Hindi News »Madhya Pradesh »Indore »News» कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट का असर रैंक पर हुआ, टॉप 100 में इंदौर कहीं नहीं, लेकिन बड़े बदलाव और मुश्किल सवालों के बावजूद बेहतर रहा रिज़ल्ट

कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट का असर रैंक पर हुआ, टॉप 100 में इंदौर कहीं नहीं, लेकिन बड़े बदलाव और मुश्किल सवालों के बावजूद बेहतर रहा रिज़ल्ट

आईआईटी कानपुर ने रविवार को जेईई एडवांस्ड का रिज़ल्ट जारी किया। कैल्कुलेटिव क्वेश्चन्स, टफ पैटर्न, पूरी तरह से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 02:50 AM IST

कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट का असर रैंक पर हुआ, टॉप 100 में इंदौर कहीं नहीं, लेकिन बड़े बदलाव और मुश्किल सवालों के बावजूद बेहतर रहा रिज़ल्ट
आईआईटी कानपुर ने रविवार को जेईई एडवांस्ड का रिज़ल्ट जारी किया। कैल्कुलेटिव क्वेश्चन्स, टफ पैटर्न, पूरी तरह से कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट और उलझे हुए सवालों के बाद भी स्टूडेंट्स ने शानदार प्रदर्शन किया। शहर के सम्यक जैन ने 265, वेदिक जैन ने 258 और अनिमेष जैन 238 मार्क्स हासिल कर टॉपर्स बने। शहर की हर्षिता बुनलिया कानपुर ज़ोन की गर्ल्स टॉपर रहीं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पिछले सालों के मुकाबले शहर में टॉपर्स की रैंक कम ज़रूर हुई है लेकिन बदलावों को देखते हुए ये अच्छा रिज़ल्ट है।

सम्यक, वेदिक और अनिमेष ने की ग्रुप स्टडी

आमतौर पर टॉप करने वाले स्टूडेंट्स खुद ही अपनी गलतियां सुधारते हैं लेकिन टॉप करने वाले सम्यक, वेदिक और अनिमेष ने इसके लिए ग्रुप स्टडी की। उन्होंने बताया हम तीनों कल्पवृक्ष क्लासेस पर एक साथ कोचिंग लेते थे। उसके बाद तीनों कोचिंग पर ही रोज़ एक घंटा साथ पढ़ते थे। इससे दूसरे के थॉट्स पता लगते थे। सवाल हल करने के चार नए तरीके पता लगते थे। जिस सब्जेक्ट में पकड़ अच्छी होती थे वो दूसरों के डाउट क्लियर करता था। एग्ज़ाम से एक दिन पहले हमने जो क्वेश्चन डिस्कस किया था वो ही एग्ज़ाम में भी आया था।

तीन दोस्त जो साथ पढ़े वे रहे टॉपर, एक-दूसरे के डाउट्स क्लियर करते थे तीनों

होली, दिवाली बल्कि बर्थडे सेलिब्रेशन भी नहीं किया, पढ़ाई करता रहा

आईआईटी की तैयारी के दो सालों में मैंने एक भी दिन कोचिंग मिस नहीं की। मेरे बर्थ डे पर भी जब मैंने कोचिंग आ गया तो घरवाले नाराज़ हो गए। तबीयत खराब थी तब भी दवाई लेकर पढ़ाई की। मैथेमेटिक्स से मुझे डर लगता था। डर तो अभी भी नहीं गया लेकिन हां, मैथ्स के वीक टॉपिक्स पर मेरा कॉन्फिडेंस ज़रूर बढ़ गया। ग्रुप स्टडी ने इसमें बहुत मदद की। रैंक हासिल करने के लिए दो सालों की मेहनत से ज्यादा पेपर के दौरान टेम्परामेंट ज्यादा ज़रूरी होता है। एक सवाल यदि हल नहीं हो रहा हो तो उस पर ज्यादा टाइम बर्बाद करने से प्रेशर बढ़ जाता है। इसका असर पूरे पेपर पर आ सकता है। मुझे वीडियो गेम्स खेलने का शौक है। दो सालों से हाथ नहीं लगाया था। 20 मई को एग्ज़ाम के बाद खूब गेम्स खेले। वैसे आईआईटी बॉम्बे मेरा प्रेफरेंस है लेकिन दिल्ली या कानपुर में एडमिशन मिलेगा।

सम्यक जैन, मार्क्स : 265

एआईआर : 147, सिटी रैंक : 01

पेरेंट्स : योगेश-नमिता जैन

रिज़ल्ट के बाद अपनी सक्सेस सेलिब्रेट करने बाइक राइड पर निकले टॉपर्स।

एक्सपर्ट

विजित जैन के मुताबिक इंटीजर सवालों ने उलझाया। एक सवाल में ज्यादा समय लगने से सारे सवाल अटेम्प्ट नहीं कर सके। सीबीटी का असर भी पड़ा। भूपेंद्र भावसार ने कहा पेपर कैल्कुलेशन बेस्ड था। जेईई की तैयारी इस पैटर्न पर नहीं कराते। ब्रिलियंट स्टूडेंट्स डेसीमल कंडीशन को फुलफिल करने के रह गए। इस बार क्वालिफाइंग स्टूडेंट्स की संख्या भी कम हुई है। करीब 18 हज़ार बच्चे ही क्वालिफाय कर पाए हैं।

सीबीटी का असर भी हुआ रैंक पर

मैंने सप्ताह भर तक गर्मी में बगैर पंखे के तैयारी की क्योंकि पता था कि एग्ज़ाम हॉल में फैन नहीं हैं

आठ दिन पहले सेंटर विज़िट किया तो पता चला वहां गर्मी दूर करने के लिए कोई इंतज़ाम नहीं थे। हमें गर्मी में ही परीक्षा देनी थी। मैंने एक हफ्ते बगैर पंखे टेस्ट दिए ताकि एग्ज़ाम हॉल में यही सिचुएशन हो तो दिक्कत न आए। मुझे लगता है एकेडमिक प्रिपरेशन से भी ज्यादा टफ ये चीज़ थी क्योंकि दो सालों की तैयारी को हमें उन 6 घंटों में ही डिलिवर करना था। मुझे गिटार बजाना पसंद है, लेकिन दो साल में मैंने बमुश्किल 30 मिनट ही गिटार को छुआ होगा। सुबह 6.30 से रात 9 बजे तक का पूरा समय तैयारी की। ऐसा कोई समय नहीं मिलता कि मैं गिटार बजा सकूं। हालांकि एग्जाम देने के बाद से अब तक मैंने दो सालों की कसर पूरी की। रिजल्ट आया तब मैं गिटारोथॉन में ही था। खुद को रिफ्रेश करने के लिए भी मैं सब्जेक्ट या चैप्टर बदल लेता या इंट्रेस्टिंग सब्जेक्ट पढ़ता।

पिछली बार 6 हज़ार के आसपास आई थी रैंक, यहां तक पहुंचने के लिए रोज़ 12-14 घंटे पढ़ाई की मैंने

मैंने ड्रॉप लिया था। पिछली बार 6 हज़ार के आस-पास रैंक लगी थी। ड्रॉप लेना चैलेंजिंग था। ड्रॉपर्स कई बार पहली बार से भी कम रैंक लाते हैं। लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ। शहर में ड्रॉपर्स में सबसे ज्यादा मार्क्स मुझे ही मिले हैं। मैथ्स में स्पीड कम थी इसलिए बहुत प्रैक्टिस की। दिन में कम से कम 12 घंटे पढ़ता ही था। पापा- मम्मी से बात भी नहीं हो पाती थी इसलिए वे मेरे लिए रोज़ लंच लेकर कोचिंग आते थे ताकि मेरे साथ वक्त बिता सकें। हम कार में लंच करते थे। बातें भी हो जाती थी और मूड भी रिफ्रेश हो जाता था। टेस्ट के दौरान जो डिफिकल्टी होती थी उसे नोट कर लेता था। अगली बार उसी सब्जेक्ट के टेस्ट से पहले डिफिकल्टी को पढ़ता था। सक्सेस के लिए मेहनत के बाद पैरेंट्स का मोटिवेशन सबसे बड़ी चीज़ है।

वेदिक जैन , मार्क्स : 258

एआईआर : 197, सिटी रैंक : 02

पेरेंट्स : संजय-प्रियंका जैैन

अनिमेष जैन, मार्क्स : 253

एआईआर : 238, सिटी रैंक : 03

पेरेंट्स : धर्मेंद्र-मोना जैन

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×