• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Indore News
  • News
  • जो व्यक्ति माता-पिता, बड़ों का आदर नहीं करता वह शिक्षित होकर भी अज्ञानी है : संत रामप्रसाद
--Advertisement--

जो व्यक्ति माता-पिता, बड़ों का आदर नहीं करता वह शिक्षित होकर भी अज्ञानी है : संत रामप्रसाद

जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व होता है। ज्ञान के बिना व्यक्ति के जीवन का कोई आधार नहीं है। शिक्षा का मतलब किताबी...

Danik Bhaskar | Jun 12, 2018, 03:25 AM IST
जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व होता है। ज्ञान के बिना व्यक्ति के जीवन का कोई आधार नहीं है। शिक्षा का मतलब किताबी ज्ञान ही नहीं, व्यवहारिक ज्ञान से भी है। जो व्यक्ति पढ़ा-लिखा तो है पर अपने माता पिता, गुरु जन के साथ बड़ों का आदर नहीं करता तो उसके ज्ञान का कोई महत्व नहीं है। सभी के प्रति सम्मान और आदर का भाव रखना जरूरी है।

यह बात उषा नगर स्थित श्री लक्ष्मराम सत्संग भवन में अंतरराष्ट्रीय श्रीराम स्नेही संप्रदाय के संत रामप्रसाद महाराज बड़ौदा (गुजरात) ने सोमवार को सत्संग के दौरान कही। उन्होंने कहा सद्‌गुणों के साथ संगत ही सत्संग है। वास्तव में सत्संग के लिए प्रभु कृपा जरूरी है, बिना प्रभु कृपा के सत्संग नहीं होता। गुरु एवं विद्वानजनों से मिलना उनका सान्निध्य भी सत्संग का ही स्वरूप है। यहां वहां बैठने टाइम पास करने से बेहतर होगा गुरु की शरण में जाए, विद्वानों के साथ संपर्क में रहे ताकि उनके बीच होने वाली मंत्रणा को सुन सके यह श्रवण भी आपके जीवन को श्रेष्ठता देगा। प्रभु भक्ति ही मुक्ति का मार्ग है और इसके लिए गुरु की शरण में जाना आवश्यक है। सत्संग मंगलवार और बुधवार को सुबह 8.30 से से 9.30 बजे तक होंगे।

विद्याधाम में चल रही रामकथा में सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। आचार्य हरिकृष्ण शास्त्री मंगलवार को कथा में सीताहरण, शबरी मिलन का प्रसंग सुनाएंगे।

समर्पित भाव से भक्ति करने से होगा उद्धार : रघुनाथदास

जीवन में कभी अभिमान नहीं करें। जहां अभिमान होता है, वहां भगवान वास नहीं करते है। वहीं, जीवन में हमेशा सबका सम्मान करें। किसी का अपमान नहीं करें, जो अपने सारे कार्य भगवान को समर्पित करके भक्ति भाव से अराधना करते है उनका उद्धार जरूर होता है। जो व्यक्ति किसी को कष्ट नहीं पहुंचाता है। वह भगवान श्रीकृष्ण को अत्यन्त प्रिय है। यह बात संत रघुनाथदास महाराज ने सोमवार को पंचकुइया स्थित श्री राम मंदिर आश्रम में अधिक मास दौरान चल रही भागवत कथा में कही। कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव मनाया गया। महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास महाराज ने बताया कथा के साथ ही भागवत पारायण भी चल रहा है।

तिलक नगर में भागवत कथा का समापन, हुआ सम्मान समारोह

तिलक नगर स्थित दुर्गामाता मंदिर में पं. संजय कृष्ण त्रिवेदी के सान्निध्य में भागवत कथा का समापन किया गया। आयोजन तिलकनगर वैष्णव मंदिर ट्रस्ट और राधा बिहारी महिला मंडल तिलक नगर द्वारा किया गया। मंदिर ट्रस्ट के व्यवस्थापक सुनील गार्गव ने बताया इस मौके पर महिला मंडल की रूपा पवार को सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया। उधर, सुदामा नगर स्थित माता आनंदेश्वरी मंदिर में चल रही भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाहोत्सव मनाया गया। व्यास पीठ का पूजन कांग्रेस नेता सुरजीतसिंह चड्ढा ने किया। कथा प्रमुख कमल साबू ने बताया कथा का समापन मंगलवार को होगा।

मां शारदा मंदिर में चल रही भागवत कथा में मना कृष्ण जन्मोत्सव, समापन 14 को

हमारी संस्कृति में उत्सवों के अनेक रंग भरे हुए हैं। दुनिया के किसी देश में इतने तीज-त्योहार एवं उत्सव नहीं मनाए जाते जितने हमारे यहां मनाते हैं। हमारी सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाते हैं ये तीज-त्योहार। भारत भूमि अवतारों की ही पुण्य भूमि है। भगवान दुष्टों के नाश और सज्जनों के संरक्षण के लिए ही पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। यह बात पलसीकर चौराहा स्थित मां शारदा मंदिर पर स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने भागवत कथा के दौरान सोमवार को कही। व्यासपीठ का पूजन भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने किया। संयोजक कमल वर्मा ने बताया कथा 14 जून तक दोपहर 3 से 6 बजे तक होगी।