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जवाब देने के लिए 80% बच्चे एक साथ होते हंै खड़े

शाला सिद्धी योजना में चयनित शासकीय प्राथमिक विद्यालय कागदीपुरा स्कूल का सोमवार को आलीराजपुर के दल ने भ्रमण कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:10 AM IST

जवाब देने के लिए 80% बच्चे एक साथ होते हंै खड़े
शाला सिद्धी योजना में चयनित शासकीय प्राथमिक विद्यालय कागदीपुरा स्कूल का सोमवार को आलीराजपुर के दल ने भ्रमण कर शिक्षा की गुणवत्ता देखी। यहां बच्चों के अनुशासन, शिक्षा सहित जिस तरह से यहां पढ़ाई होती है उसको देखा। यहां जिस तरह से पढ़ाई होती है उसके लिए शिक्षक मुख्यमंत्री व राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चूके है।

स्कूल में गणित, विज्ञान सहित अन्य विषयों के लिए अनुपयोगी वस्तुओं से अल्फाबेट बनाए गए है। हिंदी की कविताओं को हाव भाव से समझाना। कक्षाओं के ग्रुप बनाकर अलग-अलग नाम रख पढ़ाई करवाई जाती है। किसी भी विषय से संबंधित सवाल पूछने पर कक्षा के 80 प्रतिशत बच्चे एक साथ जवाब देने के लिए खड़े होते है। सोमवार को आए अलीराजपुर जिले के ग्राम सोंडवा के दल में 3 बीएसी, 1 बीजीसी, 4 बीआरसी, 28 शिक्षक शामिल हुए। बीआरसी रामानुज शर्मा के साथ बीसी भंगू सिंह तोमर के साथ आईएसओ प्रीति ठकराना सहित दल सुबह 7.30 बजेे स्कूल पहुंचा। दोपहर 12 बजे तक नवाचार की पाठशाला के गुर सिखे। शिक्षक सुभाष यादव ने स्कूली गतिविधियों से अवगत कराया। स्कूल के शिक्षक व बच्चों द्वारा जूते बाहर निकालते देख दल ने भी अपने जूते बाहर निकाले। दल में आए शिक्षकों ने बच्चों से संख्यात्मक, व्यंजन और रोमन संख्याओं के प्रश्न लिखकर जवाब पूछे। जिसके जवाब ग्रुप के वंदना भाभोर, प्रदीप गोयल, यश खपेड़, पूजा बामनिया, अंकित पटेल ने जवाब दिया। दल ने बच्चों की पीठ थपथपाई। यादव 1 घंटे बच्चों को पढ़ाते है और बाकी समय नवाचार करते है। कक्षा पहली से पांचवी तक करीब 21 ग्रुप बनाएं हैं। जिनके नाम सिद्धि मां सरस्वती ग्रुप, प्रधानमंत्री ग्रुप, बसंत ग्रुप, कलेक्टर ग्रुप, हरियाली ग्रुप, लोकतंत्र ग्रुप, आशीर्वाद ग्रुप, संकल्प ग्रुप, स्वच्छता ग्रुप बनाए है। अलीराजपुर सोंडवा दल के प्रमुख बीआरसी रामानुज शर्मा ने बताया नई पद्धति देखने को मिली है। हमारे क्षेत्र में भी नित्य नवाचार हो रहा है। हमारे यहां खेल-खेल में शिक्षक पढ़ाते है। कलेक्टर गणेश शंकर मिश्रा के प्रयास से 8 माह में 6 स्कूल आईएसओ हुए है। नालछा का यह स्कूल देखकर और यहां की पद्धति देखकर अच्छा लगा है।

नालछा. शासकीय स्कूल के बच्चों से सवाल करते शिक्षक यादव।

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