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शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों से मुक्त करने की ज़िम्मेदारी भी ले यूथ : राज्यपाल

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 03:00 AM IST

News - भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परम्परा में शामिल रही है शिक्षा-दीक्षा, लेकिन शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं...

शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों से मुक्त करने की ज़िम्मेदारी भी ले यूथ : राज्यपाल
भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परम्परा में शामिल रही है शिक्षा-दीक्षा, लेकिन शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं है। शिक्षित युवा होने के नाते आपको दहेज प्रथा और अंधविश्वासों और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को खत्म करने में अपनी सहभागिता निभाना चाहिए। दुनिया में भारत ही ऐसा देश है जिसमें शिक्षण संस्थानों में संस्कार भी दिए जाते हैं। भारतीय संस्कृति विश्व की श्रेष्ठ संस्कृतियों में से एक है इसलिए प्राचीनतम होते हुए भी नवीन और सनातन है। अपनी आध्यात्मिक और दार्शनिक विशेषताओं के कारण हमारा देश को विश्वगुरु का सम्मान प्राप्त हुआ।

आज आयोजित किए गया यह दीक्षांत समारोह भी हमारे संस्कारों का ही एक रूप है। गुरुकुल के कुलाधिपति शिक्षा पूर्ण होने के के बाद अपने शिष्यों को दीक्षा मंत्र से दीक्षित करते थे। यह भी कुछ वैसा ही है। हमारे देश के प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला और नालंदा आज भी भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा को विश्व में फैला रहे हैं। शोध कार्यक्रम के छात्रों को चाहिए कि वे केंद्र या राज्य सरकार की किसी एक योजना को चुनें और ग्रामीण क्षेत्रों में उन पर अध्ययन करें कि उसका लाभ घरों तक पहुंचा है या नहीं।

शिक्षा की समस्याओं के लिए साथ काम करना होगा

आज अधिकतर स्टूडेंट्स नया करने की चाह में नई संभावनाएं तलाश रहे हैं। इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एम्बेडेड सिस्टम्स, रोबोटिक्स आने वाले समय की ज़रूरत हैं। नामांकन के दृष्टिकोण से भारत की उच्च शिक्षा 25.2 फीसदी के साथ विश्व में तीसरे स्थान पर है। इसके बाद भी शिक्षा में कई असमानताएं है। गुणवत्ता, गांवों में इसकी पहुंच व शिक्षा के स्तर में एकरूपता आज भी बड़ी चुनौतियां हैं। इन्हें दूर करने के लिए भी युवाओं को आगे आना होगा।

हर व्यक्ति गोद ले टीबी से पीड़ित एक बच्चा तो 2022 तक टीबी मुक्त हो जाएगा हमारा भारत

राज्यपाल ने इस मंच से युवाओं के साथ नागरिकों से भी अपील की कि वे कम से कम एक बच्चे को गोद लें जो टीबी से पीड़ित हो। हर 15 दिन में एक बार उनके घर जाएं और देखें कि वे दवाई ले रहे हैं या नहीं। सरकार से मिलने वाली राशि उसी पर खर्च हो रही है या नहीं। इस तरह महज़ 6 महीने में ही टीबी पीड़ित एक बच्चा ठीक हो सकता है। यह कदम 2022 तक पूरे देश को टीबी मुक्त बनाने में मददगार होगा। हमें ये भी सुनिश्चित करना होगा कि इंदौर के हर टीबी पेशेंट बच्चे को गोद लेकर उसे स्वस्थ बनाया जाए।

पीएचडी स्टूडेंट्स गवर्नमेंट को बता सकते हैं कि योजनाओं का लाभ नीचे तक मिल रहा है या नहीं

सरकार ने कई योजनाएं बनाई हैं। इनका लाभ गांव के हर घर तक पहुंचा है या नहीं, यह आपको देखना होगा। पीएचडी स्टूडेंट्स सरकार की एक योजना की स्टडी करें। उसका लाभ पहुंचा है या नहीं। योजना के कारण उनके स्वास्थ्य व आचरण में कोई सकारात्मक परिवर्तन हुआ या नहीं, स्वच्छता आई या नहीं। सरकार की योजना जिला और तहसील स्तर तक तो पहुंची है लेकिन हर घर तक पहुंचने की जानकारी आप ही से मिलेगी। पूरे प्रदेश की यूनिवर्सिटीज़ को इस तरह की स्टडी करने का सुझाव दिया गया है। इनकी रिपोर्ट्स केंद्र सरकार को भी दी जाएगी।

टॉपर्स को दिए गए मेडल और सर्टिफिकेट

दीक्षांत समारोह में एमएससी, एमबीए और एमटेक के 55 स्टूडेंट्स को कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी ने सर्टिफिकेट दिए। इन कोर्स में टॉपर रहे स्टूडेंट्स को मुख्य अतिथि द्वारा गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। एमबीए के लिए रुचिता शर्मा, एमएससी के लिए चंचल गोखले और एमटेक के लिए पायल परमार को मेडल दिए गए। ओवरऑल परफॉर्मेंस में गर्ल्स का अवॉर्ड चंचल गोखले और बॉयज़ अवॉर्ड राजकुमार भारद्वाज को दिया गया। कुलपति डॉ. उपिंदर धर ने यूनिवर्सिटीज के विभिन्न कोर्स और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।

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