Hindi News »Madhya Pradesh »Indore »News» "योग सदियों पुराना कॉन्सेप्ट, इसमें इनोवेशन कर रामदेव बाबा ने पहले कॉन्सेप्ट बेचा फिर पतंजलि प्रोडक्ट्स लाए'

"योग सदियों पुराना कॉन्सेप्ट, इसमें इनोवेशन कर रामदेव बाबा ने पहले कॉन्सेप्ट बेचा फिर पतंजलि प्रोडक्ट्स लाए'

\किसी भी बिज़नेस में सबसे अहम और मुश्किल होता है कस्टमर्स का भरोसा जीतना। ब्रैंड पर लोग ट्रस्ट करेंगे तो ही बात...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 03:05 AM IST

"किसी भी बिज़नेस में सबसे अहम और मुश्किल होता है कस्टमर्स का भरोसा जीतना। ब्रैंड पर लोग ट्रस्ट करेंगे तो ही बात बनेगी। मैं कुछ मिसालों से अपनी बात समझाता हूं। पहला उदाहरण पतंजलि का लीजिए। योग कोई नई चीज़, नया कॉन्सेप्ट तो है नहीं। सदियों से योग किया जा रहा है। लेकिन क्या वजह रही कि रामदेव बाबा इसके ज़रिए सफल हुए। असल में उन्होंने पहले कुछ साल योग और आयुर्वेद के कॉन्सेप्ट को नए तरीके से बेचा। लोगों को इस बात का अहसास कराया कि 15 मिनट योग को जीवन में आयुर्वेद को शामिल करेंगे तो स्वस्थ रहेंगे और बीमारियों पर लाखों नहीं खर्च करना पड़ेंगे। लोगों को फायदा भी हुआ। जब वे खुद एक ब्रैंड की तरह स्थापित हो गए तब पतंजलि लाए। कॉन्सेप्ट सेलिंग के बाद प्रोडक्ट सेलिंग की और फिर लगातार इनोवेटिव प्रोडक्ट्स लाए।' गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के डीन डॉ. पंकज मदान एक शैक्षणिक संस्थान में शनिवार को हुए मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम में शामिल होने आए। सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. हितेश शुक्ला, विकास अरोरा, आईआईएम के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ रस्तोगी ने भी संबोधित किया।

अपने पिक्चरट्यूब प्लांट वीडियोकॉन को बेचकर एलईडी ले आया सैमसंग

प्लानिंग व स्ट्रेटजी मायने रखती है। सैमसंग को जब एलईडी टीवी लाना थे तो उसने वीडियोकॉन को अपने पिक्चरट्यूब प्लांट बेच दिए। कुछ समय बाद एलईडी टेक्निक ले आए।

डॉ. मदान ने सी के प्रहलाद की थ्योरी थी बॉटम ऑफ पिरामिड समझाते हुए बताया कि देश की तीन चौथाई आबादी पिरामिड के बॉटम में रहती है। प्रोडक्ट इनके मुताबिक बनाइए। अमर्त्य सेन की

कैपेबिलिटी डेवलपमेंट की थ्योरी भी बताई कि किसी को भी फ्री में कुछ न दिया जाए। उन्हें उसे पाने के लिए केपेबल बनाया जाए।

सक्सेस और फेल्योर दोनों की मिसाल है नोकिया

मैनेजमेंट में नोकिया को सक्सेस और फेल्योर दोनों के बारे में बताने के लिए पढ़ाया जाता है। उन्होंने बताया - नोकिया की सक्सेस स्टोरी यह रही कि उन्होंने सबसे पहले मार्केट कैप्चर कर लिया। लेकिन कंटिन्युअस इनोवेशन ज़रूरी है। बाद में जब सैमसंग टचस्क्रीन और स्मार्टफोन लाया तब भी इस कंपनी ने बदलाव नहीं किया। इसीलिए नोकिया फेल हो गई। इसी तरह नैनो कार के फेल्योर का कारण गलत ब्रैंडिंग रही। टाटा ने कहा आम आदमी के लिए सस्ती कार लाए हैं हम। आम कोई कहलाना नहीं चाहता और सस्ता शब्द भी हल्का लगता है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×