डीएवीवी / संस्कृति को बचाने के लिए ब्रिटिश राज्य के नियमों को तोड़ने की जरूरत - किन्नर अखाड़ा प्रमुख

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 06:14 PM IST


Kannar Laxmi Narayan addressed the students at DAVV
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Kannar Laxmi Narayan addressed the students at DAVV
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  • त्रिपाठी ने मीडिया भवन में आयोजित किन्नर सभ्यता संस्क्रति साहित्य चिंतन और चुनौतियां विषय पर अपनी बात रखी

इंदौर. हमेशा हाशिए पर किन्नर ही क्यों... समाज को किन्नर समुदाय को भी अपनाना चाहिए, क्योंकि हम भी ईश्वरी संतान हैं। आत्मा का कोई लिंग नहीं होता सभी ब्रह्म स्वरूप है। किन्नर को भी मुख्यधारा मैं जोड़ना होगा इसके लिए उसे शिक्षा से ही ज्ञान प्राप्त हो सकता है। यह बात देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के मीडिया भवन में आयोजित किन्नर सभ्यता संस्क्रति साहित्य चिंतन और चुनौतियां विषय पर बोलते हुए किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कही।

 

त्रिपाठी ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

अटल बिहारी वाजपेई शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय द्वारा आयोजित सेमिनार में किन्नर समुदाय अन्य समाजों से दूर क्यों विषय पर अपनी बात रखते हुए किन्नर अखाड़ा त्रिपाठी ने कहा - मर्दों से ज्यादा औरतों में पुरुषार्थ होता है और अगर हमें हमारी संस्कृति को बचाना है तो ब्रिटिश राज्य के नियमों को तोड़ने की आवश्यकता है।

 

त्रिपाठी ने कहा - प्रकृति अन्याय नहीं करती, लेकिन जाने-अनजाने मनुष्य ही दूसरे मनुष्य के साथ अन्याय कर बैठता है। यही त्रासदी रही हम किन्नरों की, जिसे धर्म कहता है उपदेवता। जब हमने अखाड़ा बनाया तो अखाड़ों के प्रमुखों ने कहा - हम मान्यता नहीं देंगे। मैंने कहा कौन मांग रहा है आपसे मान्यता। मुझे जो मेरे से श्रेष्ठ होगा वही तो मान्यता देगा। आप तो मेरे से क्रम में नीचे हो। जब हमने स्वयं अपनी लैंगिकता निर्धारित कर ली तो फिर हमें आपके मान्यता की क्या जरूरत है।
 

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