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नोटबंदी के पौने दो साल बाद भी नई जमा पर्ची नहीं

इंदौर

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 02:30 AM IST
इंदौर
बैंकों की नकद जमा को लेकर नियम है कि इसमें काट-छांट स्वीकार्य नहीं होगी। नोटों की संख्या साफ लिखी होना चाहिए। जब ग्राहक पर्ची में 1000 को काटकर 2000 या 20 की जगह 200 लिखते हैं तो उन्हें यह कहकर टरका दिया जाता है कि ओवर राइट होने से पर्ची स्वीकार नहीं होगी। अकाउंटेंट ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि नियमानुसार पर्ची में काट-छांट नहीं होना चाहिए। यह नियम इसलिए बनाया गया है, बाद में विवाद की नौबत नहीं आए। रुपए जमा होने के बाद ग्राहक को राशि पर संशय हो तो पर्ची सबूत का काम करती है। ग्राहकों का कहना है कि पर्ची का इतना अधिक महत्व होने के बाद नई क्यों नहीं छपवाई जा रही है?

बैंकों में ग्राहकों के लिए उपलब्ध जमा पर्चियों में 1, 2, 5, 10, 20, 50, 100, 500 और 1000 के नोटों का जिक्र है। असुविधा से बचने के लिए ग्राहकों से कहा जाता है कि 1000 के नोट वाले कॉलम में 2000 के नोटों की संख्या लिखी जाए। गलती से यदि ग्राहक 1000 को काटकर 2000 बना देता है तो पर्ची अस्वीकार हो जाती है। ग्राहक भी अचरज में होता है कि 1000 के नोट वाले कॉलम में 5 नोट लिखने पर टोटल 10,000 लिखना होता है। इसी तरह 20 के नोट वाले कॉलम में 200 के नोटों की संख्या लिखने का कहा जाता है। दिक्कत तब होती है जब किसी ग्राहक के पास 200 के साथ ही 20 के भी ढेर नोट होते हैं।

नई पर्ची में भी त्रुटि

कुछ बैंक शाखाओं में नई पर्चियां आई हैं लेकिन उनमें भी त्रुटियां हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नई जमा पर्ची में 200 और 2000 क नोटों का जिक्र तो है लेकिन अब भी 1000 का कॉलम दे रखा है। इसी तरह बैंक ऑफ बड़ौदा और आइसीएसीडीआई बैंक की पर्ची में 1 और 2 के नोटों के कॉलम नहीं दिए हैं, जबकि ये नोट अभी चलन में हैं।


पर्ची में ओवर राइट करने पर विवाद की नौबत आती है

केस-1

ओवर राइटिंग नहीं चलेगी, दोबारा पर्ची भरिए

गत दिवस एक्सिस बैंक में नोट जमा कराने गया तो बहुत झंझट हुई। बैंक में उपलब्ध नकद जमा पर्ची में 200 और 2000 के नोट का वर्णन लिखने को लेकर परेशानी हुई। 1000 को काटकर 2000 किया तो बैंक अधिकारी ने कहा, ओवर राइटिंग नहीं चलेगी। दोबारा से पर्ची भरिए।


केस-2

अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं

बैंक ऑफ बड़ौदा की ब्रांच में 20 के साथ ही 200 के नोट भी जमा करने गया तो बड़ी मुश्किल हुई। बैंक अधिकारी ने कह दिया कि 20 को 200 मानकर नोटों की संख्या लिख दो। जब उनसे पूछा, 20 के नोट भी जमा करना है तो क्या करूं? अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं था।


केस-3

पता है, फिर भी बहस करते हैं

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखाओं में पुरानी जमा पर्ची ही चल रही है। मुझे अक्सर ऑफिस के रुपए जमा करने जाना पड़ता है। पर्ची में नोटों की संख्या ओवर राइट करने पर विवाद की नौबत आती है। अकाउंटेंट को पता है, काट-छांट करना ही होगी, फिर भी बहस करते हैं।



केस-4

काट-छांट करना मजबूरी है

आईसीआईसीआई बैंक में कुछ समय पहले कैश डिपाजिट करने गई थी। वहां जो जमा पर्ची मिली उसमें चलन में आए नए नोटों का जिक्र नहीं था, जबकि जो नोट बंद हो चुका है उसका आंंकड़ा लिखा था। मैंने काट-छांट की तो नई पर्ची भरने को कहा गया, जबकि पर्ची में काट-छांट करना मजबूरी है।


नई पर्ची में सुधार कर लेंगे

 यह सही है कि बैंकों के पास पुरानी पर्चियां हैं लेकिन उन्हें फेंका तो नहीं जा सकता है। उनके उपयोग के बाद ही नई पर्चियां रखी जाएंगी। नई पर्ची में भी 1000 के नोटों का कॉलम गलती से छप गया। अगली छपाई में यह त्रुटि ठीक हो जाएगी। ऋषि खरे, प्रबंधक, एसबीआई शाखा स्कीम 54, एबी रोड

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