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प्रबंधन से ही प्रभु राम ने शोषितों-वंचितों को इकट्ठा कर बड़े लक्ष्य हासिल किए

पाणिनी विश्वविद्यालय कुलपति और मानस मर्मज्ञ डॉ. मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि रामचरित मानस में राम...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:00 AM IST
पाणिनी विश्वविद्यालय कुलपति और मानस मर्मज्ञ डॉ. मिथिलाप्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि रामचरित मानस में राम शोषितों-विंचितों को एक समूह में संगठित करते हैं। उपेक्षितों को सम्मान देकर अपने साथ लाते हैं और इन सबकी शक्ति का बेहतर इस्तेमाल करते हुए बड़े लक्ष्य हासिल करते हैं। वे वानरों की सेना का कल्पनाशील प्रबंधन करते हैं इस सेना के साथ रावण को पराजित करते हैं। इसलिए रामचरित मानस में प्रबंधन के उच्च मूल्य स्थापित किए गए हैं। यह पूरी कथा ही प्रबंधन की कथा है। यह बात उन्होंने सोमवार को मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में कही। वे डॉ. पुष्पारानी गर्ग की पुस्तक रामचरित मानस में प्रबंधन पुस्तक के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे।

भाव और विचार भी संसाधन हैं

उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में राम के प्रबंधन के सूत्रों को ही कई प्रसंगों और उपकथाओं के माध्यम में अभिव्यक्त किया है। राम के पास रिश्तों, परिवार और समाज के लिए प्रबंधन की कई विशिष्टताएं थी जिसका तुलसी ने मार्मिकता से बखान किया है। साहित्यकार डॉ. शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि प्रबंधन का अर्थ है उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करना। और राम के लिए भाव और विचार भी एक तरह के संसाधन थे। उन्होंने इसी के माध्यम से दैनिक जीवन, समाज-जीवन और राष्ट्र जीवन में इस्तेमाल किया। लेखिका ने इसी को ध्यान में रखकर सरल शब्दों मेंं इसकी व्याख्या की है। कवि सत्यरानायण सत्तन ने कहा कि पुष्पारानी गर्ग ने रामचरित मानस के उद्यान से सुंदर पुष्पों का चयन कर प्रबंधन के सूत्रों पर सुंदरता से लिखा है। संचालन हरेराम वाजपेयी ने किया।