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कश्मीर घाटी में मैदान के रास्ते राह पर लौट रहे

कश्मीर घाटी में मैदान के रास्ते राह पर लौट रहे युवा; सालभर में 60 हजार बच्चे स्पोर्ट्स इवेंट में उतरे, 289 मेडल जीत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 02:50 AM IST

कश्मीर घाटी में मैदान के रास्ते राह पर लौट रहे युवा; सालभर में 60 हजार बच्चे स्पोर्ट्स इवेंट में उतरे, 289 मेडल जीत लाए...

स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल के सेक्रेटरी वाहिद पारा ने बताया कि 2017 में राज्य से 19 स्पोर्ट्सपर्सन अंतरराष्ट्रीय खेलों का हिस्सा बने और 8 मेडल जीते। 2000 ने नेशनल इवेंट्स में भाग लिया। 87 गोल्ड, 77 सिल्वर, 117 ब्रॉन्ज जीते। इन मेडल्स में कश्मीर घाटी की हिस्सेदारी 80% है। वॉटर स्पोर्ट्स में भी राज्य के बच्चे 56 मेडल जीत चुके हैं।

बीसीसीआई के कोच 50 से ज्यादा क्रिकेट कैंप लगा चुके हैं। हर जिले में एक फुटबॉल एकेडमी भी है। फुटबॉल के 40 ट्रेनिंग कैंप लग चुके हैं।

आइस हॉकी, स्नो स्कीइंग और नॉर्डिक स्कीइंग के लिए कश्मीर मशहूर है। देश में तीन ही राज्य हैं, जहां ये खेल खेले जाते हैं, जिनमें से एक कश्मीर है। देश की सबसे अच्छी वॉटर स्पोर्ट्स फेसिलिटी श्रीनगर में तैयार की गई है।

बर्फबारी के बीच भी खेल लगातार होते रहें, इसलिए 22 इंडोर स्पोर्ट्स स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं।

फीमेल कोच स्टेट फुटबॉल एकेडमी, रग्बी, क्रिकेट के साथ हेल्थ और फिटनेस की ट्रेनिंग लड़कों को दे रही हैं।

शबीर- डाउनटाउन में खोली स्पोर्ट्स एकेडमी- श्रीनगर का डाउन टाउन पत्थरबाजी के लिए मशहूर है। इसी डाउन टाउन में शबीर अहमद शाह स्पोर्ट्स एकेडमी चलाते हैं। वो कहते हैं, मेरी कोशिश है बच्चों को खेल में इतना मशगूल रखूं कि उनका ध्यान गलत चीजों पर जाए ही नहीं। शबीर बैंक में नौकरी करते हैं। उनकी एकेडमी शुरू हुए अभी एक साल ही हुआ है और 50 बच्चे खेल सीखने आने लगे हैं। इनमें 25 लड़कियां भी हैं।

1.5 लाख छात्रों में से 18 हजार ही क्वालीफाई, पहली बार इतने कम...

आईआईटी के अलावा एनआईटी, आईआईआईटी और जीएफटीआई में भी एडवांस्ड परीक्षा के माध्यम से दाखिले दिए जाएंगे।

5 साल बाद टॉप-10 में लड़की, 2013 में कोटा की अदिति ने बनाई थी जगह

इस साल मीनल ने छठी रैंक हासिल करते हुए कोटा की अदिति के रिकॉर्ड की बराबरी की है। साल 2013 में अदिति ने ऑल इंडिया टॉप-10 में जगह बनाई थी। उन्होंने ऑल इंडिया छठी रैंक हासिल करते हुए लड़कियों की श्रेणी में टॉप किया था।

टॉपर के 93.09%, पिछले साल के टॉपर से 1.09 प्रतिशत ज्यादा-पिछले साल के टॉपर सर्वेश मेठानी के 92 प्रतिशत अंक थे। इस साल के टॉपर प्रणव ने उनसे 1.09%अधिक अंक हासिल किए हैं। उनके 93.09% अंक रहे। 2012 में अर्पित अग्रवाल ने आईआईटी एंट्रेंस में 96%अंक हासिल किए थे। यह रिकॉर्ड अब तक कोई नहीं तोड़ पाया है।

किस साल कितनों को काउंसलिंग कॉल

साल स्टूडेंट्स

2013 20834

2014 27151

2015 26456

2016 36566

2017 50455

2018 18138

प्रणव के टिप्स - चंडीगढ़|टॉपर प्रणव गोयल ने कहा कि अगर आप सही तरीके से फोकस्ड होकर पढ़ाई करते हैं तो यह बहुत मायने नहीं रख कि आप कितने घंटे पढ़ाई कर रहे हैं। शांत और फोकस्ड रहें। अपने टीचर्स और उनके गाइडेंस पर यकीन रखें। प्रणव की जेईई मेंस में चौथी रैंक थी। सीबीएसई 12वीं में वह 97.2 % चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला में टॉपर था।

आनंद के सुपर 30 के 26 छात्र सफल

पटना | आनंद कुमार के सुपर 30 के 26 छात्रों को सफलता मिली है। नतीजों के बाद आनंद कुमार ने कहा है कि अब समय आ गया है जब सुपर 30 के आकार को बड़ा किया जाए।

यूपीएससी परीक्षा पास किए बिना भी बन सकेंगे ज्वाइंट सेक्रेटरी...

सरकार ने शुरुआत 10 मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के लिए आवेदन मंगाकर की है। ये विभाग हैं- वित्त सेवा, इकोनॉमिक अफेयर्स, कृषि, सड़क परिवहन, जहाजरानी, पर्यावरण, नवकरणीय ऊर्जा, नागरिक उड्‌डयन और वाणिज्य।

यह उपलब्ध स्रोतों में से सर्वश्रेष्ठ को चुनने का एक प्रय| है। इसके पीछे प्रेरणा यह है कि यह हर भारतीय नागरिक को अपनी प्रतिभा और क्षमता के हिसाब से अपना विकास सुनिश्चित करने के लिए मौका देता है।’ - जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री, पीएमओ

3 साल के लिए होगी नियुक्ति: डीओपीटी की अधिसूचना के अनुसार मंत्रालयों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर नियुक्ति होगी। इनका कार्यकाल 3 साल का होगा और अच्छा प्रदर्शन होने पर इसे 5 साल तक किया जा सकेगा। इन पदों पर आवेदन के लिए अधिकतम उम्र की सीमा तय नहीं है, जबकि न्यूनतम उम्र 40 साल है। उम्र का निर्धारण 1 जुलाई 2018 के आधार पर किया जाएगा। वेतन और अन्य सुविधाएं केंद्र सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी के समान होगा। यानी इन्हें 1 लाख 44 हजार 200 रुपए से लेकर 2 लाख, 18 हजार, 200 रुपए तक सैलरी मिल सकती है। इन्हें सर्विस रूल की तरह काम करना होगा।

2005 में आया था पहली बार प्रस्ताव : नौकरशाही में लैटरल एंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में आया था। प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट में इसकी अनुशंसा की गई थी। तब इसे खारिज कर दिया गया। 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमेटी बनाई। इस कमेटी ने इस पर आगे बढ़ने की अनुशंसा की। जुलाई 2017 में डीओपीटी ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश जारी किया था। तब कहा गया था कि नौकरशाही में लैटरल एंट्री से मध्यम स्तर के अधिकारियों की कमी को दूर किया जा सकेगा।

इंदौर एयरपोर्ट पर एग्जीक्यूटिव लाउंज बनेगा, फ्लाइट लेट हुई तो यात्री यहीं ठहर सकेंगे...

अधिकारियों के मुताबिक वीआईपी गेस्ट अकसर इसकी मांग करते आ रहे थे। यह बड़े एयरपोर्ट पर खास यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए जाते हैं, ताकि यात्री सामान्य सिक्युरिटी होल्ड एरिया में इंतजार करने के बजाय यहां इंतजार कर सकें। यह सिक्युरिटी होल्ड एरिया में ही स्थित होता है। गौरतलब है कि मुंबई, दिल्ली समेत कई बड़े एयरपोर्ट पर एयरलाइंस भी अपने यात्रियों के लिए लाउंज बनाती हैं।

एयरपोर्ट पर ही हो सकेगी होटल की बुकिंग- एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुविधा के लिए होटल बुकिंग की भी सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए शहर की दो बड़ी होटल अपने रिजर्वेशन काउंटर्स एयरपोर्ट पर ही शुरू करने जा रही हैं। इसके लिए प्रबंधन ने अनुमति दे दी है। करीब एक माह में ये काउंटर्स शुरू हो जाएंगे। यात्री यहीं से होटल बुकिंग कर सकेंगे और बुकिंग होने पर होटल की कार से ही उन्हें होटल पहुंचाने जैसी सुविधा दी जाएगी। एयरपोर्ट डायरेक्टर अर्यमा सान्याल के मुताबिक एग्जीक्यूटिव लाउंज और होटल रिजर्वेशन काउंटर्स जल्द ही शुरू किए जाएंगे।

चुनाव बाद सीटें कम पड़ें तो ही होता है सियासत में सीज़ फ़ायर...

बस दोनों तरफ़ के हमारे-उनके लड़के मरें और परदे के पीछे खड़ी तीसरी ताक़त की दुकानदारी चलती रहे।’ हाजी हंसकर बोले, ‘इसका तो मतलब हुआ कि यह लड़ाई-झगड़े का सिलसिला तुम्हारी और भाभीजी की लड़ाई की तरह चलता ही रहेगा? ‘मुझे हाजी से इस तरह की टिप्पणी की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। मैंने कहा, ‘शुक्र मनाओ हाजी कि तुम इस लड़ाई से बच गए, वरना कारतूस गिनने में ही उमर निकल जाती।’ हाजी थोड़ा प्रैक्टिकल होते हुए कान के पास आ कर बोले, ‘महाकवि, तुम तो अनुभवी हो घर में क्या सच में सीज़ फ़ायर नहीं हो सकता?’ मैंने कहा, ‘होता है। जब श्रीमतीजी को शॉपिंग जाना होता तो तब उनकी तरफ़ से सीज़ फ़ायर की घोषणा होती है। और जब सीरियल के टाइम पर भारत-पाक मैच आ रहा हो तो मेरी तरफ़ से।’ हाजी ने एक बार फिर पटरी बदली, ‘यानी सियासी तरीका! वैसे सियासत में कभी सीज़ फ़ायर नहीं होता क्या?’ मैंने कहा, ‘सियासत में सीज़-फ़ायर तभी होता है जब चुनाव हो गए हों, और सीटें कम पड़ रही हों। उस वक्त हर शकुनि को सभी कौरवों में युयुत्सु दिखने लगते हैं, और सारे अर्जुन गाण्डीव को नीचे धर सीज़-फ़ायर की मुद्रा में हाथों में कबूतर पकड़े नज़र आते हैं।’ हाजी ने कहा, ‘मतलब कुल-मिला कर सीज़-फ़ायर एक भ्रम है। होता कहीं नहीं, बस डिक्शनरी की एक लाइन खाने का जुगाड़ है।’

भाई हो बिछुड़े हुए, भाई रहो,

भीख की ऐंठ से मिलेगा क्या?

चांद तक तुम हमारे साथ चलो,

फ़क़त घुसपैठ से मिलेगा क्या?

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Web Title: कश्मीर घाटी में मैदान के रास्ते राह पर लौट रहे
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