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जितना ठुमरी में रस आता, उतना ही उन्हें नए व्यंजनों का स्वाद लेने में आता था

सिटी रिपोर्टर | ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजादेवी की गंडा बंध शिष्या बनारस की डॉ. रीता देव का कहना है कि मैंने उनसे 30...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 02:30 AM IST

जितना ठुमरी में रस आता, उतना ही उन्हें नए व्यंजनों का स्वाद लेने में आता था
सिटी रिपोर्टर | ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजादेवी की गंडा बंध शिष्या बनारस की डॉ. रीता देव का कहना है कि मैंने उनसे 30 सालों तक शास्त्रीय संगीत की तालीम हासिल की। और वे ठुमरी जितने रस और रंजकता के साथ गाती थी उतना रस उन्हें नए नए व्यंजनों का स्वाद लेने में आता था। वे जिस शहर में गायन करने जाती वहां के खास व्यंजनों का स्वाद लेना नहीं भूलती। यही नहीं, वे उन व्यंजनों का बनानेे की विधि भी बड़ी दिलचस्पी से जानती और सीखती। फिर बनारस आकर उसे बनाती भी थी। डॉ. रीता देव ने यह बात टेलिफोनिक बातचीत में कही। वे एक वर्कशॉप लेने इंदौर आ रही हैं।

उन्हें मलाई वाली आलू टिकिया खासी पसंद थी

वे बताती हैं कि उन्हें मलाई भरकर बनाई आलू टिकिया खासी पसंद थी। मटर की कचौरी और उपमा भी वे बड़े शौक से खाती थीं। वे जितनी खाने की शौकीन थी, उतनी ही व्यंजनों का बनाने की भी। हालांकि गायन के पहले वे ज्यादा कुछ खाती नहीं थी लेकिन गायन के बाद उन्हें आइस्क्रीम खाना पसंद था।

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Web Title: जितना ठुमरी में रस आता, उतना ही उन्हें नए व्यंजनों का स्वाद लेने में आता था
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