इंदौर

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मूक-बधिर कलाकारों ने कही मानव उत्पत्ति और विकास की कहानी

मूक-बधिर कलाकारों ने कही मानव उत्पत्ति और विकास की कहानी सिटी रिपोर्टर | इंदौर यकीनन जब भाव प्रभावी हों तो...

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 02:50 AM IST
मूक-बधिर कलाकारों ने कही मानव उत्पत्ति और विकास की कहानी
मूक-बधिर कलाकारों ने कही मानव उत्पत्ति और विकास की कहानी

सिटी रिपोर्टर | इंदौर

यकीनन जब भाव प्रभावी हों तो आवाज़ मायने नहीं रखती, भाषा बेमानी हो जाती है। महाराष्ट्र से आए 14 मूकबधिर बच्चों का प्रभावी आंगिक अभिनय तो यही कहता है। बाल नाट्य महोत्सव के अाखिरी दिन मंच पर थे 14 मूक बधिर कलाकार। संवादविहीन थी यह प्रस्तुति लेकिन कलाकारों के आंगिक अभिनय व संगीत से दर्शकों तक संप्रेषित हुई। भरत मोरे व अन्वय आष्टिवकर के निर्देशन में यह नाटक किया गया। शुरुआत में ध्वनि व्यवस्था उचित न होने के कारण दिव्यांग बच्चों का संगीत से संतुलन गड़बड़ाया, जिसे बाद में सुधार लिया गया। भरारी नाटक की यह 80वीं प्रस्तुति थी।

बाल नाट्य महोत्सव के आखिरी दिन मुंबई के मूकबधिर बच्चों की प्रस्तुति के साथ हुआ 19 नाटकों का मंचन

संस्था मुक्त संवाद और तरुण मंच के बैनर तले हो रहे तीन दिनी बाल नाट्य उत्सव का रविवार को समापन हुआ। माई मंगेशकर सभागृह में सुबह से शाम तक एक के बाद एक 19 नाटकों की प्रस्तुति बाल कलाकारों ने दी। 600 कलाकारों और 41 नाटकों के साथ हुए इस उत्सव का आकर्षण बना मुंबई की नाट्यशाला के बच्चों का नाटक भरारी। 26 कलाकारों की इस टोली में 14 कलाकार मूकबधिर थे।

बिजली से लेकर कम्प्यूटर का आविष्कार भी दिखाया

भरारी मराठी शब्द है, जिसका अर्थ है उड़ान। यहां मानव की उड़ान का चित्रण है, यानि उत्पत्ति से लेकर अब तक का विकास। शुरुआत आकाशगंगा और उसके ग्रहों से होती है। पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा के साथ ही नवग्रह। इसके बाद पृथ्वी पर जल, वनस्पति, जीवों की उत्पत्ति को मौन अभिनय से कलाकारों ने प्रस्तुत किया। आवश्यकता अविष्कार की जननी है, और मानव का विकास भी उसकी आवश्यकताओं के साथ होता गया। इस नाटक के माध्यम से चित्रित होता है। बंदर से मानव बनना, मृत जानवरों की खाल का वस्त्र बन जाना और घर्षण से उत्पन्न आग में भूने हुए जानवरों का मांस खाने के बाद भोजन को पकाकर खाने की व्यवस्था, जरूरत के मुताबिक मानव के जीवन का हिस्सा बनती चली गई। इसके बाद पशुपालन, यातायात के साधनों का विकास और विज्ञान के विकास को अभिव्यक्त किया गया। कुशल प्रकाश संयोजन तथा ध्वनि प्रभाव ने प्रस्तुति को रोचक बनाने के साथ दर्शकों को बांधे रखा। आखिर में अंतरिक्ष की यात्रा के साथ प्रस्तुति का समापन हुआ। एक-एक घटनाक्रम को दर्शकों ने देखा और सराहा। नवीन आविष्कारों विशेषकर मोटर साइकिल, टाइपराइटर, कम्प्यूटर, बिजली आदि के आविष्कार के दृश्यों पर दर्शकों ने हाथ हिलाकर कलाकारों का मनोबल बढ़ाया। महोत्सव के समापन पर भोपाल के रंगकर्मी उदय शहाणे और इंदौर के कलाकार सुनील मतकर का सम्मान हुआ।

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