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जेईई मेन : आॅल इंडिया टॉप 100 में इंदौर कहीं नहीं, 140वें पायदान पर मिली जगह

स्टूडेंट्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक लेंदी पेपर होने की वजह से ब्रिलियंट स्टूडेंट्स भी हल नहीं कर सके सभी सवाल,...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:00 AM IST

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    स्टूडेंट्स और एक्सपर्ट्स के मुताबिक लेंदी पेपर होने की वजह से ब्रिलियंट स्टूडेंट्स भी हल नहीं कर सके सभी सवाल, इसीलिए नीचे आई रैंक, 310 अंक के साथ तन्मय बंसल बने सिटी टॉपर, शहर से तकरीबन 1500 स्टूडेंट्स ने पाई सफलता

    सिटी रिपोर्टर | इंदौर

    जॉइंट एंट्रेंस एग्ज़ाम (जेईई) मेन के रिज़ल्ट सोमवार को जारी किए गए। ऑल इंडिया लेवल पर शहर के हाथ कोई बड़ी उपलब्धि नहीं आई। इंदौर को मिली बेस्ट रैंक 140 है जो तन्मय बंसल ने हासिल की है। उन्होंने 310 अंकों के साथ यह रैंक पाई। जानकारों के मुताबिक मेन में ऑफलाइन पेपर लंबा होने की वजह से कई स्टूडेंट्स पूरे सवालों के जवाब नहीं दे पाए। शहर को रैंक न मिलने की सबसे बड़ी वजह यही है।

    चैलेंज करने पर बोनस मार्क्स भी नहीं दिए गए इस बार

    अधिकतर स्टूडेंट्स पेन एंड पेपर मोड चुनते हैं। कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) देने वालों की संख्या कम होती है। 8 अप्रैल को हुआ पेपर सीबीटी के मुकाबले मुश्किल और लेंदी था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसे स्टूडेंट्स जिन्होंने दूसरी कॉम्पीटिटिव एग्ज़ाम्स में बेहतर रिज़ल्ट दिए वे भी जेईई मेन में सभी सवालों के जवाब नहीं दे पाए। पेपर की लंबाई के कारण 4 से 10 सवाल स्टूडेंट्स को छोड़ने पड़े। जिन स्टूडेंट्स ने स्मार्टली सवालों को छोड़ा या जवाब दिए उन्होंने मार्क्स हासिल किए। इसके अलावा सीबीएसई ने स्टूडेंट्स के चैलेंजेस को भी तवज्जो नहीं दी। पेन एंड पेपर में स्टूडेंट्स ने कई सवालों को चैलेंज किया था लेकिन उन्हें बोनस मार्क्स नहीं मिले। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि चूंकि जेईई एडवांस्ड सीबीटी होता है इसलिए बोर्ड चाहता है कि ज्यादातर बच्चे मेन में भी सीबीटी ही चुनें। इसलिए सीबीटी का स्तर पेन एंड पेपर के मुकाबले थोड़ा आसान होता है। -शेष पेज 16 पर

    खुद से बड़ी डिफिकल्टी कुछ नहीं, वीडियो गेम खेलना पसंद है लेकिन 3 साल से नहीं खेला

    तन्मय बंसल

    पिता : रोशन बंसल

    मां : संध्या बंसल

    मेरे लिए सबसे बड़ी डिफिकल्टी मैं खुद था। डिस्ट्रैक्शन्स से खुद को बचाना सबसे बड़ा चैलेंज होता है। लंबे समय पढ़ने के बाद काफी देर तक मन ही लगता। इसमें मुझे मम्मी ने सपोर्ट किया। उन्होंने अपने सोने और उठने का समय मेरी पढ़ाई के अकॉर्डिंग कर लिया था। वे उठकर एक्सरसाइज़ करती थीं और मैं पढ़ाई। मुझे वीडियो गेम खेलना बहुत पसंद है लेकिन तीन साल से उसे हाथ भी नहीं लगाया। तैयारी का प्रेशर हैंडल करना बहुत ज़रूरी होता है। रात 11 बजे तक पढ़ने के बाद मैं नियमित वॉक करता था। छोटी बहन के साथ होने वाली ये वॉक मेंटली रिलैक्स करती थी।

    310 अंक के साथ तन्मय बने सिटी टॉपर

    ऑल इंडिया रैंक 140 लाने वाले शहर के तन्मय बंसल सिटी टॉपर हैं। उन्होंने 310 मार्क्स हासिल किए। वहीं 301 अंक हासिल करने वाले मनस्वी पाटीदार ने एआईआर 207पाई। सिटी गर्ल्स टॉपर निहारिका अग्रवाल रहीं। उन्होंने 285 अंकों के साथ 450वीं रैंक पाई।

    ड्रॉप लेना ही सबसे बड़ा चैलेंज था, क्योंकि अक्सर ड्रॉप के बाद परिणाम पहले से भी कमजोर आते हैं

    जेईई के लिए यह मेरा सेकंड अटेम्प्ट है। पिछले साल मैंने 12वीं के साथ ही एग्ज़ाम दी थी। मुझे और बेहतर रि़जल्ट का भरोसा था। लिहाज़ा मैंने एक साल ड्रॉप लिया और यही मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती रही। यह धारणा है कि ड्रॉप के बाद अच्छे रिजल्ट आते हैं, लेकिन प्रैक्टिकली हमेशा ऐसा नहीं होता। अक्सर ड्रॉपर्स उतने बेहतर रिज़ल्ट नहीं ला पाते। एक साल का सवाल था सामने। यह प्रेशर किसी चैलेंज से कम नहीं होता। टफ तो होता है। मेरे मामा पहले शख्स थे परिवार में जिन्होंने आईआईटी कानपुर से डिग्री हासिल की। मुझे भी आईआईटी में ही एडमिशन लेना था। ड्रॉप के बाद पढ़ाई में फैमिली सपोर्ट सबसे ज्यादा रहा। सुबह से रात तक मम्मी बहुत मदद करती थीं।

    निहारिका अग्रवाल

    पिता : संजीव अग्रवाल

    मां : हर्षिता अग्रवाल

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