इंदौर

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चीन से मंगाते हैं डियोड्रेंट पम्प, भारत में बनाएं तो कम होगी कीमत

एमएसएमई के असिस्टेंट डायरेक्टर नीलेश त्रिवेदी शहर में हुई एक वर्कशॉप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि...

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 03:05 AM IST
एमएसएमई के असिस्टेंट डायरेक्टर नीलेश त्रिवेदी शहर में हुई एक वर्कशॉप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कंपनी शुरू करना हो तो किस तरह पूर्वाग्रहों और अहं को ताक पर रखना होता है। शुरुआत में तो गेटकीपर का काम भी खुद ही करना पड़ता है। परिणामों की परवाह किए बगैर लगातार लगे रहना पड़ता है। तब जाकर कंपनी शुरू होती है। हालांकि अब इंडस्ट्री का रजिस्ट्रेशन बहुत आसान हो गया है। पहले तो साइकिल बनाने का लायसेंस लेने में भी 7 साल लग जाते थे। आप सभी को डोमेस्टिक और इंटरनेशनल एग्ज़ीबिशंस में जाना चाहिए। मैंने ऐसी एग्ज़ीबिशंस कई विदेशी इनोवेशंस ऐसे देखे जो यहां बनाएं जाएं तो उस प्रोडक्ट की कॉस्ट कम हो जाए। जैसे डियोड्रेंट बॉटल्स के पम्प भारत में चीन से मंगाए जाते हैं। यह बहुत सिम्पल प्रोडक्ट है, लेकिन कोई बनाता नहीं इन्हें इंडिया में। बनाने लगें तो लागत बहुत कम हो जाएगी और कम कीमत में सेल करने से सेल भी बढ़ेगी।

Workshop

एडिबल कटलरी : गेहूं से बनाए जा रहे ऐसे प्लेट-कटोरी जिन्हें खा भी सकते हैं

त्रिवेदी ने बताया एडिबल कटलरी का कॉन्सेप्ट बेंगलुरु का एक आंत्रप्रेन्योर लाया। ऐसी कटलरी जिसे खाया भी जा सकता है। न भी खाएं तो ये पूरी तरह बायोडीग्रेडेबल है और पशु भी इन्हें खा सकते हैं। इसी तरह पुराने ज़माने में राख से बर्तन साफ करने के कॉन्सेप्ट से इंस्पिरेशन लेकर जबलपुर के एक इनोवेटर ने स्किन के लिए चारकोल सोप बनाई। विदेशों में 80 ग्राम का साबुन 300 रुपए का मिलता है। जबलपुर वाले लड़के के सोप की मार्केटिंग ठीक से की जाए तो उसका प्रोडक्ट कमाल कर सकता है। मैंने एक एग्ज़ीबिशन में देखा था एक लड़का एशलेस अगरबत्ती लाया था। अगरबर्ती से ज़रा भी राख नहीं होती थी।

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