इंदौर

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दिक्कतें हैं, तभी बिगड़ रही सफाई व्यवस्था

मुझे यह ऐलान करते हुए बिलकुल आश्चर्य नहीं है कि इंदौर फिर से स्वच्छता में नंबर-वन बना है। यह शब्द थे केंद्रीय आवास...

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2018, 03:30 AM IST
दिक्कतें हैं, तभी बिगड़ रही सफाई व्यवस्था
मुझे यह ऐलान करते हुए बिलकुल आश्चर्य नहीं है कि इंदौर फिर से स्वच्छता में नंबर-वन बना है। यह शब्द थे केंद्रीय आवास राज्य मंत्री हरदीपसिंह पुरी के, जो उन्होंने 16 मई को इस साल के स्वच्छता सर्वे का रिपोर्ट कार्ड जारी करते वक्त कहे थे। अब दो दिन पहले महापौर मालिनी गौड़ ने नगर निगम की एक बैठक में तल्ख अंदाज में जो कहा, उसे पढ़ें। उन्होंने कहा- सफाई का जो सिस्टम बनाया था, वह बिगड़ क्यों रहा है, कचरा गाड़ियां समय पर नहीं पहुंचती, गाद नहीं उठ रही, यह आप लोगों की अक्षमता को दर्शाता है। इन दोनों की बातों का विषय एक ही है, पर जो अंतर है, वह बहुत गहरा, फिक्र बढ़ाने और मंथन करने वाला है।

महज 27-28 दिन में एक शहर, जो सिरमौर है, जो नंबर-वन है, जिसकी सफाई व्यवस्था का अनुसरण देश के कई बड़े शहर करते हैं, उसमें यह स्थिति थोड़ी चौंकाती है। वह इसलिए कि शहर के 25 लाख से ज्यादा लोगों की दैनदिनी में कोई बदलाव नहीं आया है, सफाई को लेकर वे वैसे ही सतर्क हैं, जैसे पहले थे। महापौर ने चिंता उनको लेकर जताई भी नहीं है, पर इतना कुछ एकाएक होने लगा है तो हर तरफ नजर दौड़ा लेना ठीक रहता है। अब बात उन निगम कर्मचारियों की, जिनके कारण यह चिंताएं सामने आई हैं। नि:संदेह सफाई के मामले में उन्होंने बेहतर काम किया, लेकिन कहते हैं न कि कभी भी व्यवस्था व्यक्ति केंद्रित नहीं बनाना चाहिए। कुछ ऐसा ही निगम के साथ होता लग रहा है। व्यवस्था में जुटे लोगों को यह समझना होगा कि जरा सी ढील-पोल शहर का बड़ा नुकसान करवा सकती है। इतनी बड़ी तादाद में किसी अभियान को लोगों ने मजबूत सहारा दिया है, तो वे कमजोर पिलर बनकर शहर को पीछे न धकेलें। ऐसा कुछ हुआ तो न लोग, न शहर यह बर्दाश्त करेगा।

दरअसल, पिछले कुछ समय से सफाई को लेकर जो समस्या आ रही है, वह पूरी तरह कचरा संग्रहण से जुड़ी है। कचरा गाड़ियों के समय, उनकी नियमितता और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर लोगों की शिकायतें हैं। कई कॉलोनियों में दोपहर में गाड़ी पहुंचती है, तब तक कामकाजी लोग घर से जा चुके होते हैं। कर्मचारी खुद कचरा उठाकर गाड़ी में नहीं डालते। ऐसे में कॉलोनियों के लिए तो सिस्टम यही होना चाहिए कि सुबह छह से 11 बजे के बीच कचरा किसी भी हालत में उठ जाए। विवाद की स्थिति से बचने के लिए कर्मचारियों की अदला-बदली भी होती रहे। निगरानी के लिए फिर एक तंत्र खड़ा किया जाए, तभी हम रेटिंग में अपनी नंबर वन स्थिति को बरकरार रख पाएंगे।

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