेल्सियस पर ये मिट्टी तवती है तो राख भी ग्लेज़ का काम करती है।

प्रकाश पाटीदार ने मनुष्य का अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष एक्रोबैट फॉर्म्स में यूं गढ़ा।

अपनी पॉटरी के साथ सुचित्रा धनानी

सिटी रिपोर्टर | इंदौर

कैसी विलक्षण है माटी की प्रकृति भी, कि नमी हो तो ज़रा से इशारे में आकार बदल ले और अहसनीय आंच में झोंक दी जाए तो यही मृदु माटी शिला सी सख्त हो जाए... जो टूटे तो फिर एक नए सांचे में ढलने को तैयार है...और सहेजी जाए तो बरसों इसी स्वरूप में रहे। जितनी मृदु उतनी ही सख़्त। जितनी सरल, उतनी ही जीवट भी। है तो माटी ही, लेकिन कितना जीवन है इसमें। शनिवार को शहर में शुरू हुए माटी फेस्टिवल में भी कुछ ऐसी ही कृतियां लाए 13 कलाकार जिनमें जीवन के विविध स्पंदन हैं। किसी ने माटी में मनुष्य को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करते रचा है तो कहीं मिट्टी की मछलियां, मिट्‌टी के फूल और गौरेया चहक रही हैं। किसी ने खुली आंखों से नज़र न आने वाले सूक्ष्म जीवों की दुनिया को मिट्टी पर साकार किया है तो कोई कबीर के दोहों को मिट्‌टी में ढाल लाया है। विजयनगर स्थित अकीरा स्टूडियो में शनिवार की शाम बड़ी खूबसूरत बीती। माटी की ये सुंदर कृतियां, लाइव बैंड पर मां रेवा की स्तुति, एक प्याली चाय और दोस्तों के साथ गपशप। शहर के कलाप्रेमियों ने ये शाम इसी तरह बिताई। पॉटर और अकीरा स्टूडियो की ओनर सुचित्रा धनानी इसके लिए बधाई पात्र हैं।

माटी फेस्ट में सीनियर आर्टिस्ट प्रकाश पाटीदार पहली बार शामिल हुए। उन्होंने मनुष्यों को जिंदगी की जद्दोजहद में अपनी अनूठी दृष्टि से रचा है। मनुष्यों और प्राणियों को एक्रोबैट फॉर्म्स में रचा है जो गतिमान नज़र आते हैं। कहीं बबल सील बनाकर बालपन की मासूमियत मिट्‌टी में रची तो कहीं वन्य प्राणियों को संघर्षरत दिखाया। उनके कलाकर्म में मिट्टी पर ग्लेज़ का अदभुत काम है। प्रकाश बताते हैं - मैं 1995 से ऐसी सीरीज़ कर रहा हूं। मिट्‌टी और मेटल दोनों में रचता हूं। मिट्‌टी को बहुत सहज पता हूं और इसके साथ कुछ रचते हुए आध्यात्मिक संतुष्टि के उत्कर्ष पर होता हूं। ग्लेज़ के बारे में उन्होंने बताया कि भट्‌टी में जब 1280 डिग्री सेल्सियस पर ये मिट्टी तवती है तो राख भी ग्लेज़ का काम करती है।

कबीर के दोहों पर रची गई कृति।

एक्टर सतीश शाह भी पहुंचे।

लाइफ अंडर माइक्रोस्कोप पर प्लैटर सीरीज़ और राकू वर्क लाईं निधि

निधि मोदी ने माइक्रोस्कोपिक बॉडीज़ मिट्‌टी की कृतियों पर रचा है। सिलिका और कुछ ऑक्साइड्स से ग्लेज़ दिया है। एक जापानी फाइरिंग टेक्नीक है "राकू' । इसमें मिट्टी को मिट्‌टी से बना फिल्टर बीच में रख इस तरह आंच देते हैं, कि उस पर कई पैटर्न्स बन जाते हैं। अनुश्री दुबे ने गोंड शैली में मछलियां चिड़िया और फूल पत्ती रचे हैं। एग्ज़ीबिशन ऑर्गनाइज़र सुचित्रा धनानी ओबवारा फाइरिंग टेक्नीक से बने प्लांटर्स लाई हैं। पंकज अग्रवाल ने कबीर के दोहों को मिट्‌टी में कल्पनाशीलता से ढाला है।

आर्किटेक्ट्स के म्यूज़िकल बैंड की सौंधी धुनों को सराहा सतीश शाह ने

शहर के पांच आर्किटेक्ट्स के म्यूज़िकल बैंड वॉइड ने इनॉग्रल सेरेमनी में मां रेवा की स्तुति सुनाई और फिर कबीर के पद सुनाए। कुछ क्लासिकल बंदिशें भी गाईं। गिटारिस्ट और वोकलिस्ट हैं नितिन घुले, तबले पर विजय वार्डी, की-बोर्ड पर दर्पण भालेराव, वोकल्स पर अजय शर्मा, ब्रजेश शर्मा ने परफॉर्मेंस दी।

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