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कॉलेज नहीं दे रहा था टीसी, छात्रा ने कोर्ट में खुद पैरवी कर केस जीता तो प्रबंधन ने टीसी पर लिख िदया- व्यवहार संतोषजनक नहीं

इंदौर इंस्टिट्यूट आॅफ लाॅ की छात्रा ने ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) नहीं देने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर खुद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:25 AM IST

इंदौर इंस्टिट्यूट आॅफ लाॅ की छात्रा ने ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) नहीं देने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर खुद पैरवी की। कोर्ट ने तीन दिन में टीसी देने के आदेश दिए थे, लेकिन काॅलेज प्रबंधन ने चौथे दिन छात्रा को दिनभर काॅलेज में बैठाए रखा। शाम 4.30 बजे टीसी तो दे दी, लेकिन उस पर लिख दिया कि छात्रा का व्यवहार संतोषजनक नहीं है। फीस भी बाकी है, जबकि छात्रा का कहना था कि कोई फीस बकाया नहीं है।

बदनावर निवासी निशा पाटीदार ने 2015 में इंदौर इंस्टिट्यूट आॅफ लाॅ में प्रवेश लिया था। छात्रा ने इसी साल फरवरी में चौथा सेमेस्टर पास करने से पहले ही काॅलेज में अर्जी दे दी थी कि उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से वह यहां पढ़ाई नहीं कर सकेगी। इसलिए उसे टीसी और अन्य मूल दस्तावेज दिए जाएं। काॅलेज ने 10वीं और 12वीं की मार्कशीट तो दे दी, लेकिन टीसी नहीं दी। इस पर उसने हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर की थी।

जस्टिस पीके जायसवाल व जस्टिस एसके अवस्थी की डिविजन बेंच में 12 अप्रैल को सुनवाई में छात्रा ने स्वयं पैरवी कर बताया कि काॅलेज ने उसे टीसी और होस्टल का सामान देने से मना करते हुए उस पर बकाया राशि निकाल दी। उसे पांचवें सेमेस्टर में शासकीय काॅलेज में प्रवेश मिल गया है, पर टीसी नहीं होने के कारण उसे प्रवेश से वंचित रहना पड़ जाएगा।

सुबह से शाम तक करवाया इंतजार

छात्रा के मुताबिक, वह सोमवार सुबह 11 बजे काॅलेज पहुंच गई, पर काॅलेज के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव आॅफिसर एसके श्रीवास्तव ने कहा कि शाम 4 बजे तक टीसी दे देंगे। बाहर जाकर बैठिए और इंतजार कीजिए। बाद में उसने प्रिंसिपल को फोन लगाया, तब जाकर उसे शाम पांच बजे टीसी दी गई। टीसी में ही लिख दिया कि छात्रा का व्यवहार संतोषजनक नहीं था और उस पर फीस ड्यू है।

हाई कोर्ट में ही जाकर टीसी दी : एमडी

इस बारे में काॅलेज के प्रबंध संचालक अक्षय बम से संपर्क किया तो उनका कहना था छात्रा पर फीस बकाया है और उसका व्यवहार ठीक नहीं है। फिर भी उसका समय बच जाए, इसलिए उसे काॅलेज नहीं बुलाया गया। उसे सोमवार को हाई कोर्ट में ही जाकर टीसी दे दी गई।

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