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भावपूर्ण अभिनय के साथ मराठी सिनेमा की सुरीली "स्वर यात्रा'

मराठी सिनेमा के सौ सालों की स्वर यात्रा को प्रस्तुत करने का यह एक ऐसा कलात्मक कार्यक्रम था जिसमें सुरीले गीत थे,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 03:05 AM IST

मराठी सिनेमा के सौ सालों की स्वर यात्रा को प्रस्तुत करने का यह एक ऐसा कलात्मक कार्यक्रम था जिसमें सुरीले गीत थे, नृत्य थे और इनके बारे में आधाकारिक तथ्यपरक जानकारी को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया गया। प्रभात ते सैराट कार्यक्रम को सानंद के तहत शनिवार को यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में प्रस्तुत किया गया।

संत तुकाराम से सैराट तक के गीतों की सुरीली यात्रा

लेकिन यह मराठी चित्रपट के इतिहास का सुरीला कार्यक्रम ही नहीं था बल्कि इस कार्यक्रम को इस तरह से कल्पनाशील ढंग से संयोजित किया गया था कि इसमें बदलते दौर में बदलते सिनेमा की जानकारी मिल सके। आज से 80 वर्ष पूर्व प्रदर्शित फिल्म संत तुकाराम से लेकर हाल ही में प्रदर्शित ब्लॉकबस्टर फिल्म सैराट के गीतों को पेश किया गया । इन गीतों के साथ-साथ दृश्यश्रव्य माध्यमों की सहायता से इन फिल्मों के निर्माण और कलाकारों से संबंधित कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाए गए। श्वेत-श्याम फिल्मों के गीत, गायक-गायिका मंच पर गा रहे थे तब उन्हीं गीतों को स्क्रीन पर भी दिखाया जा रहा था।

80 साल पहले फिल्म संत तुकाराम ने की थी सात लाख नब्बे हज़ार की कमाई

राहुल सोलापूरकर ने बताया कि आज की फिल्म सैराट एक ब्लॉकबस्टर फिल्म हैं लेकिन आज से 80 वर्ष पहले फिल्म संत तुकाराम से सात लाख नब्बे हजार रुपए की कमाई की थी। और टिकिट मात्र एक आना था। कार्यक्रम की संकल्पना और दिग्दर्शन मिलिंद ओक था। नृत्य निर्देशन कुणाल फडके का था और गीतों को चैतन्य कुलकर्णी, जितेंद्र भयंकर, स्वरदा गोडबोले और देविका दामले ने गाया और नृत्य किए ऋतुजा इंगळे, ऐश्वर्या काळे, सुमित गजमल, अभिषेक हवरागी, उत्कर्षा रोकड़े, सुश्रुत जोशी एवं सागर खांबे ने।

एकल-युगल गीत के साथ लावणी तथा अभंग भी गाए

इन गीतों को इस तरह से चुना गया कि इसमें गीतों के सभी प्रकार शामिल हो सकें। इसलिए इसमें भूपाळी, बालगीत, युगल गीत, भावगीत, लावणी और अभंग प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने जिस खूबी से इन्हें गाया वह दिल छू गया। इस कार्यक्रम में आधी बीज एकले, कशाला उद्याची बात, नाच रे मोरा, घनश्याम सुंदरा, झाला महार पंढरीनाथ, माझा होशील का, इंद्रायणी काठी सूरतेची छेडीता से लेकर सैराट झालो जी को बड़े ही सुरीले अंदाज में पेश किया गया। इसके साथ ही नृत्यों ने इस कार्यक्रम को नई आभा दी। निवेदनकार राहूल सोलापुर ने वासुदेव, कीर्तनकार, शाहिर जैसी भूमिकाओं में दर्शकों से संवाद किया। अभिनय से परिपूर्ण इस निवेदन से दर्शक अभिभूत से हो गए ।

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