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नमस्कार, वंदन और प्रणाम से हम पा सकते हैं ज्ञान : रामप्रसाद महाराज

हमारी संस्कृति हमें गृहण करना सिखाती है। किसी से कुछ पाना हो तो वंदन, नमस्कार और प्रणाम कर ही आप पा सकते हैं। वंदन...

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 02:40 AM IST
हमारी संस्कृति हमें गृहण करना सिखाती है। किसी से कुछ पाना हो तो वंदन, नमस्कार और प्रणाम कर ही आप पा सकते हैं। वंदन वाणी से, नमस्कार सिर झुकाकर और प्रणाम शरीर से की जाने वाली प्रक्रियाएं हैं। ध्यान रहे जिसे वंदन करो उसके प्रति वफादार रहो, जिसे नमस्कार करो उसके प्रति नमक हलाल रहो और जिसे प्रणाम करो उसके प्रति प्रामाणिक रहो।

ये विचार अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत रामप्रसाद महाराज ने उषा नगर स्थित लक्ष्यराम रामस्नेही सत्संग भवन में रविवार को व्यक्त किए। भक्त मंडल के मदन मोहन प्रजापत ने बताया सत्संग में उषा नगर, सुदामा नगर, विदुर नगर आदि 10 से ज्यादा कॉलोनियों के भक्त शामिल हो रहे हैं। सत्संग प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा हैं। यह क्रम 13 जून तक जारी रहेगा।

भक्ति में संपूर्णता, निष्ठा और श्रद्धा होना चाहिए : भगवान कहीं और नहीं, हमारे अंतर्मन में हैं, लेकिन उन्हें अनुभूत करने के लिए मन को मथना जरूरी है। जिस तरह मक्खन को मथने के बाद घी में बदला जाता है, उसी तरह मन का मंथन भी किसी न किसी रूप में हमें परमात्मा की अनुभूति कराता है। भक्ति में संपूर्णता, निष्ठा और श्रद्धा होना चाहिए। पलसीकर चौराहा स्थित मां शारदा मंदिर में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ आयोजन समिति के तत्वावधान में चल रही भागवत कथा में वृंदावन के भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य ने ये विचार रखे।

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