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पोएट्री, कॉमेडी, मेलोडी और मैजिक भी हुआ इस मंच पर

शहर में यह एक ऐसा इवेंट हुआ जिसमें कविता, कहानी, किस्से, गीत-ग़ज़ल के अलावा भी बहुत कुछ देखने-सुनने मिला। कॉमेडियन...

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 02:30 AM IST
पोएट्री, कॉमेडी, मेलोडी और मैजिक भी हुआ इस मंच पर
शहर में यह एक ऐसा इवेंट हुआ जिसमें कविता, कहानी, किस्से, गीत-ग़ज़ल के अलावा भी बहुत कुछ देखने-सुनने मिला। कॉमेडियन अलका जैन की कॉमिक टाइमिंग, जादूगर अनिक काले के कारनामे, मिहिर गर्ग का सिंथेसाइज़र पर नए पुराने नगमों की सुरीली धुन को सुनना कमाल था। इसी इवेंट में पवन सोलंकी और सैम फर्नेंडो ने अपना म्यूज़िकल बैंड "सप्तक - द इंडियन स्केल' लॉन्च किया। पवन और सैम दोनों पहली बार इसी ओपन माइक में मिले थे। तब से हुई दोस्ती म्यूज़िकल बॉन्डिंग में तब्दील हो गई। ग्रुप के ही कुछ मेम्बर्स ने शॉर्ट फिल्म "चांदी की चम्मच' में काम किया है। इन दोनों उपलब्धियों को सभी ग्रुप ने सेलिब्रेट भी किया।

"मां थाम ना मेरी उंगली, कहीं दूर जाना चाहती हूं/ जहां खिले वापस से बचपन उस अोर जाना चाहती हूं/ न सपनों की उलझन हो, न अपनों की झंझट/ न ज़माने की नजरें मुझपर/ बस दूर तलक ठंडक हो/नहीं समझ आते, बदलते लोगों के मुखड़े/ बड़प्पन का शोर, न गरीबों के दुखड़े/पकड़ ले न मां उंगली, तेरे पास आना चाहती हूं/ खुली आंखों का बचपन, फिर से जीना चाहती हूं।' - नीता जायसवाल

लड़की कोई अनजान सी...

मेरे घोंसले में तिनके कम थे, वो पली थी किसी अरमान सी... मंदिर के शंख सा किरदार मेरा/वो भी थी बिल्कुल अज़ान सी / ज़ीस्त लगने लगी वीरान सी/ वो मेरे घर आई मेहमान सी/ तपे पत्थर पर रख गई पांव/ थी लड़की कोई अनजान सी/ मेरे घोंसले में तिनके कम थे/वो पली थी किसी अरमान सी/ मंदिर के शंख सा किरदार मेरा/वो भी थी बिल्कुल अज़ान सी/ मैं खड़ा रहा सूखे दरख़्त सा/वो गुजर गई किसी तूफ़ान सी

- आला चौहान

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