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मुंह तक भरे पिट, बगीचे के बाहर गंदगी

इंदौर

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:00 AM IST
मुंह तक भरे पिट, बगीचे के बाहर गंदगी
इंदौर
शहर के बगीचों से निकलने वाले जैविक कचरे को खाद में परिवर्तित करने के लिए नगर निगम ने 367 बगीचों में कंपोस्ट पिट बनाए हैं। पिट में कचरे को बायोकुलम और सेनेटाइजाइर की मदद से सड़ाया जा रहा है। लेकिन अब तक कितनी खाद बनाई जा चुकी है इसको लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

निगम के उद्यान ‌विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की तो स्थिति यह है कि वह खाद बनने की अवधि तक का सही जवाब नहीं दे सके। एक्जीक्यूटिव अफसर महेश शर्मा की मानंे तो खाद 15 दिन में बन जाती है। वहीं विशेषज्ञ श्रध्दा तोमर एक से डेढ़ महीने की बात कह रही हैं। उधर उपायुक्त से जब पूछा गया तो उन्होंने दो महीने की अ‌वधि बताई। ऐसी ही भ्रम की स्थिति खाद की मात्रा को लेकर भी बनी हुई है। विशेषज्ञ का दावा तो 10 से 12 टन यानी 12 हजार किलो तक का है। उपायुक्त हर बगीचे से 80 किलो कचरा प्रति महीना निकलना बता रहे हैं। इस लिहाज से 367 बगीचों से निकलने वाली खाद की मात्रा 28000 किलो तक जा पहुंचती है।

मौके पर यह है हाल

पिट से निकलने वाली खाद का उपयोग बगीचों में ही किया जाना है। जब जानकारी ली गई तो पता चला कि कंचनबाग क्षेत्र के बगीचा नंबर 2 में तो खाद बनने का सिलसिला ही शुरू नहीं हो सका है। जबकि पिट निर्माण को 5 महीने का वक्त हो चुका है। वहीं जिन बगीचों में खाद मिलने की शुरूआत हो चुकी है वहां पर भी संख्या एक्का-दुक्का भर ही है। यशवंत कॉलोनी के बगीचे में काम कर रहे निगमकर्मी ओम के मुताबिक पंद्रह दिन पहले एक बार खाद निकाली थी जिसे बगीचे की ही लॉन में डाल दिया गया। साऊथ तुकोगंज क्षेत्र के 5 बगीचों का काम देख रहे जुगलकिशोर ने कहा कि अब तक सिर्फ दो बार ही खाद ली गई है। जबकि पिट निर्माण को छह महीने तक का समय हो गया है।

कंचनबाग बगीचा नंबर-2 यहां अब तक खाद बनना ही शुरू नहीं हुआ

सीधी बात
मुझे नहीं पता एक्सपर्ट से पूछें


यही कोई 10 से 15 दिन


सही जानकारी उपायुक्त बताएंगे


मुझे नहीं पता..हमारी एक्सपर्ट श्रध्दा तोमर बता सकेंगी।


हां परेशानी है..


लगभग10 से 12 टन अनुमानित


30 से 45 दिन की प्रक्रिया है


हां..कुछ जगह परेशानी है।


गार्डन साफ है तो समझे पिट अॉपरेशनल हैं।


हां, कुछ कर्मचारी गड़बड़ी करते हैं।


संसाधनों की कमी


एक बगीचे से 400 किलो कचरा निकलने का अनुमान है। 20 फीसदी खाद बनती है। 80 किलो खाद हर महीने बन जाती है।


ठीक से नहीं बता सकता।


दो महीने ..


हां यह समस्या है। संसाधनों की कमीं बड़ी वजह है।

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