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रंग दे रंगरेजवा, जैसी मोरी पिया की पगरिया

पंचम निषाद संगीत संस्थान और इंदौर प्रेस क्लब की साझा रविवासरीय बिछात ‘स्वर-प्रवाह’ में मुंबई की हेमांगी भगत नैने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 02:50 AM IST

रंग दे रंगरेजवा, जैसी मोरी पिया की पगरिया
पंचम निषाद संगीत संस्थान और इंदौर प्रेस क्लब की साझा रविवासरीय बिछात ‘स्वर-प्रवाह’ में मुंबई की हेमांगी भगत नैने ने राग मदमाद सारंग में तराना गाने के पहले द्रुत बंदिश ‘रंग दे रंगरेजवा, जैसी मोरी पिया की पगरिया’ गाई तो उमस से हलकान श्रोताओं को जैसे निरात सी मिल गई। शुभदा मराठे और जयपुर अतरौली घराने की प्रतिभा तिलक की शिष्या हेमांगी प्रभावी गायन से ‘स्वर-प्रवाह’ की इस महफ़िल को रसपूर्ण बनाने में क़ामयाब रहीं।

उन्होंने प्रात: बेला के राग गूजरी तोड़ी से अपने गायन का आरंभ किया। एकताल में निबद्ध पं. रामाश्रय झा की बंदिश ‘हरि को नाम सुमिर ले मन’ से रविवारी सुबह को एक रूहानी तबीयत मिल गई। हेमांगी ने बाद में तीन ताल में अपने प्रारंभिक गुरु डॉ. शशिकांत ताम्बे की द्रुत बंदिश ‘ए जोगी जानत हूं रे’ सुनाकर ख़ासी दाद बटोरी। मनोहारी लयकारी के शुमार से उनका गायन कुछ और निखर गया। मीठे स्वर और रियाज़ से तपी तानों की पेशकश से हेमांगी ने अपने गायन का प्रभावी तानाबाना बुना। उनकी गायकी में तैयारी को आक्रामक न बनाते हुए अपने घराने की विरासत को व्यक्त करने का विनम्र आग्रह था। पद्मश्री पं. तुलसीदास बोरकर की सुशिष्या डॉ. रचना पौराणिक शर्मा ने पेटी और वैभव भगत ने तबले पर माकूल संगति दी।

Music Programme

हेमांगी भगत

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Web Title: रंग दे रंगरेजवा, जैसी मोरी पिया की पगरिया
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