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लेडीज़ पॉलीएस्टर कभी न पहनें और बॉयज़ गोल्ड एसेसरी कम से कम पहनें : रॉकी एस

फेमस डिज़ाइनर रॉकी एस का कहना है छोटे शहरों में फैशन का सीन आज से 15 साल पहले जैसा नहीं रहा। फेयरवेल्स और फ्रेशर्स के...

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 03:05 AM IST
लेडीज़ पॉलीएस्टर कभी न पहनें और बॉयज़ गोल्ड एसेसरी कम से कम पहनें : रॉकी एस
फेमस डिज़ाइनर रॉकी एस का कहना है छोटे शहरों में फैशन का सीन आज से 15 साल पहले जैसा नहीं रहा। फेयरवेल्स और फ्रेशर्स के लिए भी लड़कियां एक्सपेंसिव डिज़ाइनर ड्रेसेस ले रही हैं। मेट्रोज़ से शॉपिंग कर रही हैं। सीज़न के मुताबिक वॉर्डरोब चेंज करने जैसा कॉन्सेप्ट पहले नहीं था, लेकिन अब है। वे वॉर्डरोब कंसल्टेंट रख रही हैं। सोशल नेटवर्किंग का भी असर पड़ा है। इंस्टाग्राम ने भी लोगों को अप टु द मार्क रहने के लिए इंस्पायर किया है। लोग समझ गए हैं कपड़े बढ़िया नहीं हैं तो यू आर आउट ऑफ द सीन। सोशली भी पीछे रह जाएंगे। रॉकी गुरुवार को इंदौर आए थे। वे रेनेसां यूनिवर्सिटी के फैशन स्टूडेंट्स की मेंटरिंग करेंगे। सिटी भास्कर के लिए शहर की यंग डिज़ाइनर सपना राज ने रॉकी से बातचीत की।

रेनेसां यूनिवर्सिटी के चांसलर स्वप्निल कोठारी ने बताया कि चार साल के कोर्स बी. डिज़ाइन फैशन एंड एसेसरीज़ के तहत रॉकी शहर के बच्चों को गाइड करेंगे।

सिटी भास्कर के लिए इंदौर की यंग डिज़ाइनर सपना राज ने रॉकी एस से बातचीत की

Q. बॉम्बे, दिल्ली जैसी सिटीज़ में डिज़ाइनर ड्रेसेस की सेल पूरे साल है, लेकिन इंदौर जैसी टियर टू सिटीज़ में कम है। लोग वेडिंग्स में ही इन्वेस्ट करते हैं। ज्यादातर ब्राइड्स लहंगे पहनती हैं। ऐसे में डिज़ाइनर अपना कलेक्शन कैसे लाए। कई एक्सपेंसेस होते हैं जिनमें स्टाफ की सैलरी भी शामिल है। कैसे मैनेज करें ये सब ?

A. बी-टाउंस में रहने वाले वे लोग जो डिज़ाइनर ड्रेसेस लेते हैं, वे भी अब मेट्रोज़ से शॉपिंग कर रहे हैं। इंदौर से कई लोग फेस्टिव या वेडिंग कलेक्शन दिल्ली-मुंबई के डिज़ाइनर्स से ले रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां उन्हें चॉइसेस ज्यादा मिल जाती हैं। मेरा मानना है कि बी-टाउन में डिज़ाइनर्स को बेसिक्स पर फोकस करना चाहिए। जैसे डे टु डे आउटफिट्स, डिनर्स के लिए सेमी फॉर्मल्स और फेस्टिव कलेक्शन। एक बात समझ लीजिए कि पोटेंशियल बायर कपड़ों में बड़ा इन्वेस्टमेंट छोटे शहरों में अब नहीं करेगा। दुनियाभर का एक्सपोज़र है उसे (इंडस्ट्री में इंटरनेशनल ब्रैंड्स इतने सस्ते में मिल रहे हैं। जब तक कि आप अपनी खुद की कोई स्टाइल नहीं बना लेते, तब तक बेसिक्स से मैनेज कीजिए। हर ऐज ग्रुप पर भी फोकस नहीं कर सकते। अपनी स्टाइल डेवलप कीजिए और ऐज ग्रुप तय कीजिए।

Q. छोटे शहरों में फैशन का क्या सीन है? क्या बदलाव हुए हैं ?

A. इंडिया इज़ सिनेमा ऑब्सेस्ड कंट्री। एक्टर्स का इतना क्रेज़ है कि वो जो पहनते हैं वही फैशन बन जाता है। फैशन शोज़ में भी लोग यही पूछते हैं कि कौन एक्टर्स वॉक कर रहे हैं। कलेक्शन साइडलाइन हो जाता है। यह ऐसा ही चलेगा। करीना ने जिम में क्या पहना है। उसके बेटे ने क्या पहना है। ये भी लोग नोटिस करते हैं। क्रिएटिव फ्रीडम यहां कम मिलती है इसलिए मैं ही नहीं और भी कई डिज़ाइनर्स लंदन, पेरिस, वेगस में शो कर रहे हैं।

Q. क्या फैशन को सीरियसली लिया जा रहा है? या ये अब भी एक शौक के तौर पर है?

A. आज से 15 साल पहले ऐसा कह सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं कह सकते। छोटे शहरों में सीज़न के मुताबिक वॉर्डरोब चेंज करने जैसा कॉन्सेप्ट पहले नहीं था। अब है। फैशन का सीन अब पूरा चेंज हो गया है। सोशल नेटवर्किंग का भी असर पड़ा है। इंस्टाग्राम ने भी लोगों को अप टु द मार्क रहने के लिए इंस्पायर किया है। लोग समझ गए हैं कपड़े अप ट़ु द मार्क नहीं हैं तो यू आर आउट। सोशली भी कट जाएंगे।

Rapid Fire with Rocky S

Q. वो आउटफिट जो किसी को नहीं पहनना चाहिए?

A. पॉलीएस्टर से बनी कोई भी चीज़। प्लास्टिक और स्नेक की स्किन की तरह दिखता है। ये फैब्रिक बिलकुल अच्छा नहीं लगता।

Q. कलर्स ऑफ 2018-19?

A. ब्लैक तो मैं सबसे पहले कहूंगा, लेकिन ब्लैक के अलावा डीप बरगंडी, एमरल्ड ग्रीन, ऑलिव ग्रीन, चेरी रेड। डार्क कलर्स इन हैं।

Q. ऑफिसवेयर्स कैसे हों ?

A. फैब्रिक क्रिस्प और ब्रीदेबल हो। व्हाइट्स और ग्रे के बजाय अब लेमन, पिंक, ब्लू लीजिए।

Q. मेन्स वॉर्डरोब के मस्ट हैव्स ?

A. बढ़िया पेयर ऑफ डेनिम्स, वेल स्टिच्ड शूज़, अच्छा डियो/परफ्यूम, बॉम्बे जैकेट, क्रिस्पी व्हाइट व्हाइट शर्ट्स, चेक्स-लिनेन-वुलन ब्लेज़र्स। जेंट्स एक दम पीली गोल्ड जूलरी कम से कम या न ही पहनें।

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