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संतों की वाणी के जरिए दिया सामाजिक समरसता का संदेश

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2018, 03:30 AM IST

News - यहां एक तरफ पुस्तकों में छिपे विचारों और किस्सों-कहानियों का उजाला था तो दूसरी तरफ एक लोक परंपरा भारुड़ के तहत...

संतों की वाणी के जरिए दिया सामाजिक समरसता का संदेश
यहां एक तरफ पुस्तकों में छिपे विचारों और किस्सों-कहानियों का उजाला था तो दूसरी तरफ एक लोक परंपरा भारुड़ के तहत महाराष्ट्र के संतों की वाणी के जरिए सामाजिक संदेश देने की सुरीली कोशिशें भी थी। मप्र मराठी अकादमी की पांच दिनी पुस्तक प्रदर्शनी प्रीतमलाल दुआ कला वीथिका में लगाई गई जिसमें तीन हज़ार मराठी पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। इसके बाद प्रीतमलाल दुआ सभागृह में चंदाताई तिवाड़ी, संध्या तिवाड़ी और साथियों ने भारूड़ प्रस्तुत किया।

पुस्तक प्रदर्शनी में कथात्मक-गैरकथात्मक, ऐतिहासिक, जीवनियां और पौराणिक कथाओं की विभिन्न पुस्तकें प्रदर्शित हैं। इसमें वासी बेंद्रे की किताब शिव चरित्र और संभाजी चरित्र पाठकों को पसंद आ रही हैं। प्रवीण दवणे के ललित निबंधों की किताब सावर रे और विजय देवधर की साहस कथा भी इसमें शामिल हैं। मैट्रो के जनक श्रीधरण पर लिखी गई किताब श्रीधरण और सुप्रिया सहस्रबुद्धे की किताब ग्रीक पुराण भी यहां देखी जा सकती है। रा. ची. ढेरे की किताबें श्रीतुलजा भवानी और श्री विट्ठल समन्वय के साथ ही शेष मोरे की किताब गांधी हत्या और सावरकरांची बदनामी किताबों भी पाठकों ने दिलचस्पी दिखाई। इसके अलावा मराठी में अगाथा क्रिस्टी के उपन्यास भी हैं। प्रदर्शनी का उदघाटन वृहन्महाराष्ट्र मंडळ, नई दिल्ली के कार्याध्यक्ष मिलिंद महाजन ने किया।

प्रपंचों और पाखंडों से मुक्ति के लिए किया जागरूक

शाम को 7 बजे से चंदा तिवाड़ी और साथियों ने संत एकनाथ, ज्ञानेश्वर, तुकाराम और जना बाई की वाणी को प्रस्तुत किया गया। इसमें तमाम प्रपंचों और पाखंडों में फंसे लोगों की जागृत करने के लिए प्रेरित किया गया। इसमें बुरगुंडा के जरिए बताया गया कि मोहमाय से कैसे छुटकारा पाकर बेहतर जीवन जिया जा सकता है। इसके बाद कोल्हाटी, खंडोबा मल्हारी मार्तण्ड और भागाबाई के जरिए सामाजिक जागरूकता पैदा की गई। साथ ही भैरवी में नाथजी के घर की ये उलटी निशानी, प्यास लगे पानी हमने ना जानी के जरिए पर्याववरण को समझने-संरक्षण करने का संदेश भी दिया गया।

4 जून को लेखिका माधवी करमळकर की पुस्तक ब्रह्म पाहिले का विमोचन होगा। इसके बाद शाम 6.30 बजे डॉ. शोभा शौचे का साहित्यावर इतर माध्यामांचा प्रभाव विषय पर व्याख्यान होगा। पुस्तक प्रदर्शनी 6 जून तक रोज़ाना सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक देखी जा सकती है।

मराठी पुस्तक प्रदर्शनी में तीन हजा़र किताबें प्रदर्शित, भारुड़ की प्रस्तुति भी दी गई

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