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मेडिकल यूनिवर्सिटी के फंड से सरकारी कॉलेजों में सेंटर आॅफ एक्सीलेंस खोलने की तैयारी

Dainik Bhaskar

Jun 11, 2018, 02:50 AM IST

News - कुलपति ने राज्यपाल को लिखी चिट्ठी, कहा यूनिवर्सिटी एक्ट में नहीं है कॉलेजों को बजट देने का प्रावधान भास्कर...

मेडिकल यूनिवर्सिटी के फंड से सरकारी कॉलेजों में सेंटर आॅफ एक्सीलेंस खोलने की तैयारी
कुलपति ने राज्यपाल को लिखी चिट्ठी, कहा यूनिवर्सिटी एक्ट में नहीं है कॉलेजों को बजट देने का प्रावधान

भास्कर न्यूज | भोपाल

इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मध्यप्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी के फंड से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के सरकारी फैसले का विरोध शुरू हो गया है। मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. डॉ. आरएस शर्मा ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को 11 मई की कार्यपरिषद बैठक मे यूनिवर्सिटी अधिनियमों के खिलाफ हुए फैसलों की रिपोर्ट भेज दी है। इस रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी कुलपति डॉ. शर्मा ने बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल हुए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग राधेश्याम जुलानिया और आयुक्त शिवशेखर शुक्ला के निर्देश पर रखे गए नियम विरुद्ध प्रस्तावों की लिस्ट भी भेजी है। इसके चलते मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसर आमने - सामने हो गए हैं।

मध्यप्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी के अफसरों ने बताया कि सरकारी और प्राइवेट मेडिकल, डेंटल कॉलेजों में अलग - अलग सीट पर दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स की नामांकन से लेकर डिग्री तक की अलग - अलग फीस तय है। प्राइवेट मेडिकल - डेंटल कॉलेज में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी को 50 हजार से 70 हजार रुपए तक अलग - अलग मद में देते हैं। प्राइवेट मेडिकल - डेंटल - नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ रहे एमबीबीएस, बीडीएस, एमएस, एमडी और सुपर स्पेशिएलिटी कोर्स के स्टूडेंट्स से फीस के रूप में यूनिवर्सिटी को सालाना करीब 35 करोड़ रुपए का फंड मिलता है। जबकि राज्य सरकार यूनिवर्सिटी को सालाना 2 करोड़ रुपए का अनुदान देती है। राज्य सरकार यूनिवर्सिटी को फंड देने के बदले उससे निजी चिकित्सा शिक्षा संस्थानों से हुई आय में से चार सरकारी कॉलेजों के लिए 160 करोड़ रुपए बतौर डोनेशन लेना चाहती है। कार्यपरिषद सदस्य डॉ. चंद्रेश शुक्ला ने बैठक में हुए इस फैसले का लिखित में विरोध किया है। साथ ही राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को चिट्ठी भी लिखी है।

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