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50 लाख के 700 टैब ‘आधार’ के लायक नहीं

इंदौर

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 15, 2018, 03:05 AM IST

50 लाख के 700 टैब ‘आधार’ के लायक नहीं
इंदौर डीबी स्टार

महिला एवं बाल विकास विभाग के करीब आधे टैब आधार के लिए फिट नहीं हैं। इन पर शून्य से पांच साल तक के बच्चों का पंजीयन नहीं हो रहा है। विभाग ने अपने सुपरवाइजरों को प्रदेशभर में 1500 टैबलेट दिए हैं। इनमें एक एप्लीकेशन लोड की गई है, जिससे सुपरवाइजर अपनी विजिट रिपोर्ट भेजत हैं।

आठ माह पहले टैब पर बच्चों के आधार पंजीयन का काम भी शुरू हुआ है। इसके लिए सुपरवाइजरों को ई-गवर्नेंस से ट्रेनिंग दिलाई गई। उनकी परीक्षा भी ली गई। इसमें क्वालिफाई करने वाले कर्मचारियों को यूआईडीएआई से ऑन बोर्ड कराया गया। उन्हें टैब से आधार बनाने के लिए यूजर आईडी-पासवर्ड दिया गया, लेकिन विभाग के सिर्फ 800 टैबलेट पर आधार रजिस्ट्रेशन हो पा रहा है। 700 टैब ऐसे हैं, जो आधार की लिंक को सपोर्ट ही नहीं कर रहे हैं।

आधार वाली क्वालिटी नहीं

पड़ताल में पता चला टैब की खरीदी मप्र इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम (एमपीईडीसी) से हुई है। टैब की सप्लाय दो खेप में हुई है। दूसरी खेप में आए टैब पर तो आधार पंजीयन हो रहा है, लेकिन पहली खेप में मिले टैब आधार की लिंक को सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। अफसरों का कहना है, इनमें हल्का सॉफ्टवेयर है। इस पर विभाग की एप्लीकेशन तो काम करती है, लेकिन आधार का सॉफ्टवेयर नहीं चल सकता। पहली खेप के सभी टैब ऐसे ही हैं।

50 लाख की कीमत रखते हैं

विभागीय अफसरों का कहना है, एक टैब की खरीदी पर लगभग 7 हजार रुपए खर्च हुए हैं। यानी 700 टैब लगभग 50 लाख रुपए की कीमत रखते हैं। यदि विभाग सोच-समझकर अपग्रेड वर्जन के टैब खरीदता तो सुपरवाइजरों को आधार के लिए परेशान नहीं होना पड़ता।

इंदौर में 28 टैबलेट इस्तेमाल में

इंदौर में 72 सुपरवाइजर हैं। सभी के पास टैबलेट हैं। इनमें से 28 सुपरवाइजरों को ट्रेनिंग दिलाकर उन्हें आधार की अथॉरिटी से ऑन बोर्ड कराया गया है। ये सभी आधार का पंजीयन कर सकते हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण अधिकांश सेंटरों पर काम नहीं हो रहा है।

तीन दिन में चार पंजीयन

इंदौर में टैब से आधार बनाने में तीन दिन में चार पंजीयन हो रहे हैं। कहीं तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद पंजीयन नहीं हो रहा है। कुछ टैबलेटों में थंब इंप्रेशन की दिक्कत है तो कुछ में टच की समस्या है। जहां पंजीयन हो रहा है, वहां टैब सुपरवाइजर का थंब इंप्रेशन नहीं ले रहा है। एक-दो सेंटर को छोड़कर बाकी सभी जगह एक से हालात हैं।

टैबलेट में कई तकनीकी खामियां हैं

 टैबलेट में तकनीकी दिक्कतें हैं, इसलिए आधार पंजीयन में रुकावट आ रही है। सबसे ज्यादा नेटवर्क की समस्या है। ये टैब मोबाइल नेटवर्क पर काम करते हैं, इसलिए कनेक्शन की एरर सामने आ रही है। ई-गवर्नेंस वालों से बात की है। मुख्यालय को भी जानकारी दी है। तकनीकी खामियों का डाटा मंगा रहे हैं। उसी आधार पर विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। रजनीश सिन्हा, जिला कार्यक्रम अधिकारी

आधार किट की व्यवस्था होगी

 पहले लॉट में मिले टैब से आधार पंजीयन में दिक्कत आ रही है। दूसरी खेप वाले टैबलेट पर आसानी से काम हो रहा है। टैबलेट विभाग की एप्लीकेशन के लिए मंगवाए गए थे। आधार की लिंक को ये सपोर्ट नहीं कर रहे हैं, इसीलिए अब अलग आधार किट की योजना है। इसकी व्यवस्था कैसे होगी, इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। भविष्य में आधार का पंजीयन उसी से होगा। डॉ. अशोक भार्गव, आयुक्त, आईसीडीएस

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