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अमृतसर की 80 फीसदी चावल मिलें घाटे में, मांग भी कमजोर

एक अनुमान के अनुसार अमृतसर की 80 से 90 प्रतिशत चावल मिलें घाटे में चल रही है। पिछले 10 दिनों 2-3 मिलों की हवा खराब हो गई है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:30 AM IST

एक अनुमान के अनुसार अमृतसर की 80 से 90 प्रतिशत चावल मिलें घाटे में चल रही है। पिछले 10 दिनों 2-3 मिलों की हवा खराब हो गई है। एक बड़ी मिल बंद होने की चर्चा बाजार में और चल पड़ी है। चावल मिलों के पाम बैंकों की बड़ी-बड़ी लिमिट है। बैलेंस शीट में लाभ बताया जाता रहा। चावल में निर्यात मांग सामान्य है अगले दो माह में चावल में घरेलू मांग बढ़ सकती है।

व्यापारिक क्षेत्रों के अनुसार पिछले 4-5 वर्ष से चावल के भावों में बनी तेजी नहीं आने से कुछ मिलें आर्थिक संकट में फंस गई है। 2-3 मिलें 250 से 300 करोड़ के घाटे में है। एक मिल करीब 600 करोड़ के घाटे से जूझ रही है। इन मिलों में बैंकों का रुपया उलझा हुआ है। सीजन के प्रारंभ में मिल चलाने के लिए प्रतिस्पर्धा में धान ऊंचे भावों पर खरीदा जाता है और अंत में चावल उस अनुपात में नहीं बिकता है, जिससे घाटा होता जा रहा है। बारीक चावल का निर्यात सामान्य है। घरेलू मांग 25 प्रतिशत कम है। इस माह और मई-जून में मांग निकलने की आशा रखी जाती है। यूरोपीय बाजारों में अधिक पेस्टीसाइड उपयोग किए गए धान से बने चावल पर रोक लग गई है। अमेरिका में पहले से लगी हुई है। केवल खाड़ी देशों में जा रहा है। अमृतसर मंडी में धान की आवक सीमित मात्रा में हो रही है। भाव 3600 से 3650 रुपए पिछले तीन-चार माह से चल रहे हैं। गेहूं का सीजन शुरू हो रहा है। अगले एक डेढ़ माह तक धान की आवक पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चावल 1121 सेला लूज में 6750 स्टीम 7200 रुपए बिक रहा है। सेला में निर्यात मांग है।

स्टीम चावल घरेलू व्यापारी जितनी जरूरत है उतनी खरीदी कर रहे हैं। यूरोपीय बाजारों में निर्यात घटा है। ये बाजार 10-20 कंटेनर ही खरीदी करते थे, किंतु उसमें भी बाधा आ गई है अलग-अलग शहरों में कम पेस्टीसाइड वाले धान की खरीदी करने के लिए विशेषज्ञ घूम रहे हैं। चावल में मांग और भाव नहीं बढ़े तो मिलों की स्थिति संकट में बनी रह सकती है।

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