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अच्छे विचार को जीवन में उतारना है तो कंफर्ट जोन से बाहर आना होगा

अच्छे विचार सुनने-पढ़ने में तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन उस पर काम करते समय हम चेतना और प्रवृत्ति के बीच उलझ जाते...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 03:25 AM IST

अच्छे विचार को जीवन में उतारना है तो कंफर्ट जोन से बाहर आना होगा
अच्छे विचार सुनने-पढ़ने में तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन उस पर काम करते समय हम चेतना और प्रवृत्ति के बीच उलझ जाते हैं। यदि हमें अच्छे विचार को जीवन में उतारना है तो कंफर्ट जोन से बाहर आना होगा। हमें किसी के प्रभाव में आकर अपना चरित्र एवं प्रवृत्ति नहीं बदलनी।

यह बात विचारक स्वप्निल कोठारी ने माहेश्वरी समाज संयोगितागंज की ओर से आयोजित विचार शृंखला में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब भी हम अच्छे विचार को कार्य रूप में बदलना चाहते हैं तो हम चेतना और प्रवृत्ति के द्वंद्व में फंस जाते हैं। चेतना की सुनने में थोड़ी असुविधा जरूर होगी, लेकिन हम देखेंगे कि एक मुकाम के बाद हमें लाभ हो रहा है।

महत्वाकांक्षा केवल हमारे अहंकार को पोषित करती है। शुरुआत में रामेश्वरलाल असावा, मांगीलाल झंवर, अशोक ईनाणी ने दीप प्रज्वलित किया। इस दौरान सौरभ राठी और कुसुम गिलड़ा और केदार हेड़ा भी मौजूद थे।

माहेश्वरी समाज की ओर से आयोजित विचार शृंखला में आए श्रोता।

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