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कविता रैना मर्डर मिस्ट्री : आरोपी दोषमुक्त, सबके मन में एक ही सवाल कविता का कातिल कौन?

कविता की 6 टुकड़ों में बोरे में भरी लाश मिली थी। कोर्ट ने महेश को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 07:12 PM IST
कविता रैना 24 अगस्त 2015 को बच्ची को लेने स्कूल बस स्टॉप गई थी, जिसके बाद उसकी लाश मिली थी। कविता रैना 24 अगस्त 2015 को बच्ची को लेने स्कूल बस स्टॉप गई थी, जिसके बाद उसकी लाश मिली थी।

इंदौर। करीब 3 साल पहले हुए कविता रैना मर्डर केस में जिला कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुआ मुख्य आरोपी को बरी कर दिया। आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूतों के आभाव में यह फैसला सुनाया गया। बता दें कि कविता की लाश 6 टुकड़ाें में बोरी में बंद एक पुल के नीचे मिली थी। मामले में पुलिस ने महेश बैरागी को आरोपी बनाते हुए मार्च 2016 में चार्जशीट दायर की थी। दो साल तक चले इस केस में 41 गवाहों के कथन के बाद विशेष न्यायाधीश बीके द्विवेदी की अदालत ने फैसला सुनाया।

फैसले के बाद किसने क्या कहा...

- फैसला सुनने के लिए कविता के पति, सास, बच्चे और परिजन सुबह ही कोर्ट पहुंच गए थे।

- कोर्ट द्वारा महेश को बरी करते ही परिवार आक्रोशित हो उठा। कुछ देर बाद वे फूटकर रोने लगे।

- कविता के पति ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले के बाद मेरा कानून से विश्वास उठ गया।

- अारोपी महेश ने कहा कि कोर्ट से मुझे आज न्याय मिला है। मुझे झूठा फंसाया गया था।

- महेश के वकील ने कहा मैंने बेगुनाह को सजा से बचाया है। पुलिस असली आरोपी को तलाशे।

- महेश की बहन ने कहा कि मेरे भाई को झूठा फंसाया गया था। वो किसी को मार नहीं सकता।

घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कहानी....

- कविता का शव 26 अगस्त 2015 को तीन इमली स्थित नाले में मिली थी। पुलिस ने घटना के चार महीने बाद 9 दिसंबर 2015 को आरोपी महेश बैरागी निवासी आलोक नगर (मूसाखेड़ी क्षेत्र) को मामले में गिरफ्तार किया था।

- पुलिस ने चार्जशीट में बताया था कि महेश कविता की हत्या के बाद दुकानों पर उस दिन के फुटेज तलाशने गया था। महेश कविता की से संबंध बनाना चाहता था। कविता के मना करने पर उसने मूसाखेड़ी स्थित एक फ्लैट में ले जाकर उसकी हत्या कर दी थी।

- महेश पहले वीडियो लाइब्रेरी का काम करता था। इसके बाद उसने इस काम को बंद कर दिया था, इसके बाद शादी से जुड़े काम करने लगा था। आरोपी पर ब्लू फिल्म बनाने के मामले में पहले भी केस दर्ज हो चुका है। आरोपी किडनी का मरीज है।

ये है पूरा घटनाक्रम
- 26 अगस्त को सुबह 11 बजे तीन इमली चौराहे पर नाले में एक महिला का शव 6 टुकड़ों में मिला। इसे दो बोरों में भरकर कोई नाले में फेंक गया था। पुलिस ने अंगों को जोड़ा तो शिनाख्त कविता रैना (कुमावत) के रूप में हुई। बंगाली चौराहे के पास मित्र बंधु नगर में रहने वाले एमिल फार्मास्युटिकल्स कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर संजय रैना (कुमावत) ने महिला को अपनी पत्नी बताया। उनका कहना था कि कविता सोमवार 24 अगस्त से लापता थीं।


- पुलिस ने एमवाय अस्पताल में बोरे में मिले अंगों को जुड़वाया और संजय को बुलाकर शिनाख्त करवाई। संजय ने शव के दाहिने हाथ पर ओम राम कविता और गले पर तिल के आधार पर शव पत्नी के होने की पुष्टि की थी। संजय ने बताया कविता सोमवार दोपहर 1.10 बजे बेटी यशस्वी (6) को बस स्टॉप पर लेने के लिए एक्टिवा (एमपी 09 एसएएस 5271) से गई थी। मोबाइल घर छोड़ गई थी। पौने दो बजे पड़ोसी जया बेटी को घर लेकर आईं और बताया कि कविता बेटी को लेने नहीं पहुंची। इस दौरान घर पर खाना खाने आए संजय ने उन्हें आसपास तलाशा और रिश्तेदारों से संपर्क किया, लेकिन कुछ पता नहीं चला।

पति ने बदहवासी में देवास में अन्य मृत महिला को कविता समझ लिया था
- उसी दिन सुबह देवास के पास बरोठा में भी एक महिला का शव मिलने की सूचना मिली थी। जब संजय को वहां एक महिला का जला हुआ शव दिखाया गया तो वह उसे भी कविता के रूप में पहचान चुका था। जब एमवाय अस्पताल में उसे शव दिखाया तो हाथ पर गोदने को देख उसने यह समझा कि शव पत्नी कविता का ही है।


हत्यारों को पकड़ने के लिए पति ने घोषित किया था 25 हजार का इनाम
- पत्नी के लापता होने के बाद पति संजय रैना ने पत्नी के फोटो वाले कुछ परचे छपवाए थे जिन्हें ऑटो रिक्शा के पीछे लगवाया था। सूचना देने वाले को 25 हजार के इनाम की घोषणा की थी। इसके अलावा परिजन ने फेसबुक पर भी कविता के फोटो पोस्ट कर उसकी सूचना के लिए नंबर दिए थे।

मप्र का पहला हत्याकांड, जिसे सुलझाने में लगी थी पूरे शहर की पुलिस
- कविता रैना मर्डर केस मप्र का पहला ऐसा मामला था, जिसे सुलझाने में एक शहर की पूरी पुलिस टीम को झोंक दिया गया था। 80 से भी अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम इसमें जुटी थी। टेलीकॉम सर्विलेंस, फोरेंसिक, रिक्रिएशन और इन्फारमेशन एनालिसिस, इन चार हिस्सों में बांटकर जांच की गई थी।

- केस में एडीजी विपिन माहेश्वरी, डीआईजी संतोषकुमार सिंह, एसपी डी. कल्याण चक्रवर्ती, ओपी त्रिपाठी, छह एएसपी बिट्‌टू सहगल, देवेंद्र पाटीदार, विनयप्रकाश पॉल, राजेश सहाय, अंजना तिवारी और अरविंद तिवारी तथा तीन सीएसपी शशिकांत कनकने, अजय जैन व पारुल बेलापुरकर और छह टीआई के अलावा इन सभी के स्टाफ के 70-80 जवान जुटे थे।


घटना के वक्त हुए 5 लाख कॉल्स में से एक हजार छांटे थे

- कनाड़िया, तीन इमली, नवलखा क्षेत्र में 24 अगस्त को घटना के संभावित समय पर हुए 5 लाख कॉल्स की छंटनी कर पुलिस ने एक हजार नंबर ट्रेस किए थे। इनकी और बारीकी से छंटनी की गई थी। उधर, बस स्टॉप पर मिले फुटेज को और साफ करने के लिए हाईटेक साइबर लैब भेजा गया था।


देश का पहला ऐसा मामला जिसे पावर प्वाइंट में दिखाया गया
- संभवत: यह देश का पहला ऐसा मामला था जिसे पुलिस ने हत्या की पूरी कड़ी को पॉवर प्वाइंट के जरिए समझाया था।
- पुलिस ने पहली स्लाइड में मृतका का नाम, लापता होने की तारीख, केस नंबर व धाराएं लिखी थी।
- दूसरी स्लाइड में कविता के घर और उसके गायब होने के स्थान के बीच की दूरी को दिखाया गया।
- तीसरी स्लाइड में 26 अगस्त को लाया मिलने के स्थान को मैप पर चिन्हित कर दिखाया गया।
- चौथी स्लाइड में 30 अगस्त को कविता रैना की गाड़ी मिली, इसके स्थान को दर्शाया गया।
- पांचवीं स्लाइड में उस चिन्हित क्षेत्र को दिखाया गया, जिसकी पहचान पुलिस ने हत्याकांड को अंजाम देने के क्षेत्र के तौर पर की थी।
- छठी स्लाइड में कविता रैना के 24 अगस्त को क्षेत्र में हुए मूवमेंट को दर्शाया गया।
- सातवीं स्लाइड में 24 अगस्त को गायब होने के बाद 26 अगस्त को लाया मिलने तक कविता के संभावित मूवमेंट को दर्शाया गया।
- आठवीं स्लाइड में कविता मामले में संदेहियों, परिजनों, मित्रों व अन्य लोगों की जानकारी और उनसे पूछताछ व वेरिफिकेशन के बारे में बताया।
- नौंवी स्लाइड में कविता के शरीर के गोलाई में जिस हथियार से टुकड़े-टुकड़े किए गए, उसके बारे में बताया।
- दसवीं स्लाइड में फोरेन्सिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट।
- ग्याहरवीं और अंतिम स्लाइड में हत्याकांड की जगह और पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया।
- अंत में महेश बैरागी को मीडिया के सामने पेश किया गया था, जिसे कोर्ट ने बरी कर दिया है।

इस सबूतों के अाधार पर बनाया था दोषी

- कविता की स्कूटी नौलखा स्थित स्टेंड पर महेश ही रखने गया था, वहां उससे स्टैड संचालक ने कहा था कि वह गाड़ी का लाॅक नहीं लगाए। इस पर दोनों में बहस भी हुई थी। इसी बहस के कारण स्टैंड संचालक को आरोपी की शक्ल याद रह गई और पहचानने में आसानी हुई।

- 26 अगस्त को आरोपी महेश इलेक्ट्रानिक्स दुकान पर उस समय का सीसीटीवी फुटेज मांगने गया था, जिस समय कविता उसकी दुकान के सामने खड़ी हुई थी। सीडी में आरोपी महेश इलेक्ट्रानिक्स दुकान पर जाते और आते दिखाई दिया था।

ऐसे हुआ था महेश पर शक
- पुलिस के सामने महेश का नाम कविता के पति संजय ने पहले ही दिन लिया था। पुलिस ने महेश की जानकारी निकाली तो पता चला उसके खिलाफ 2013 में ब्लू फिल्म बनाने और 2014 में धमकी का केस दर्ज है। संजय के कई लड़कियों से संबंध रहे हैं। उसने कविता को टारगेट करने के लिए ही बुटिक के सामने 20 अगस्त को साड़ी की दुकान खोली थी। यह दुकान उसने 8 दिन बाद बंद कर दी थी। महेश उस दुकान पर सीसीटीवी कैमरे के फुटेज लेने गया था, जहां पुलिस पंहुची थी।

- पुलिस तब से तीन बार महेश को हिरासत में ले चुकी थी। महेश की एक किडनी खराब बताई जाती है। इसके चलते पुलिस उससे घटनास्थल की जानकारी नहीं उगलवा पा रही थी। पुलिस ने योजना के तहत पिछले दिनों उसे छोड़ा और गतिविधियों पर नजर रखी। पता चला वह टीकम नाम के शख्स के फ्लैट पर लड़कियों को ले जाता है, तब वहां छापा मारा गया। यहां से पुलिस को टाइल्स में खून और टांट पर चाकू मिल गया। हत्या के बाद महेश ने अपने व कविता के कपड़े जला दिए थे।


- मामले के खुलासे के लिए कविता से जुड़े 177 लोगों को शक के दायरे में रखा गया और उनसे लगातार पूछताछ की गई। इनमें दूध व सब्जी वाले, प्लम्बर, ठेकेदार, दोस्त और मिलने वाले थे। शहर में हर उस स्थान को चिह्नित किया, जहां कविता पिछले 10 साल से जा रही थी। इनमें रिश्तेदार के घर, दुकानें, बाजार, बच्चों के स्कूल तक को शामिल किया।

- कविता की दोस्ती और दुश्मनी के हर बिंदु पर की जांच। नौलखा बस स्टैंड की पार्किंग से बरामद कविता की एक्टिवा में मिले पेट्रोल की मात्रा को लेकर भी जांच की। पड़ताल की कि वह कितने लीटर पेट्रोल में कहां तक घूमी होगी? उन इलाकों के अंतिम पाइंटों पर जाकर चेकिंग की।

- पूरे घटनास्थल का रेडियस 10 किलोमीटर का था। इस दायरे में बिंदुवार घटनास्थलों पर पहुंचकर जांच की और साक्ष्य जुटाए। 100 लोग आरोपी के रूप में ट्रेस किए। पुलिस को महेश की गतिविधियाें पर शंका हुई और अंतत: उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

इन आधारों पर दोषमुक्त किया
कोर्ट ने फैसले में कहा- अभियोजन पक्ष केवल आरोपी के साईंकृपा इलेक्ट्रीकल्स की दुकान पर 26 अगस्त 2015 को कविता के फुटेज लेने जाना और अभियुक्त द्वारा 20 अगस्त 2015 को 11 माह के लिए दुकान किराए पर लेने और 1 सितंबर 2015 को दुकान खाली करने संबंधी साक्ष्य ही प्रमाणित कर पाया।


-यह साक्ष्य की संपूर्ण श्रृंखला न होकर मात्र दो कड़िया हैं जो दर्शाई गई परिस्थितियों की श्रृंखला से जुड़ी नहीं पाई गई। इन दो परिस्थितियों को छोड़ शेष साक्ष्य प्रमाणित नहीं हो सके।


- दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों की विवेचना के आधार पर कोर्ट के मत में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ हत्या करने और उसके संबंध में साक्ष्य विलोपित करने के आरोप को प्रणाणित करने में सफल नहीं रहा है।


- कोर्ट ने फैसले में कहा- केस डायरी विधिक प्रावधान में न होकर अलग अलग पन्नों में थी जो प्रकरण में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रभाव डालती है।

कविता की हत्या बुटिक संचालक महेश बैरागी ने की थी। कविता की हत्या बुटिक संचालक महेश बैरागी ने की थी।
फैसला सुनते ही रो पड़े कविता के परिजन। फैसला सुनते ही रो पड़े कविता के परिजन।
फैसला सुनते ही रो पड़े कविता के परिजन। फैसला सुनते ही रो पड़े कविता के परिजन।
आरोपी महेश बैरागी की बहन जिसका कहना है कि पुलिस ने मेरे भाई को झूठा फसाया था। आरोपी महेश बैरागी की बहन जिसका कहना है कि पुलिस ने मेरे भाई को झूठा फसाया था।
आरोपी को कोर्ट में पेश करती पुलिस। आरोपी को कोर्ट में पेश करती पुलिस।